केंद्रीय सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक को रोकने के लिए नया संशोधन विधेयक पेश किया। इसमें व्यक्तिगत दण्ड 10 साल तक की जेल और ₹50 लाख जुर्माना, संगठित अपराधियों पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना तय किया गया है।
मुख्य बिंदु
- जेल की अधिकतम अवधि 5 से 10 साल बढ़ाई गई
- व्यक्तिगत जुर्माना ₹10 लाख से ₹50 लाख किया गया
- विशेष तेज़-ट्रैक कोर्ट और टास्क फोर्स की स्थापना
विधान परिषद ने 27 जुलाई को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (धोखाधड़ी रोक) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। यह 2024 में लागू हुए मौजूदा कानून को संशोधित कर छात्रों, अभिकर्ताओं और संगठित नेटवर्कों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान करता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 2022 में पहली बार राष्ट्रीय परीक्षा में पेपर लीक की व्यापक घटनाओं ने सरकार को त्वरित कार्रवाई के लिए मजबूर किया था, जिसके परिणामस्वरूप 2024 में मौजूदा एंटी‑पेपर‑लीक एक्ट पारित हुआ था। अब नई प्रस्तावना उन कमियों को दूर करने का प्रयास करती है।
क़ानून में प्रमुख परिवर्तन
विधेयक में व्यक्तिगत अपराधियों के लिए जेल की अधिकतम सीमा पाँच साल से बढ़ाकर दस साल कर दी गई है। जुर्माना भी पाँच गुना बढ़ाकर ₹50 लाख किया गया। संगठित अपराधियों के लिए जेल की अवधि सात साल तथा जुर्माना ₹10 करोड़ तक बढ़ा दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, केंद्र किसी भी पेपर लीक मामले को केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप सकता है और दो महीने के भीतर जांच समाप्त करने के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन करेगा।
विशेष तेज़‑ट्रैक कोर्ट
हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में विशेष तेज़‑ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे, जहाँ सुनवाई दैनिक होगी और चार्ज शीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमा समाप्त होना अनिवार्य होगा। अपील के लिए हाई कोर्ट के दो जज तय करेंगे और 90 दिनों के भीतर निर्णय देना अनिवार्य होगा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that strengthening legal deterrents will restore confidence in India's premier examinations, safeguarding merit‑based admissions and protecting the nation's talent pipeline.
“कठोर दंड और तेज़ न्यायिक प्रक्रिया ही पेपर लीक को जड़ से खत्म कर सकती है,” प्रो. अजय सिंह, राष्ट्रीय कानून विश्वविद्यालय ने कहा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या यह विधेयक सभी सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा?
उत्तर: हाँ, यह सभी केंद्र और राज्य स्तर की सार्वजनिक परीक्षाओं, जैसे NEET, JEE, UPSC आदि, पर समान रूप से लागू होगा।
प्रश्न 2: तेज़‑ट्रैक कोर्ट की सुनवाई में देरी होने पर क्या उपाय हैं?
उत्तर: यदि कोई केस 90 दिनों से अधिक समय लेता है, तो हाई कोर्ट को विशेष निर्देश जारी करने का अधिकार होगा।