NEET परीक्षा में बार-बार होने वाले पेपर लीक को रोकने के लिए विशेषज्ञों ने एक क्रांतिकारी सुधार का प्रस्ताव दिया है। इसमें कंप्यूटर आधारित परीक्षा और अत्याधुनिक प्रश्न बैंक प्रणाली का उपयोग शामिल है।
मुख्य बातें
- राधाकृष्णन समिति के ढांचे को लागू करने की आवश्यकता।
- 'आइटम रिस्पांस थ्योरी' आधारित सुरक्षित प्रश्न बैंक का निर्माण।
- दो-स्तरीय (Two-tier) ऑन-डिमांड परीक्षा प्रणाली का प्रस्ताव।
- डिजिटल विभाजन को पाटने के लिए मुफ्त सिम्युलेटर पोर्टल।
भारत में हर साल NEET-UG परीक्षा के दौरान लाखों छात्र एक अत्यंत तनावपूर्ण और उच्च-दांव वाली प्रक्रिया से गुजरते हैं। 2024 में, लगभग 24 लाख उम्मीदवारों ने 1.2 लाख मेडिकल सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा की। इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धा ने एक ऐसी प्रणाली को जन्म दिया है जहाँ पेपर लीक और प्रशासनिक चूकें एक गंभीर समस्या बन गई हैं, जिससे सार्वजनिक विश्वास में भारी कमी आई है।
राधाकृष्णन समिति के सुझाव और तकनीकी समाधान
पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति ने परीक्षा प्रशासन में सुधार के लिए एक व्यापक खाका पेश किया है। इसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का पुनर्गठन, एन्क्रिप्टेड डिजिटल पेपर ट्रांसमिशन और बायोमेट्रिक 'डिजी-एग्जाम' प्रमाणीकरण जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि असली समाधान 'स्थिर' (static) प्रश्नपत्रों से हटकर एक गतिशील और कंप्यूटर आधारित मॉडल की ओर बढ़ने में है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान केंद्रीकृत प्रणाली में 'सिंगल पॉइंट ऑफ फेलियर' का जोखिम बना रहता है। यदि प्रश्नपत्र पहले से तैयार और भौतिक रूप से वितरित किए जाते हैं, तो उन्हें लीक करना आसान होता है। एक गतिशील प्रश्न बैंक प्रणाली इस जोखिम को लगभग समाप्त कर सकती है।
तकनीकी रूप से उन्नत प्रश्न बैंक और ऑन-डिमांड परीक्षा संरचना पेपर लीक के आर्थिक और सामाजिक लाभ को पूरी तरह खत्म कर सकती है।
प्रस्तावित मॉडल में आइटम रिस्पांस थ्योरी (IRT) का उपयोग करने की बात कही गई है। यह तकनीक GRE और GMAT जैसे वैश्विक मानकों की तरह काम करती है, जहाँ एक सुरक्षित रिपॉजिटरी से यादृच्छिक (randomized) प्रश्न उठाकर हर छात्र के लिए अलग और अद्वितीय पेपर तैयार किए जाते हैं। इससे भौतिक पेपर का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
दो-स्तरीय परीक्षा और डिजिटल समानता
सुधार के दूसरे चरण में एक 'दो-स्तरीय' (Two-tier) संरचना का प्रस्ताव है। छात्र साल में किसी भी समय प्रारंभिक स्क्रीनिंग परीक्षा दे सकते हैं। जो छात्र एक निश्चित बेंचमार्क पार करेंगे, वे अंतिम चयन परीक्षा में शामिल होंगे। इससे परीक्षा का बोझ साल भर में बंट जाएगा और कोचिंग माफियाओं का एकाधिकार भी कम होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या नया मॉडल ग्रामीण छात्रों के लिए कठिन होगा?
नहीं, सरकार मुफ्त सिम्युलेटर पोर्टल और सार्वजनिक केंद्रों के माध्यम से डिजिटल साक्षरता सुनिश्चित करने का प्रस्ताव दे रही है।
2. 'आइटम रिस्पांस थ्योरी' क्या है?
यह एक सांख्यिकीय पद्धति है जो प्रश्नों की कठिनाई और छात्र की क्षमता का सटीक मापन करती है।