आईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. संदीप शुक्ला ने आईआईटी मद्रास के प्रो. वी कमकोटी के शाक्ती चिप प्रोजेक्ट को दीर्घकालिक शोध का एक सफल केस स्टडी बताया। यह परियोजना भारत के अर्द्धचालक (सेमिकंडक्टर्स) आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Key Takeaways

  • शाक्ती प्रोसेसर का विकास 2000 के दशक में शुरू हुआ
  • ओपन‑सोर्स मॉडल ने स्टार्ट‑अप्स को प्रेरित किया
  • शिक्षा संस्थानों में प्रतिभा निर्माण का दीर्घकालिक प्रभाव

परिचय

आईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. संदीप के. शुक्ला ने हाल ही में भारत के अर्द्धचालक मिशन में प्रो. वी कमकोटी की भूमिका को एक "केस स्टडी" कहा। शाक्ती (SHAKTI) चिप, जो एक RISC‑V आर्किटेक्चर पर आधारित है, भारत की स्वदेशी प्रोसेसर रणनीति का प्रतीक बन गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

शाक्ती प्रोजेक्ट की जड़ें 2000 के शुरुआती वर्षों में हैं, जब प्रो. कमकोटी ने ब्लूस्पेक कंपनी के साथ मिलकर माइक्रो‑आर्किटेक्चर को परिभाषित किया। शुरुआती टेप‑आउट 180 nm तकनीक पर हुआ, जो आज के स्मार्टफ़ोन प्रोसेसरों की तुलना में पुरानी मानी जाती है, परंतु भारत के लिए एक महत्वपूर्ण पहला कदम था।

शाक्ती चिप का विकास

प्रो. शुक्ला के अनुसार, शाक्ती केवल एक सफल चिप नहीं, बल्कि एक ओपन‑सोर्स प्लेटफ़ॉर्म है जिसने कई स्टार्ट‑अप्स को प्रेरित किया, जैसे कि माइंडग्रोव टेक्नोलॉजीज, जो शाक्ती एलुमनी द्वारा स्थापित किया गया है। इस मॉडल ने भारतीय शोध को व्यावसायिक उपयोग में बदलने की राह खोली।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि शाक्ती जैसी पहलें केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, नीति निर्माण और उद्योग‑शिक्षा सहयोग को भी मजबूती देती हैं। यह भारत के डिजिटल भविष्य के निर्माण में एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनती है।

"शाक्ती परियोजना यह दर्शाती है कि दीर्घकालिक अकादमिक शोध कैसे राष्ट्रीय अर्द्धचालक परिदृश्य को बदल सकता है," कहते हैं डॉ. अनन्या राव, BozokMedia वरिष्ठ विश्लेषक।
Did You Know?: शाक्ती का पहला प्रोसेसर 180 nm नोड पर निर्मित हुआ, जो आज के मुख्यधारा के चिप्स से काफी पुराना माना जाता है।

Frequently Asked Questions

शाक्ती चिप का मुख्य उद्देश्य क्या है?
यह भारत में स्वदेशी प्रोसेसर विकास को तेज़ करने और ओपन‑सोर्स इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करने के लिए बनाया गया है।

क्या शाक्ती का कोई व्यावसायिक उपयोग है?
हां, कई स्टार्ट‑अप्स और शैक्षणिक संस्थान शाक्ती डिज़ाइन को आधार बनाकर उत्पाद विकसित कर रहे हैं।