तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने बी.एस. अब्दुर रहमान क्रेसेंट इंस्टीट्यूट में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि देश की संस्कृति और मूल्यों को शिक्षा के पाठ्यक्रम में समाहित किया जाना चाहिए। उन्होंने संस्थानों को नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनाते हुए उद्यमशीलता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्य बिंदु

  • शिक्षा में राष्ट्रीय मूल्यों का समावेश आवश्यक
  • संस्थाओं को उद्यमशीलता विकास कोश स्थापित करने की दिशा में प्रेरित किया गया
  • संख्यात्मक डेटा से अल्पसंख्यक संस्थानों की भूमिका उजागर हुई

राज्यपाल राजेंद्र विष्णु अर्लेकर ने चेन्नई में बी.एस. अब्दुर रहमान क्रेसेंट इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (BSACIST) में ‘विकसित भारत @ 2047’ राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि देश की भावना और संस्कृति को पाठ्यक्रम एवं सिलेबस में प्रतिबिंबित होना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता और सामाजिक विविधता का सम्मान स्थापित हो।

अर्लेकर ने संस्थानों को केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनाते हुए उद्यमशीलता विकास कोश (Entrepreneurship Development Cells) की स्थापना पर बल दिया। उन्होंने कहा, “हम सभी इस धरती, इस देश और इस संस्कृति के भागीदार हैं। हमारा शैक्षणिक तंत्र इस भावना के अनुरूप होना चाहिए।”

BSACIST के प्रो-चांसलर अब्दुल कादिर ए. रहमान बुखारी ने बताया कि संस्थान ने सात साल पहले एक इंक्यूबेशन सेंटर शुरू किया, जिसमें अब 158 स्टार्टअप्स हैं, 80 ने ग्रेजुएशन पूरा कर लिया है, और कुल मूल्य लगभग ₹3,200 करोड़ है। उन्होंने कहा कि सभी 11,500 छात्रों के लिए एक उद्यमशीलता कोर्स पेश किया जाएगा, जिसका लक्ष्य एक प्रतिशत छात्रों को उद्यमी बनाना है।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों आयोग (NCMEI) के सदस्य शहीद अख्तर ने बताया कि 14,364 संस्थानों को अल्पसंख्यक स्थिति मिली है, जिसमें तमिलनाडु में 1,175 संस्थान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में पढ़ने वाले 68% से अधिक छात्र अन्य समुदायों के हैं, जो सामाजिक एकता को सुदृढ़ करता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में शिक्षा नीति का विकास हमेशा राष्ट्रीय मूल्यों और सामाजिक विविधता के संतुलन पर केंद्रित रहा है। 1992 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने “सर्वोत्तम शैक्षिक मूल्यों” को प्रमुखता दी, जबकि 2020 की नई नीति में उद्यमशीलता और डिजिटल कौशल को प्रमुखता दी गई है। यह सम्मेलन इन नीतियों के कार्यान्वयन को तेज करने का प्रयास है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that aligning curricula with national ethos can boost social cohesion and economic growth, especially when minority institutions become hubs for innovation and entrepreneurship.

“शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरियों की पूर्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करना होना चाहिए।” – प्रो. अनिल कुमार, शैक्षणिक नीति विशेषज्ञ
क्या आप जानते हैं?: भारत के पहले उद्यमशीलता केंद्र का गठन 1995 में IIT दिल्ली में हुआ था, जो आज 500 से अधिक स्टार्टअप्स को समर्थन देता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: अल्पसंख्यक संस्थानों में उद्यमशीलता को कैसे बढ़ावा दिया जा रहा है?

उत्तर: कई संस्थानों ने इंक्यूबेशन सेंटर्स, स्टार्टअप फंड और विशेष पाठ्यक्रम स्थापित किए हैं, जिससे छात्रों को व्यावसायिक कौशल सिखाया जा रहा है।

प्रश्न 2: राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में सांस्कृतिक विविधता को कैसे शामिल किया जाएगा?

उत्तर: नई सिलेबस डिजाइन में स्थानीय इतिहास, भाषा और कला को प्रमुखता दी जाएगी, ताकि छात्रों में राष्ट्रीय एकता के साथ विविधता का सम्मान विकसित हो।