संसदीय समिति ने कक्षा 9‑12 के लिए नई पाठ्यक्रम और उसकी कार्यान्वयन में अंतर उजागर किया। पाठ्यपुस्तकों की कमी, आवेदन‑आधारित परीक्षा पैटर्न और अपर्याप्त प्रशिक्षण लागत ने छात्रों में गंभीर तनाव पैदा किया है।

मुख्य बिंदु

  • सीबीएसई के नए पाठ्यक्रम के साथ पाठ्यपुस्तकों की डिलीवरी में देरी।
  • आवेदन‑आधारित बोर्ड परीक्षा पैटर्न से छात्रों में बढ़ा तनाव।
  • सरकारी और निजी विद्यालयों में शिक्षक प्रशिक्षण के खर्च में असमानता।

संसदीय समिति की रिपोर्ट का सारांश

भारतीय संसद की अनुमान समिति ने 18वें लोकसभा के दसवें रिपोर्ट में बताया कि कक्षा 9‑12 के लिए नई पाठ्यक्रम संरचना ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा 2023 के लक्ष्य पूरे किए हैं, परंतु उनका कार्यान्वयन धीमा है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) अभी भी नए पाठ्यपुस्तकों को प्रकाशित कर रही है, जिससे स्कूलों को पुरानी सामग्री के साथ उन्नत पाठ्यक्रम पढ़ाना पड़ रहा है।

पाठ्यपुस्तक और परीक्षा पैटर्न से बढ़ता तनाव

समिति ने कहा, "पाठ्यपुस्तकों की अनुपलब्धता और नए, आवेदन‑आधारित बोर्ड परीक्षा पैटर्न से विशेष रूप से कक्षा 10 और 12 के छात्रों में महत्वपूर्ण शैक्षणिक तनाव और भ्रम उत्पन्न हो रहा है।" यह तनाव छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य और प्रदर्शन को प्रभावित कर रहा है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that delays in textbook rollout coupled with a shift to application‑based assessments can widen educational inequities, especially in rural and semi‑urban regions where resources are already scarce.

"यदि पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति तेज़ नहीं की गई तो नई परीक्षा प्रणाली का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा," शैक्षिक विशेषज्ञ डॉ. सीमा अग्रवाल ने टिप्पणी की।

शिक्षक प्रशिक्षण में गिरावट

सीबीएसई ने पिछले पाँच वर्षों में 11 मिलियन से अधिक शिक्षकों को ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रशिक्षण दिया है, परन्तु 2022 में 5.3 मिलियन प्रतिभागियों से घटकर 2025 में केवल 1,62,814 तक गिरावट आई है। निजी स्कूलों में प्रशिक्षण शुल्क और अतिरिक्त 700 रुपये प्रति शिक्षक की लागत ने कई संस्थानों को बोझिल बना दिया है।

क्या आप जानते हैं?: 2024 में कक्षा 10 के परीक्षा के लिए 22,51,812 छात्र पंजीकृत हुए, जबकि कक्षा 12 के लिए केवल 16,33,730।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: नई पाठ्यपुस्तकों की डिलीवरी में देरी क्यों हो रही है?
उत्तर: NCERT की प्रकाशन प्रक्रिया में तकनीकी और बजट संबंधी बाधाएँ हैं, जिससे स्कूलों तक समय पर पहुंच नहीं हो पाती।

प्रश्न 2: सरकार ने शिक्षक प्रशिक्षण में कमी को कैसे संबोधित किया है?
उत्तर: समिति ने निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए वार्षिक लक्ष्य निर्धारित करने और निजी विद्यालयों के लिए शुल्क में रियायत की सिफारिश की है।