बिहार के नालंदा जिले में एक स्कूल में मिड-डे मील के दौरान नमक की जगह गलती से डिटर्जेंट पाउडर परोस दिया गया, जिससे 34 बच्चे बीमार हो गए। सभी बच्चों को इलाज के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
- नालंदा के परसा मिडिल स्कूल में मिड-डे मील के दौरान 34 बच्चे बीमार हुए।
- आरोप है कि नमक की जगह गलती से डिटर्जेंट पाउडर परोस दिया गया।
- सभी बच्चों की स्थिति फिलहाल स्थिर है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बिहार के नालंदा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां परसा मिडिल स्कूल के कम से कम 34 बच्चे मिड-डे मील खाने के बाद गंभीर रूप से बीमार हो गए। घटना मंगलवार (18 अगस्त, 2026) की है, जब बच्चों ने भोजन करने के बाद गले में जलन और पेट में तेज दर्द की शिकायत की।
घटना का विवरण और छात्रों की स्थिति
अस्पताल में भर्ती बच्चों में से एक, प्रीति कुमारी ने बताया कि उन्होंने चावल और आलू-सोयाबीन की सब्जी खाई थी, लेकिन खाने के तुरंत बाद उन्हें डिटर्जेंट की गंध महसूस हुई। कई छात्र तो भोजन करने के बाद बेहोश भी हो गए थे। नालंदा सिविल सर्जन जय प्रकाश सिंह ने पुष्टि की है कि यह फूड पॉइजनिंग का मामला है, हालांकि उन्होंने राहत की बात यह कही कि सभी बच्चों की स्थिति फिलहाल स्थिर है।
क्या यह एक 'गलती' थी?
स्कूल के प्रधानाध्यापक शैलेन्द्र कुमार सिंह ने स्वीकार किया कि रसोई में काम करने वाले कर्मचारियों से एक बड़ी चूक हुई है। उन्होंने कहा, "रसोई में तीन रसोइये थे, और एक महिला रसोइया बच्चों को खाना खिला रही थी। कुछ बच्चों ने नमक मांगा, और गलती से कर्मचारी ने नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर परोस दिया।" यह मिड-डे मील एक एनजीओ द्वारा आपूर्ति किया जा रहा था।
प्रशासनिक लापरवाही और रसोइयों के प्रशिक्षण में कमी इस तरह की हृदयविदारक घटनाओं का मुख्य कारण बनती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में भारी खामियां हैं। केवल एनजीओ पर निर्भरता और रसोइयों के लिए उचित स्वच्छता एवं सुरक्षा प्रशिक्षण का अभाव बच्चों के जीवन को खतरे में डाल रहा है। यह घटना पूरे राज्य में मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में मिड-डे मील योजना बच्चों के पोषण के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, लेकिन समय-समय पर स्वच्छता और भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी लापरवाही की खबरें आती रहती हैं, जो इस योजना की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या सभी बच्चे अब सुरक्षित हैं?
हाँ, सिविल सर्जन के अनुसार सभी बच्चों की स्थिति स्थिर है और वे उपचार के अधीन हैं।
प्रश्न 2: क्या स्कूल प्रशासन ने कोई कार्रवाई की है?
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।