पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने 10वें वार्षिक IC3 सम्मेलन में शिक्षा, तकनीक और समावेशी विकास पर जोर देते हुए युवाओं को जागरूक नागरिक बनने की सलाह दी।

  • युवाओं को 'सत्य को सत्ता के सामने' रखने और कठिन प्रश्न पूछने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
  • एआई (AI) के युग में जानकारी और वास्तविक ज्ञान के बीच अंतर समझना अनिवार्य है।
  • शिक्षा में बुनियादी ढांचे की कमी, विशेषकर लड़कियों के लिए शौचालयों का अभाव, एक बड़ी चुनौती है।
  • भारत को एक समावेशी शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है जो 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' का लाभ उठा सके।

मुंबई में आयोजित 10वें वार्षिक IC3 सम्मेलन के दौरान, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने शिक्षा और तकनीक के बदलते स्वरूप पर गहरा विमर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आज के तकनीकी युग में बच्चों को केवल सूचनाओं का संग्रहकर्ता नहीं, बल्कि धैर्यवान श्रोता और जागरूक पर्यवेक्षक बनना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि युवाओं को 'सत्ता के सामने सत्य' (truth to power) रखते हुए कठिन प्रश्न पूछने का साहस रखना चाहिए।

सम्मेलन का विषय 'गहराई से देखना — सूचना से अंतर्दृष्टि तक' (Looking Deeply — From Information to Insight) रखा गया था, जिसमें दुनिया के 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और शिक्षाविद शामिल हुए। चंद्रचूड़ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि जहाँ पहले सूचना खोजना कठिन था, वहीं अब यह पहचानना कठिन हो गया है कि वास्तव में कौन सी जानकारी 'ज्ञान' के योग्य है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि चंद्रचूड़ का यह बयान केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। जब युवा पीढ़ी सूचना और ज्ञान के बीच के अंतर को नहीं समझ पाएगी, तो समाज में गलत सूचनाओं का प्रसार बढ़ेगा, जो सीधे तौर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित कर सकता है।

युवाओं को साक्ष्य और दावे, महत्व और नवीनता के बीच अंतर करने के लिए मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने शिक्षा में असमानता और बुनियादी ढांचे की कमी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने एक चिंताजनक आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि 2025-26 में भी भारत के लगभग 1,05,000 स्कूलों में लड़कियों के लिए उचित शौचालय सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म के दौरान बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण कई लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं, जो कि एक गंभीर सामाजिक मुद्दा है।

उन्होंने समावेशी शिक्षा की वकालत करते हुए कहा कि भारत को एक ऐसी प्रणाली विकसित करनी चाहिए जो अलग तरह से सीखने वाले बच्चों को भी मुख्यधारा में लाए। उन्होंने 'मेरिट' (योग्यता) की परिभाषा को फिर से परिभाषित करने का आह्वान किया ताकि समाज का अंतिम छात्र भी विकास की दौड़ में शामिल हो सके।

पारंपरिक ज्ञान बनाम आधुनिक तकनीक

चंद्रचूड़ ने आधुनिक प्रगति के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ज्ञान का हस्तांतरण देश की 'राष्ट्रीय स्मृति' को जीवित रखता है। उन्होंने चेतावनी दी कि आधुनिक ज्ञान की दौड़ में हमें अपनी जड़ों और पूर्वजों द्वारा सीखे गए अनुभवों को नहीं भूलना चाहिए।

Did You Know?: भारत में शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक असमानता का एक बड़ा कारण स्कूलों में स्वच्छता सुविधाओं का अभाव है।

Frequently Asked Questions

1. IC3 सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य सूचना को वास्तविक अंतर्दृष्टि (insight) में बदलने और शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए वैश्विक विचारकों को एक मंच प्रदान करना है।

2. चंद्रचूड़ ने एआई (AI) के बारे में क्या चिंता जताई?
उन्होंने कहा कि एआई के युग में चुनौती जानकारी प्राप्त करना नहीं, बल्कि यह समझना है कि कौन सी जानकारी वास्तव में सार्थक ज्ञान है।