मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने KEO AI कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिसका लक्ष्य कर्नाटक के हर सरकारी स्कूल तक उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक पहुंचाना है।

  • KEO (Knowledge-driven, Economical and Open-source) एक कॉम्पैक्ट, AI-रेडी कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म है।
  • शुरुआती चरण में 1,000 AI PC सरकारी स्कूलों में तैनात किए जाएंगे।
  • यह डिवाइस बिना इंटरनेट के भी ऑन-डिवाइस AI क्षमताओं के साथ काम कर सकता है।
  • इसका लक्ष्य कर्नाटक के सभी 239 तालुकों और 31 जिलों तक पहुंचना है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए KEO (Knowledge-driven, Economical and Open-source) कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म का अनावरण किया। यह एक कॉम्पैक्ट और AI-सक्षम डिवाइस है जिसे उन्नत कंप्यूटिंग को लोकतांत्रिक बनाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शक्ति को घरों, कक्षाओं और समुदायों तक पहुँचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को कर्नाटक सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और जैव प्रौद्योगिकी विभाग, KEONICS और विभिन्न सेमीकंडक्टर भागीदारों के सहयोग से विकसित किया गया है। KEO की सबसे बड़ी विशेषता इसका ओपन-सोर्स RISC-V प्रोसेसर आर्किटेक्चर और ऑन-डिवाइस AI है, जो इसे पारंपरिक क्लाउड-आधारित सिस्टम से अलग बनाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह पहल भारत में 'डिजिटल डिवाइड' को पाटने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की अस्थिरता के कारण छात्र आधुनिक तकनीक से वंचित रह जाते हैं। KEO का ऑन-डिवाइस AI एक्सीलरेटर बिना निरंतर इंटरनेट कनेक्टिविटी के भी जटिल AI कार्यों को करने की अनुमति देता है, जिससे यह ग्रामीण भारत के लिए गेम-चेंजर बन जाता है।

"हम केवल एक उपकरण लॉन्च नहीं कर रहे हैं, हम एक सपना लॉन्च कर रहे हैं—कि कर्नाटक का हर बच्चा, चाहे वह गांव में हो या शहर में, AI के भविष्य को आकार दे सके।" - डीके शिवकुमार

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक पायलट प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि एक वादा है। सरकार का लक्ष्य शुरुआत में 1,000 AI PC तैनात करना है, लेकिन दीर्घकालिक विजन कर्नाटक के प्रत्येक सरकारी स्कूल तक इस तकनीक को ले जाना है। इससे न केवल छात्रों को कोडिंग और मशीन लर्निंग सीखने में मदद मिलेगी, बल्कि शिक्षकों को भी इंटरैक्टिव लर्निंग टूल्स मिलेंगे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पारंपरिक रूप से, उच्च-स्तरीय कंप्यूटिंग और AI संसाधनों पर बड़े शहरों और निजी संस्थानों का एकाधिकार रहा है। कर्नाटक सरकार के इस कदम का उद्देश्य तकनीकी प्रतिभा को केवल बेंगलुरु तक सीमित न रखकर पूरे राज्य में वितरित करना है। यह पहल भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'डिजिटल इंडिया' मिशन के अनुरूप है।

आईटी-बीटी मंत्री प्रियांक खड़गे ने इस अवसर पर कहा कि KEO कोई विलासिता की वस्तु नहीं, बल्कि समावेशी नवाचार का एक साधन है। यह किफायती मास कंप्यूटिंग के माध्यम से हर छोटे व्यवसाय और परिवार को डिजिटल अर्थव्यवस्था में भाग लेने में सक्षम बनाएगा।

Did You Know?: KEO डिवाइस में एक समर्पित ऑन-डिवाइस AI एक्सीलरेटर है, जिसका अर्थ है कि इसे क्लाउड-आधारित AI की तरह हमेशा हाई-स्पीड इंटरनेट की आवश्यकता नहीं होती है।

Frequently Asked Questions

1. KEO कंप्यूटर का मुख्य लाभ क्या है?
इसका मुख्य लाभ इसकी ऑन-डिवाइस AI क्षमता है, जो इंटरनेट के बिना भी छात्रों को कोडिंग और AI सीखने में मदद करती है।

2. यह किन क्षेत्रों में उपलब्ध होगा?
यह कर्नाटक के सभी 31 जिलों और 239 तालुकों के सरकारी स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा।