NCERT की राजनीति विज्ञान पाठ्यपुस्तक समिति के पुनर्गठन पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। टीम के प्रमुख संदीप शास्त्री ने आश्वासन दिया है कि किताबें तथ्यात्मक और बिना किसी राजनीतिक पूर्वाग्रह के तैयार की जाएंगी।

  • NCERT ने कक्षा 11 और 12 के लिए राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों हेतु 20 सदस्यीय टीम का गठन किया है।
  • समिति के कुछ सदस्यों के कथित राजनीतिक संबंधों के कारण विपक्ष ने विरोध जताया है।
  • टीम प्रमुख संदीप शास्त्री ने 'तथ्यात्मक और निष्पक्ष' सामग्री बनाने का संकल्प लिया है।
  • नई किताबों में प्राचीन भारतीय राजनीतिक विचार और 'भारतीय ज्ञान प्रणाली' को शामिल किया जाएगा।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा कक्षा 11 और 12 के लिए राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने वाली समिति के पुनर्गठन ने देश में एक नया राजनीतिक विवाद छेड़ दिया है। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने समिति के कुछ सदस्यों के कथित तौर पर RSS और भाजपा से जुड़े होने पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

इस विवाद के बीच, टेक्स्टबुक डेवलपमेंट टीम (TDT) के प्रमुख और निट्टे विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष संदीप शास्त्री ने स्पष्ट किया है कि उनका एकमात्र उद्देश्य निष्पक्षता बनाए रखना है। शास्त्री ने कहा, "हमें कक्षा 11 और 12 की राजनीति विज्ञान की किताबें विकसित करने का कार्य सौंपा गया है। मेरे लिए यह महत्वपूर्ण है कि मेरी टीम के सदस्य विषय विशेषज्ञ हों। मेरा लक्ष्य ऐसी पुस्तकें तैयार करना है जो पूरी तरह से तथ्यात्मक और निष्पक्ष हों।"

क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शिक्षा के क्षेत्र में वैचारिक झुकाव का मुद्दा हमेशा से संवेदनशील रहा है। जब पाठ्यपुस्तकों का निर्माण किया जाता है, तो वे आने वाली पीढ़ी के विश्वदृष्टिकोण को आकार देती हैं। समिति के सदस्यों में यदुनाथ देशपांडे, प्रशांत दिवेकर, वंदना मिश्रा और रवि रमेशचंद्र जैसे नामों का उल्लेख किया गया है, जिनके राजनीतिक संबंधों के कारण आलोचक इसे 'एजेंडा' का हिस्सा मान रहे हैं।

"हमारा उद्देश्य छात्रों को यह सिखाना नहीं है कि क्या सोचना है, बल्कि यह सिखाना है कि कैसे सोचना है।"

समिति के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि समूह में बैठते समय सभी सदस्य अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक विचारधाराओं को किनारे रख देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि चर्चा का आधार स्वस्थ बहस होनी चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दल की विचारधारा।

प्राचीन भारतीय ज्ञान का समावेश

नई पाठ्यपुस्तकों में एक बड़ा बदलाव 'भारतीय ज्ञान प्रणाली' (IKS) का एकीकरण होगा। श्री शास्त्री के अनुसार, नई किताबों में कौटिल्य के अर्थशास्त्र, मनु, चाणक्य और शुक्रनीतिसार जैसे प्राचीन ग्रंथों के माध्यम से प्राचीन भारतीय राजनीतिक विचारों को शामिल किया जाएगा। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप है।

NCERT ने एक समयसीमा भी निर्धारित की है: कक्षा 11 की किताबें 30 नवंबर, 2026 तक और कक्षा 12 की किताबें 30 जुलाई, 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य है।

क्या आप जानते हैं?: कौटिल्य का अर्थशास्त्र न केवल अर्थशास्त्र पर, बल्कि शासन व्यवस्था और कूटनीति पर भी दुनिया के सबसे पुराने और विस्तृत ग्रंथों में से एक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. विवाद का मुख्य कारण क्या है?
विवाद का कारण समिति के कुछ सदस्यों के कथित राजनीतिक संबंधों (RSS/BJP) को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवाल हैं।

2. नई किताबों में क्या नया होगा?
नई किताबों में रटने की पद्धति के बजाय केस स्टडी और प्राचीन भारतीय राजनीतिक दर्शन पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।