जादवपुर विश्वविद्यालय में बाहरी तत्वों द्वारा तोड़फोड़ और आगजनी के बाद उपাচার্য ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय ने तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।

  • विश्वविद्यालय परिसर में बाहरी तत्वों द्वारा आगजनी और संपत्ति के नुकसान की घटना।
  • उपकुलपति चिरंजीव भट्टाचार्य द्वारा पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज।
  • जांच के लिए तीन पूर्व अकादमिक दिग्गजों की समिति गठित।
  • छात्रों और राजनीतिक संगठनों के बीच तनावपूर्ण स्थिति।

पश्चिम बंगाल के प्रतिष्ठित जादवपुर विश्वविद्यालय में पिछले कुछ दिनों से भारी तनाव बना हुआ है। बुधवार रात से शुरू हुआ यह विवाद शुक्रवार तक जारी रहा, जिसमें परिसर में आगजनी, संपत्ति की तोड़फोड़ और छात्रों के साथ दुर्व्यवहार की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। विश्वविद्यालय के उपकुलपति चिरंजीव भट्टाचार्य ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

बाहरी तत्वों द्वारा तोड़फोड़ और आगजनी का आरोप

उपकुलपति की शिकायत के अनुसार, 20 अगस्त 2026 की रात को अज्ञात बाहरी व्यक्तियों के एक समूह ने अवैध रूप से विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश किया। इन हमलावरों ने कला और विज्ञान भवन के पास स्थित अरबिंदो भवन के बरामदे में झंडे, पोस्टर और अन्य सामग्रियों में आग लगा दी। इतना ही नहीं, हमलावरों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर लगे सीसीटीवी कैमरों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया और छात्रों के हॉस्टल में जबरन घुसने का प्रयास किया।

जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सेलिमबॉक्स मंडल ने पुष्टि की है कि घटना की निष्पक्ष जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है। इस समिति में विश्वविद्यालय के वर्तमान प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। समिति के सदस्यों में शामिल हैं:
1. शुभशঙ্কর सरकार (पूर्व उपकुलपति, नेताजी सुभाष मुक्त विश्वविद्यालय)
2. अरुणाशिस गोस्वामी (उपकुलपति, बाबासाहेब अंबेडकर विश्वविद्यालय)
3. सौमेंदु चटर्जी (IQAC निदेशक, प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय)

प्रतीक की बहाली और राजनीतिक प्रतिक्रिया

हिंसा के दौरान विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक प्रतीक (Emblem) को भी नुकसान पहुँचाया गया था। शुक्रवार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्षतिग्रस्त प्रतीक को ठीक कर पुनः स्थापित किया। इस बीच, राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि इस तरह के संघर्ष दुर्भाग्यपूर्ण हैं और उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप न करने की अपील की। वहीं, स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के प्रतीक को जानबूझकर नुकसान पहुँचाया गया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the unrest at Jadavpur University is not just a local campus issue but a reflection of the deep-seated political polarization within West Bengal's educational landscape. The targeting of institutional symbols and the involvement of external political groups threaten the academic sanctity of one of India's premier research institutions.

जादवपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में राजनीतिक उकसावे के कारण होने वाली हिंसा राज्य की शैक्षणिक छवि को वैश्विक स्तर पर धूमिल कर सकती है।
Did You Know?: जादवपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और दुनिया के कई शीर्ष शोध संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: जांच समिति में कौन शामिल है?
उत्तर: समिति में शुभशঙ্কর सरकार, अरुणाशिस गोस्वामी और सौमेंदु चटर्जी शामिल हैं।

प्रश्न 2: विश्वविद्यालय प्रशासन का मुख्य आरोप क्या है?
उत्तर: प्रशासन का आरोप है कि बाहरी तत्वों ने परिसर में आगजनी की, सीसीटीवी तोड़े और विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया।