भारत के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों (IITs) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रति बढ़ता रुझान शिक्षा के परिदृश्य को बदल रहा है। वर्तमान में 51 से अधिक AI-केंद्रित पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जो छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहे हैं।

  • IIT संस्थानों में अब 51 से अधिक समर्पित AI और डेटा साइंस पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
  • IIT मद्रास और IIT दिल्ली जैसे संस्थान मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
  • JEE एडवांस्ड के टॉपर्स के बीच कंप्यूटर साइंस और AI की मांग में भारी उछाल आया है।
  • AI अब केवल कंप्यूटर साइंस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मैकेनिकल और सिविल जैसे कोर विषयों में भी शामिल हो रहा है।

पिछले एक दशक में, भारत के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) ने शिक्षा के पारंपरिक ढांचे को पूरी तरह से बदल दिया है। जो सवाल कभी केवल चर्चा का विषय हुआ करते थे, वे अब IIT के क्लासरूम की वास्तविकता बन चुके हैं। आज, AI केवल एक वैकल्पिक विषय नहीं, बल्कि भविष्य के इंजीनियरों के लिए एक अनिवार्य कौशल बन गया है।

हालिया समीक्षा के अनुसार, 23 IITों में लगभग 50 से अधिक डिग्री-स्तर के कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन इंटेलिजेंस या डेटा साइंस शामिल हैं। उदाहरण के लिए, IIT रोपड़ में B.Tech आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा इंजीनियरिंग जैसे समर्पित पाठ्यक्रम हैं, जबकि IIT मंडी डेटा साइंस और AI में विशेषज्ञता प्रदान कर रहा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक श्रम बाजार की मांग के साथ तालमेल बिठाने की एक रणनीतिक कोशिश है। जैसे-जैसे जेनरेटिव AI हर क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है, IITs ऐसे पेशेवरों को तैयार कर रहे हैं जो न केवल कोड कर सकें, बल्कि जटिल समस्याओं का समाधान भी निकाल सकें।

AI इंजीनियरिंग का विकल्प नहीं है, बल्कि यह एक सशक्त माध्यम है जो पारंपरिक इंजीनियरिंग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

IIT दिल्ली का 'स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' डीप लर्निंग, कंप्यूटर विजन और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसे उन्नत क्षेत्रों में अनुसंधान कर रहा है। वहीं, IIT मद्रास ने शिक्षा के दायरे को क्लासरूम से बाहर निकालकर 'SWAYAM Plus' प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्कूल शिक्षकों और कामकाजी पेशेवरों तक पहुँचा दिया है।

हालांकि, इस बढ़ती मांग ने एक नई चुनौती भी पेश की है। IIT मद्रास के निदेशक के अनुसार, 99.9% JEE (Advanced) टॉपर अब कंप्यूटर साइंस और AI को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे सिविल और मैकेनिकल जैसे पारंपरिक इंजीनियरिंग विषयों में छात्रों की संख्या कम हो रही है।

Did You Know?: IIT मद्रास ने क्रिकेट एनालिटिक्स और अकाउंटिंग में AI के उपयोग जैसे अनूठे पाठ्यक्रम भी शुरू किए हैं।

Frequently Asked Questions

1. क्या IIT में AI पढ़ने के लिए अलग से प्रवेश परीक्षा होती है?
आमतौर पर, छात्र JEE Advanced के माध्यम से प्रवेश पाते हैं और फिर अपनी रुचि के अनुसार AI या कंप्यूटर साइंस जैसे विषयों का चयन करते हैं।

2. क्या AI केवल कंप्यूटर साइंस के छात्रों के लिए है?
नहीं, अब IITs मैकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के साथ AI को एकीकृत कर रहे हैं ताकि बहु-विषयक विशेषज्ञता विकसित की जा सके।