मुंबई विश्वविद्यालय ने इंजीनियरिंग छात्रों के लिए एक क्रांतिकारी 'अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड बी.ई. डिग्री प्रोग्राम' (AEDP) लॉन्च किया है। यह प्रोग्राम छात्रों को कक्षा के ज्ञान के साथ-साथ वास्तविक औद्योगिक अनुभव प्रदान करेगा।
- यह प्रोग्राम केवल बी.ई. के अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए उपलब्ध है।
- छात्रों के पास न्यूनतम 6.75 CGPA होना अनिवार्य है।
- चयन प्रक्रिया पूरी तरह से मेरिट आधारित होगी।
- प्रोग्राम के तहत 1,260 घंटों का व्यावहारिक प्रशिक्षण अनिवार्य है।
मुंबई विश्वविद्यालय ने शनिवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 'अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड बी.ई. डिग्री प्रोग्राम' (AEDP) की घोषणा की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य इंजीनियरिंग छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें उद्योग की वास्तविक चुनौतियों और व्यावहारिक कौशल से रूबरू कराना है।
यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के विज्ञान और प्रौद्योगिकी संकाय (Faculty of Science and Technology) द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है, जो भारतीय शिक्षा प्रणाली में कौशल विकास पर जोर देते हैं।
चयन प्रक्रिया और पात्रता
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस अभिनव कार्यक्रम के लिए केवल 15% अंतिम वर्ष के बी.ई. छात्र ही पात्र होंगे। पात्रता के लिए छात्रों के पास पांचवें सेमेस्टर में न्यूनतम 6.75 CGPA होना आवश्यक है। चयन पूरी तरह से मेरिट के आधार पर किया जाएगा, जिसमें उच्च CGPA वाले छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि, जो छात्र ऑनर्स, माइनर या रिसर्च के साथ ऑनर्स डिग्री कर रहे हैं, वे इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकेंगे।
यह कदम इंजीनियरिंग शिक्षा और उद्योग की जरूरतों के बीच की खाई को पाटने में मील का पत्थर साबित होगा।
प्रशिक्षण का स्वरूप और लाभ
चयनित छात्रों को अपने सातवें और आठवें सेमेस्टर के दौरान एक साल की अप्रेंटिसशिप पूरी करनी होगी। इस अवधि के दौरान, उन्हें कम से कम 1,260 घंटों का व्यावहारिक प्रशिक्षण लेना होगा, जिसके बदले उन्हें कुल 42 क्रेडिट दिए जाएंगे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह पहल भारत में 'स्किल इंडिया' मिशन को मजबूती प्रदान करती है। पारंपरिक इंजीनियरिंग डिग्री अक्सर छात्रों को उद्योग के लिए तैयार नहीं कर पाती, लेकिन AEDP जैसे मॉडल सीधे रोजगार क्षमता (Employability) को बढ़ाते हैं। इससे छात्रों को न केवल तकनीकी ज्ञान मिलता है, बल्कि संचार, टीम वर्क और समस्या समाधान जैसे महत्वपूर्ण पेशेवर कौशल भी विकसित होते हैं।
Frequently Asked Questions
1. क्या इस कोर्स के लिए कोई विशेष CGPA आवश्यकता है?
हाँ, छात्रों के पास पांचवें सेमेस्टर में कम से कम 6.75 CGPA होना अनिवार्य है।
2. क्या ऑनर्स के छात्र इसमें भाग ले सकते हैं?
नहीं, ऑनर्स, माइनर या रिसर्च वाले छात्र इस कार्यक्रम के लिए पात्र नहीं हैं।