IIT बॉम्बे ने पीएचडी कार्यक्रमों के लिए अधिकतम 8 वर्ष की समय सीमा निर्धारित की है ताकि शोध कार्यों में होने वाली अत्यधिक देरी को रोका जा सके। इस कदम के बाद संस्थान ने एक वर्ष में रिकॉर्ड 620 पीएचडी डिग्री प्रदान की हैं।

  • नए पीएचडी पंजीकरणों के लिए अधिकतम समय सीमा 8 वर्ष निर्धारित।
  • एक वर्ष में 620 पीएचडी डिग्री देने वाला पहला IIT बना।
  • देरी के मुख्य कारणों में सुपरवाइजर की व्यस्तता और कोविड-19 महामारी शामिल।
  • 64वें दीक्षांत समारोह में कुल 3,763 डिग्रियां प्रदान की गईं।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे ने अपने शैक्षणिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए सभी नए पीएचडी पंजीकरणों के लिए अधिकतम 8 साल की समय सीमा लागू कर दी है। यह निर्णय एक व्यापक आंतरिक समीक्षा के बाद लिया गया, जिसमें यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कुछ शोध छात्र एक दशक से अधिक समय से अपनी डॉक्टरेट पूरी नहीं कर पाए थे।

संस्थान के निदेशक शिरीष केदारे ने स्पष्ट किया कि इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य उन बाधाओं को पहचानना था जो छात्रों को समय पर शोध पूरा करने से रोक रही थीं। इस पहल के परिणामस्वरूप संस्थान ने अपने लंबित कार्यों (backlog) को तेजी से निपटाया, जिससे शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए रिकॉर्ड 620 पीएचडी डिग्रियां प्रदान की गईं। यह किसी भी IIT द्वारा एक वर्ष में प्रदान की गई पीएचडी डिग्रियों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।

देरी के प्रमुख कारण

निदेशक केदारे के अनुसार, पीएचडी पूरा करने में लगने वाले लंबे समय के पीछे कई कारण थे। इनमें सुपरवाइजरों का अन्य परियोजनाओं में अत्यधिक व्यस्त होना, उम्मीदवारों का बीच में अन्य व्यवसायों की ओर रुख करना और बाहरी उम्मीदवारों का संस्थान से दूरी बनाना शामिल था। इसके अतिरिक्त, कोविड-19 महामारी ने शोध कार्यों की गति को काफी धीमा कर दिया था, जिससे कई छात्र समय सीमा से काफी पीछे छूट गए थे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में 'शोध दक्षता' (Research Efficiency) लाने की दिशा में एक बड़ा संकेत है। जब शोध कार्य अनिश्चित काल तक खिंचते हैं, तो न केवल छात्र का करियर प्रभावित होता है, बल्कि संस्थान के संसाधन और शोध की प्रासंगिकता भी कम हो जाती है। समय सीमा तय करने से छात्रों में अनुशासन आएगा और शोध की गुणवत्ता में सुधार होगा।

"समयबद्ध पीएचडी कार्यक्रम न केवल छात्रों के करियर को गति देते हैं, बल्कि वैश्विक रैंकिंग में संस्थान की शोध उत्पादकता को भी बढ़ाते हैं।"

इस वर्ष के 64वें दीक्षांत समारोह के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 3,442 छात्रों को 3,763 डिग्रियां दी गईं। इसमें 1,713 स्नातक और 1,430 स्नातकोत्तर डिग्रियां शामिल हैं। पीएचडी स्तर पर, केमिकल इंजीनियरिंग (77), इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (62) और मैकेनिकल इंजीनियरिंग (49) विभागों का दबदबा रहा।

एक और महत्वपूर्ण विकास यह है कि IIT बॉम्बे ने बीटेक कार्यक्रम में नामांकित छात्रों के लिए तीन साल की बीएससी (BS) डिग्री का विकल्प दिया है। यह 'अर्ली-एग्जिट' विकल्प उन छात्रों के लिए वरदान साबित हो सकता है जो अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं या किसी कारणवश चार साल का कोर्स पूरा करने में असमर्थ हैं।

क्या आप जानते हैं?: IIT बॉम्बे अब तक का पहला ऐसा IIT है जिसने एक ही शैक्षणिक वर्ष में 600 से अधिक पीएचडी डिग्रियां प्रदान करने का कीर्तिमान स्थापित किया है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या यह 8 साल की सीमा पुराने छात्रों पर भी लागू होगी?
नहीं, यह सीमा मुख्य रूप से नए पंजीकरणों के लिए लागू की गई है, हालांकि पुराने छात्रों के बैकलॉग को क्लियर करने के लिए विशेष समीक्षा की गई थी।

p>प्रश्न 2: बीटेक छात्रों के लिए बीएससी (BS) डिग्री का विकल्प क्या है?
यह एक अर्ली-एग्जिट विकल्प है, जिसके तहत छात्र आवश्यक क्रेडिट पूरा करके 3 साल बाद स्नातक डिग्री लेकर कोर्स छोड़ सकते हैं।