NEET-UG पेपर लीक मामले के बाद महाराष्ट्र सरकार ने कोचिंग सेंटरों को नियंत्रित करने के लिए एक कड़ा विधेयक पेश किया है। इस नए कानून के तहत 'डमी स्कूल' मॉडल और बेसमेंट में कोचिंग चलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।

  • कोचिंग और स्कूलों के बीच 'इंटीग्रेटेड' या 'डमी स्कूल' मॉडल पर पूर्ण प्रतिबंध।
  • 25 से अधिक छात्रों वाले सभी कोचिंग केंद्रों के लिए पंजीकरण अनिवार्य।
  • बेसमेंट में कोचिंग क्लास चलाने पर रोक और भारी जुर्माने का प्रावधान।
  • छात्रों के कल्याण के लिए साप्ताहिक अवकाश और शिक्षण के घंटों पर सीमा।

महाराष्ट्र सरकार ने NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद कोचिंग उद्योग को व्यवस्थित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने 'महाराष्ट्र प्राइवेट कोचिंग सेंटर्स (पंजीकरण और विनियमन) विधेयक, 2026' का मसौदा जारी किया है, जो देश के सबसे सख्त कोचिंग कानूनों में से एक होने जा रहा है।

इस मसौदे का मुख्य उद्देश्य कोचिंग संस्कृति के उन नकारात्मक पहलुओं को खत्म करना है जो छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक अखंडता को नुकसान पहुंचाते हैं। इसमें विशेष रूप से 'इंटीग्रेटेड कोचिंग' या जिसे आमतौर पर 'डमी स्कूल' मॉडल कहा जाता है, उस पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। यदि कोई स्कूल इस तरह के अवैध गठजोड़ में शामिल पाया जाता है, तो उसे मान्यता रद्द करने की सिफारिश की जा सकती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कानून केवल नियम नहीं, बल्कि कोचिंग माफिया के खिलाफ एक निर्णायक प्रहार है। महाराष्ट्र, जो लातूर और पुणे जैसे बड़े कोचिंग हब का घर है, इस कानून के माध्यम से पूरे देश के लिए एक मानक स्थापित कर रहा है। यह कदम उन छात्रों के हितों की रक्षा करेगा जो अत्यधिक शैक्षणिक दबाव और अनैतिक शिक्षण पद्धतियों के शिकार होते हैं।

कोचिंग संस्थानों पर लगा यह कड़ा नियंत्रण शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।

इस कानून की व्यापकता को समझने के लिए अन्य राज्यों के साथ इसकी तुलना आवश्यक है। जहाँ राजस्थान और असम जैसे राज्यों में केवल 50 या 100 से अधिक छात्रों वाले केंद्रों पर नियम लागू होते हैं, वहीं महाराष्ट्र ने इसकी सीमा मात्र 25 छात्र रखी है। इसका मतलब है कि छोटे ट्यूशन सेंटर भी अब सरकारी निगरानी में होंगे।

तुलनात्मक विश्लेषण: राज्यों के कोचिंग कानून

विशेषतामहाराष्ट्र (मसौदा)राजस्थानअसम
छात्रों की न्यूनतम संख्या25+100+50+
बेसमेंट में कोचिंगप्रतिबंधितस्पष्ट उल्लेख नहींस्पष्ट उल्लेख नहीं
अधिकतम जुर्माना₹50 लाख तककम₹1 लाख (समान)

छात्रों के कल्याण के लिए भी कड़े प्रावधान किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार, कोचिंग संस्थानों को छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए साप्ताहिक अवकाश देना होगा। साथ ही, शिक्षण के समय को प्रतिदिन अधिकतम पांच घंटे तक सीमित करने का प्रस्ताव है। फीस के मामले में भी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी; केंद्रों को अपनी वेबसाइट पर फीस और रिफंड पॉलिसी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी।

दोषी पाए जाने वाले संस्थानों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा। मामूली उल्लंघन के लिए 1 लाख से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना और गंभीर उल्लंघन जैसे कि बिना पंजीकरण के संचालन या गलत विज्ञापन के लिए 10 लाख से 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

Did You Know?: महाराष्ट्र के इस नए कानून में कोचिंग संस्थानों को कम से कम एक महीने का CCTV फुटेज सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।

Frequently Asked Questions

1. क्या यह कानून केवल बड़े कोचिंग सेंटरों पर लागू होगा?
नहीं, यह कानून उन सभी केंद्रों पर लागू होगा जिनमें 25 से अधिक छात्र हैं, जो इसे अन्य राज्यों की तुलना में अधिक व्यापक बनाता है।

2. 'डमी स्कूल' मॉडल क्या है?
यह एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ छात्र एक स्कूल में नामांकित तो होते हैं, लेकिन अपना अधिकांश समय कोचिंग संस्थान में बिताते हैं। महाराष्ट्र सरकार इसे प्रतिबंधित करना चाहती है।