बिहार सार्वजनिक सेवा आयोग (बीपीएससी) ने नकारात्मक अंकन हटाने और दो‑स्तरीय परीक्षा के माँगों को खारिज कर दिया, जबकि परीक्षा कंट्रोलर ने ‘हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार’ कह कर राजनीतिक उथल‑पुथल मचा दी। विरोधी छात्र और राजनैतिक नेता इस टिप्पणी को अपमानजनक मानते हुए तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

  • बीपीएससी ने नकारात्मक अंकन और दो‑स्तरीय परीक्षा को कायम रखने का फैसला किया।
  • परीक्षा कंट्रोलर की प्राचीन कहावत पर विरोधी छात्रों ने सामाजिक मीडिया में गुस्सा जताया।
  • राज्य के कई छात्र समूह अभी भी विभिन्न मांगों के साथ धरना जारी रखे हुए हैं।

प्रसंग और घटना का विवरण

पटना के गार्डनबाग में 18 अगस्त से चल रहे शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE‑4) के खिलाफ छात्र एवं प्रोफेसर उम्मीदवारों ने कई हफ्तों तक विरोध किया। उनका मुख्य दावा नकारात्मक अंकन को हटाना, परीक्षा को एक‑स्तरीय बनाना और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना था। इस बीच, बीपीएससी के परीक्षा कंट्रोलर राजेश कुमार सिंह ने सवालों के जवाब में हिंदी कहावत “हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार” का हवाला दिया, जिससे विवाद की तीव्रता बढ़ गई।

कंट्रोलर की टिप्पणी का प्रभाव

कहावत का मूल अर्थ लक्ष्य पर केंद्रित रहना है, पर विरोधी पक्ष ने इसे “प्रदर्शित करने के लिए कुत्तों की तुलना” के रूप में ले लिया। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने इसे “शर्मनाक” कहा और अधिकारियों को इस तरह की भाषा का प्रयोग न करने की चेतावनी दी। सिंह ने बाद में कहा कि उनका कथन सोशल मीडिया पर गलत समझा गया और उन्होंने “कोई भी समूह या व्यक्ति आहत नहीं करना चाहता था” कहा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बिहार में सार्वजनिक सेवा परीक्षाओं का इतिहास जटिल है। पिछले दशकों में कई बार परीक्षा पैटर्न में बदलाव, नकारात्मक अंकन के विवाद और विभिन्न सामाजिक वर्गों से विरोध देखे गए हैं। 2020 में UPSC‑समान दो‑स्तरीय मॉडल को अपनाने के बाद कई राज्यों ने समान प्रणाली अपनाई, जिससे बीपीएससी का दावा “बिहार में अनोखा नहीं” कहना वैध बना।

बीपीएससी की प्रतिक्रिया

बीपीएससी ने स्पष्ट किया कि सभी वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं में नकारात्मक अंकन रहेगा, क्योंकि यह अंधाधुंध अनुमान को रोकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि दो‑स्तरीय प्रणाली पहले से तय थी और यह यूपीपीएससी, यूपीपीएससी, गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे अन्य राज्य आयोगों में भी लागू है। उन्होंने हिंदी‑माध्यमी उम्मीदवारों के प्रति कोई भेदभाव नहीं किया गया, यह भी रेखांकित किया।

प्रमुख छात्र समूहों की स्थिति

‘ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च एसोसिएशन’ ने 21‑दिन के भूख हड़ताल को गवर्नर लेफ्ट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद आताहसनैन के साथ समझौता करके समाप्त कर दिया। गवर्नर ने 2026 के असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती नियमों में संशोधन, आयु सीमा, API/PhD/NET‑JRF वेटेज और सेवा शर्तों पर एक समिति बनाने का आश्वासन दिया। अन्य समूह अभी भी अपने-अपने मुद्दों पर धक्का दे रहे हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the controversy highlights a deeper mistrust between Bihar’s aspirants and its recruitment machinery, potentially influencing future policy reforms and electoral narratives in the state.

“परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और संवाद ही स्थायी समाधान हैं,” कहते हैं शिक्षा नीति विशेषज्ञ डॉ. रवींद्र कुमार।
Did You Know?: बीपीएससी का पहला दो‑स्तरीय परीक्षा मॉडल 2015 में पेश किया गया था, जो तब से कई बार संशोधित हुआ है।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या नकारात्मक अंकन हटाने की कोई संभावना है?
A: वर्तमान में बीपीएससी ने इसे बनाए रखने की पुष्टि की है, क्योंकि यह अनुमान को रोकता है।

Q2: TRE‑4 के लिए आवेदन कब खुलेगा?
A: आवेदन 1 सितंबर से 30 सितंबर तक खुलेगा, और परीक्षा दिसम्बर या जनवरी में आयोजित होने की संभावना है।