केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को तकनीकी गड़बड़ियों और परीक्षा मूल्यांकन में त्रुटियों के कारण तीव्र सार्वजनिक जांच का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा मंत्री प्रलाद जोशी ने बोर्ड को सुदृढ़ करने के लिए मुख्य प्राथमिकताओं पर चर्चा करने हेतु वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।
- प्रलाद जोशी ने सीबीएसई सुधार हेतु वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रणनीतिक बैठक की।
- ऑन‑स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में स्कैन त्रुटियों और डेटा लीक से गंभीर आलोचना हुई।
- नए कार्य‑योजना में पारदर्शिता, तकनीकी उन्नयन और छात्रों व शिक्षकों के लिए बेहतर समर्थन शामिल है।
बैठक का विवरण
भारत के संघ शिक्षा मंत्री प्रलाद जोशी ने 24 अगस्त, 2026 को नई दिल्ली में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन बैठक बुलाई। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य सीबीएसई की मौजूदा समस्याओं की जड़ तक पहुँच कर सुधारात्मक कदम तय करना था। मंत्री ने अपने ट्वीट में बताया कि "हम सीबीएसई के शैक्षणिक, परीक्षा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक कुशल, पारदर्शी और छात्र‑शिक्षक‑हितैषी बनाने के लिए प्रमुख प्राथमिकताओं की समीक्षा कर रहे हैं।"
ऑन‑स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली की विफलताएँ
2026 के क्लास 12 बोर्ड परीक्षा में लागू नई OSM प्रणाली ने छात्रों में भारी अविश्वास पैदा कर दिया। पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने वाले कई विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें प्राप्त स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएँ अन्य छात्रों की थीं, कई पृष्ठ धुंधले या अनुपलब्ध थे, और गणना में त्रुटियाँ पाई गईं। इस तकनीकी गड़बड़ी ने परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
विक्रेता चयन पर सवाल
OSM प्रणाली के पीछे का कॉन्ट्रैक्टेड कंपनी Coempt EduTeck को भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। यह वही कंपनी थी जिसने 2019 में तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा में बड़े पैमाने पर तकनीकी फेल्योर किया था। विशेषज्ञों ने कहा कि चयन प्रक्रिया में पर्याप्त दक्षता मूल्यांकन नहीं किया गया।
साइबर सुरक्षा और डेटा लीक की चिंता
आईआईटी चेन्नई और आईआईटी कानपुर की टीमों ने सीबीएसई की डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में डेटा सुरक्षा की गंभीर खामियों की पहचान की। उन्होंने बताया कि छात्रों के व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रखने के लिए दीर्घकालिक आर्काइविंग सिस्टम की कमी है, जिससे संवेदनशील जानकारी लीक होने का जोखिम बढ़ गया है।
प्रस्तावित सुधारात्मक उपाय
बैठक में कई त्वरित कदम तय किए गए: OSM प्लेटफ़ॉर्म का त्वरित बग‑फिक्स, वैकल्पिक मूल्यांकन मॉड्यूल का परीक्षण, डेटा एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल को सख्त करना, और एक स्वतंत्र ऑडिट बॉडी का गठन। साथ ही, बोर्ड ने छात्रों और शिक्षकों को तकनीकी सहायता के लिए एक 24‑घंटे हेल्पडेस्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सीबीएसई को पिछले दो दशकों में कई बार परीक्षा धोखाधड़ी, प्रश्नपत्र लीक और मूल्यांकन में असमानता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। 2020 में ऑनलाइन परीक्षा के अचानक संक्रमण ने तकनीकी अवसंरचना की कमी को उजागर किया, जिससे इस बार की OSM विफलता को एक निरंतर समस्या के रूप में देखा जा रहा है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that सुधारात्मक कदम न केवल छात्रों के भरोसे को पुनर्स्थापित करेंगे, बल्कि भारत की शैक्षिक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी वैश्विक मंच पर मजबूत करेंगे। यदि सीबीएसई समय पर इन पहलों को लागू नहीं करता, तो अन्य राज्य बोर्डों को समान तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर असर पड़ेगा।
"सीबीएसई की डिजिटल ट्रांसफ़ॉर्मेशन को एक व्यापक साइबर‑सुरक्षा फ्रेमवर्क के साथ जोड़ना अनिवार्य है," कहते हैं डॉ. अनीता सिंह, आईआईटी चेन्नई की सूचना सुरक्षा विशेषज्ञ।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: OSM प्रणाली की नई अपडेट कब लागू होगी?
उत्तर: आधिकारिक रूप से अगले महीने के अंत तक सभी स्कूलों में नई प्रणाली लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रश्न 2: क्या छात्रों को पिछले त्रुटियों के लिए पुनर्मूल्यांकन का अधिकार मिलेगा?
उत्तर: हाँ, शिक्षा ministry ने सभी प्रभावित छात्रों के लिए स्वतंत्र पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव रखा है।