केरल के कई सरकारी प्री‑यूनिवर्सिटी कॉलेजों में विज्ञान और भाषा की पाठ्यपुस्तकों का वितरण अभी भी नहीं हुआ है। एमएलसी के. विवेकानंद ने इस समस्या को विधायी परिषद में उठाया, जबकि शिक्षा मंत्री ने आपातकालीन कदमों की घोषणा की।

  • मायसूर, मंड्या, हसन और चमरजंघर के 131 सरकारी पीयू कॉलेजों में पुस्तकों की कमी।
  • विज्ञान के लिए 13,72,096 प्रतियां वितरित, जबकि 27,22,363 की जरूरत थी।
  • शिक्षा मंत्री ने आपातकालीन आपूर्ति की प्रक्रिया शुरू करने का वादा किया।

कर्नाटक के विधायी परिषद (एमएलसी) के सदस्य के. विवेकानंद ने कहा कि राज्य के सरकारी प्री‑यूनिवर्सिटी (पीयू) कॉलेजों में विज्ञान और भाषा की पाठ्यपुस्तकों का वितरण अभी भी लंबित है, जबकि शैक्षणिक वर्ष आधा बीत चुका है। यह समस्या मायसूर, मंड्या, हसन और चमरजंघर जिलों के 131 कॉलेजों को प्रभावित कर रही है।

विवेकानंद के अनुसार, विज्ञान की 27,22,363 प्रतियों की आवश्यकता के मुकाबले केवल 13,72,096 प्रतियां ही वितरित हुई हैं। कई कॉलेजों में भाषा की पाठ्यपुस्तकें भी नहीं पहुंची हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई में बाधा उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि जब इस मुद्दे को संबंधित अधिकारियों के ध्यान में लाया गया, तो स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

विषय को विधायी परिषद में लाने के बाद, शिक्षा मंत्री मधु बंगलप्पा ने बताया कि पुस्तक न वितरण की समस्या को सरकार ने नोट किया है और तुरंत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में कॉलेजों की शुरुआत से पहले सभी पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएँगी।

कर्नाटक में पीयू स्तर की शिक्षा राज्य के माध्यमिक शिक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण चरण है, जहाँ छात्रों को विज्ञान, वाणिज्य और कला में शुरुआती विशेषीकरण मिलता है। पाठ्यपुस्तकों की समय पर उपलब्धता न केवल छात्रों की शैक्षणिक प्रगति बल्कि राज्य की कुल साक्षरता और रोजगार दर पर भी असर डालती है।

इतिहास में देखा गया है कि कर्नाटक में पुस्तक वितरण में देरी कई बार रही है, विशेषकर मौसमीय आपदाओं और लॉजिस्टिक बाधाओं के कारण। 2020‑21 में भी समान समस्या ने छात्रों को परीक्षा में अभावग्रस्त किया था, जिससे कई बार स्टेट बोर्ड ने अस्थायी समाधान प्रदान किए थे।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that delayed textbook supply not only hampers immediate learning outcomes but also widens the educational divide between urban and rural students, potentially affecting Karnataka’s long‑term human capital development.

"शिक्षा के बुनियादी संसाधन जैसे पाठ्यपुस्तकों की समय पर आपूर्ति, राज्य की प्रतिस्पर्धात्मकता का मूलभूत स्तंभ है," प्रो. अनीता सिंह, शैक्षिक नीति विशेषज्ञ ने कहा।
Did You Know?: कर्नाटक में 2019 में लगभग 1.2 करोड़ छात्रों ने पीयू स्तर पर प्रवेश लिया था, जो देश में दूसरे स्थान पर है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या सभी सरकारी पीयू कॉलेजों में पुस्तकें अब मिलेंगी?

उत्तर: शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि अगले दो हफ्तों में शेष पुस्तकें वितरित कर दी जाएँगी, लेकिन वितरण की गति स्थानीय प्रशासन पर निर्भर करेगी।

प्रश्न 2: यदि पुस्तकें नहीं मिलीं तो छात्रों को क्या मदद मिलेगी?

उत्तर: कुछ कॉलेजों ने अस्थायी रूप से डिजिटल सामग्री और अतिरिक्त कक्षा नोट्स प्रदान करने का प्रावधान किया है, लेकिन यह समाधान केवल अल्पकालिक है।