31 वर्षीय MSc फ़िज़िक्स छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध किया। वे विभाग प्रमुख, डीन के इस्तीफ़े, 1 करोड़ रुपये मुआवजे और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।

  • ऋषिकेश कुमार की दुखद मौत
  • छात्रों ने 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की
  • स्वतंत्र जांच और वरिष्ठ अधिकारियों का इस्तीफ़ा माँगा गया

घटना का विवरण

आईआईटी दिल्ली कैंपस के लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से गिरते हुए 31 वर्षीय MSc फ़िज़िक्स छात्र ऋषिकेश कुमार का 22 अगस्त सुबह 8:33 बजे दिल्ली पुलिस को सूचित किया गया। वह कैंपस में प्रवेश कर लिफ्ट लेकर उस मंजिल तक पहुँचा, जहाँ वह गिर गया और संस्थागत अस्पताल में पहुंचते ही मृत घोषित किया गया। पुलिस ने कोई आत्महत्या नोट नहीं पाया।

छात्रों की मांगें

छात्रों ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि आवास, शैक्षणिक प्रोजेक्ट और संस्थागत संसाधनों तक पहुँच न मिलने के कारण कुमार को अलग‑थलग महसूस हुआ। उन्होंने फ़िज़िक्स विभाग के प्रमुख, डीन और एसोसिएट डीन (स्टूडेंट वेलफ़ेयर) के इस्तीफ़े, 1 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि और एक स्वतंत्र जांच की माँग की।

बयान में छात्र सलाहकार सेवाओं, छात्र कल्याण विभाग और कैंपस अस्पताल की भूमिका की भी जांच की इच्छा जताई गई। उन्होंने यह भी कहा कि सोमवार, 24 अगस्त को लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में सभी कक्षाओं को रद्द किया जाए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

आईआईटी दिल्ली में पिछले 30 महीनों में 8 छात्र आत्महत्या के कारण मारे गए हैं, जैसा कि छात्रों ने बताया। यह आँकड़ा संस्थान और पुलिस की आधिकारिक फाइलों के साथ तुलना करने की जरूरत है। पिछले मामलों में छात्र कल्याण सेवाओं की कमी और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन की अपर्याप्तता प्रमुख कारण रहे हैं।

अन्य छात्रों का समर्थन

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने भी स्वतंत्र जांच और पारदर्शिता की माँग के साथ विरोध में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल व्यक्तिगत मानसिक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि संस्थागत लापरवाहियों का परिणाम है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the IIT Delhi episode underscores a systemic gap in Indian premier institutes’ mental‑health infrastructure, potentially affecting student enrollment, international reputation, and future policy reforms.

"यदि संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य समर्थन को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो ऐसी त्रासदियाँ दोहराई जा सकती हैं," कहा मनोविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अंजु शर्मा।
Did You Know?: आईआईटी दिल्ली ने 2019 में मानसिक स्वास्थ्य कार्यशालाओं की संख्या दोगुनी कर दी थी, फिर भी छात्रों की शिकायतें बढ़ी हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या अब तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट जारी हुई है?

उत्तर: नहीं, छात्रों ने अभी तक स्वतंत्र जांच की मांग की है और प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई का अनुरोध किया है।

प्रश्न 2: क्या छात्रों के विरोध पर कोई प्रतिबंध लगाया गया?

उत्तर: प्रशासन ने अभी तक किसी भी छात्र पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है, लेकिन स्थिति को लेकर सतर्कता बनी हुई है।