दिल्ली विश्वविद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रमों में 13,300 से अधिक सीटें खाली रहने के बाद, प्रशासन ने कुछ कॉलेजों को 12वीं के अंकों के आधार पर प्रवेश देने की अनुमति दी है। यह कदम CUET के बाद खाली रह गई सीटों को भरने के लिए उठाया गया है।

  • DU की लगभग 71,600 स्नातक सीटों में से 13,300 से अधिक सीटें अभी भी खाली हैं।
  • CUET स्कोर के बाद अब 'मॉप-अप राउंड' में 12वीं के अंकों का उपयोग किया जाएगा।
  • यह अनुमति मुख्य रूप से ऑफ-कैंपस कॉलेजों को दी गई है, हालांकि कुछ प्रतिष्ठित कॉलेज भी इसमें शामिल हैं।
  • UGC के मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) के तहत यह निर्णय लिया गया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने एक बार फिर स्नातक प्रवेश प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। विश्वविद्यालय ने खुलासा किया है कि कई दौर के प्रवेश के बाद भी लगभग 71,600 सीटों में से 13,300 से अधिक सीटें खाली रह गई हैं। इन खाली सीटों को भरने के लिए, विश्वविद्यालय ने कुछ कॉलेजों को अनुमति दी है कि वे कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) के बजाय कक्षा 12वीं के बोर्ड परीक्षा परिणामों के आधार पर छात्रों को प्रवेश दे सकें।

बोर्ड परीक्षा से CUET तक का सफर

साल 2022 से पहले, DU में प्रवेश पूरी तरह से 12वीं के अंकों पर आधारित था। उस समय 'कट-ऑफ' की संस्कृति थी, जहाँ लोकप्रिय पाठ्यक्रमों के लिए 99% से 100% तक अंकों की मांग की जाती थी। इस प्रणाली की आलोचना इस आधार पर की गई कि अलग-अलग शिक्षा बोर्डों (जैसे CBSE, ICSE और राज्य बोर्ड) के अंक देने के तरीके अलग-अलग होते हैं, जिससे कुछ छात्रों को अनुचित लाभ मिलता था। इसी असमानता को दूर करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए CUET अनिवार्य कर दिया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि CUET ने प्रवेश प्रक्रिया को मानकीकृत तो किया है, लेकिन इसने 'कॉर्स-कॉलेज कॉम्बिनेशन' की एक जटिल समस्या पैदा कर दी है। कई छात्र केवल शीर्ष कॉलेजों और पाठ्यक्रमों को चुनते हैं, जिससे कम लोकप्रिय कॉलेजों और ऑफ-कैंपस केंद्रों में सीटें खाली रह जाती हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि केवल एक केंद्रीकृत परीक्षा सभी प्रकार की शैक्षिक आवश्यकताओं और कॉलेज प्राथमिकताओं को पूरा नहीं कर सकती।

CUET का उद्देश्य समानता लाना था, लेकिन मॉप-अप राउंड में बोर्ड अंकों की वापसी यह साबित करती है कि व्यावहारिक स्तर पर सीटों के पूर्ण भराव के लिए लचीलेपन की आवश्यकता है।

अगस्त 2026 में, विश्वविद्यालय ने पहले 11 कॉलेजों की सूची जारी की, जिसमें बाद में इंद्राप्रस्थ कॉलेज फॉर विमेन और गार्गी कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हो गए। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि संसाधन बर्बाद न हों और योग्य छात्रों को शिक्षा का अवसर मिले।

विशेषताCUET आधारित प्रवेश12वीं अंक आधारित प्रवेश (मॉप-अप)
प्राथमिकताप्राथमिक और अनिवार्यअंतिम विकल्प (केवल खाली सीटों के लिए)
उद्देश्यमानकीकरण और समानतासीटों का पूर्ण भराव (Utilization)
लागू कॉलेजसभी संबद्ध कॉलेजचुनिंदा ऑफ-कैंपस और कुछ प्रतिष्ठित कॉलेज
क्या आप जानते हैं?: CUET की शुरुआत से पहले, DU के कुछ पाठ्यक्रमों में कट-ऑफ इतनी अधिक थी कि 99% अंक लाने वाले छात्र भी प्रवेश से वंचित रह जाते थे।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या अब CUET की आवश्यकता नहीं है?
नहीं, CUET अभी भी प्राथमिक प्रवेश माध्यम है। 12वीं के अंकों का उपयोग केवल उन सीटों के लिए किया जा रहा है जो CUET राउंड के बाद खाली रह गई हैं।

प्रश्न 2: कौन से कॉलेज 12वीं के अंकों के आधार पर प्रवेश दे रहे हैं?
मुख्य रूप से ऑफ-कैंपस कॉलेज, लेकिन गार्गी और इंद्राप्रस्थ कॉलेज जैसे कुछ नामी संस्थान भी इस सूची में शामिल किए गए हैं।