IIT दिल्ली में 2023 से अब तक 8 छात्रों ने आत्महत्या कर ली है, जिसने संस्थान की मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था और शैक्षणिक दबाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालिया घटना ने छात्रों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
- 2023 से अब तक IIT दिल्ली के 8 छात्रों ने अपनी जान गंवाई है।
- शैक्षणिक दबाव, परीक्षा में विफलता और अकेलापन मुख्य कारण बनकर उभरे हैं।
- छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए डीन के इस्तीफे की मांग की है।
- एक आंतरिक रिपोर्ट ने 'विषाक्त प्रतिस्पर्धा' और भेदभाव को मुख्य ट्रिगर बताया था।
नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT दिल्ली में छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। 31 वर्षीय एमएससी भौतिकी छात्र ऋषिकेश की हालिया दुखद मृत्यु के बाद, संस्थान के भीतर छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। ऋषिकेश की कथित तौर पर छठी मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने की घटना के बाद कैंपस में भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
ऋषिकेश की मृत्यु के बाद, छात्रों ने न केवल एक स्वतंत्र जांच की मांग की है, बल्कि डीन और एसोसिएट डीन के इस्तीफे की भी मांग की है। यह घटना कोई अकेली घटना नहीं है; 2023 से अब तक सात अन्य छात्रों ने भी इसी तरह के हालातों में दम तोड़ दिया है। इन मौतों के पीछे शैक्षणिक दबाव, परीक्षा में विफलता, अवसाद और सामाजिक अलगाव जैसे आवर्ती विषय देखे गए हैं।
क्यों यह मुद्दा गंभीर है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल व्यक्तिगत त्रासदियां नहीं हैं, बल्कि एक गहरे संस्थागत संकट का संकेत हैं। जब देश के सबसे बुद्धिमान माने जाने वाले छात्र अत्यधिक तनाव के कारण जीवन समाप्त कर लेते हैं, तो यह हमारी शिक्षा प्रणाली की विफलता को दर्शाता है।
प्रतिष्ठित संस्थानों में केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता पर ध्यान देना और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी करना एक घातक संयोजन है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पिछली घटनाएं: पिछले दो वर्षों का रिकॉर्ड भयावह रहा है। सितंबर 2023 में, 21 वर्षीय अनिल कुमार ने अपने हॉस्टल में आत्महत्या कर ली थी, जो गणित और कंप्यूटिंग में बीटेक के अंतिम वर्ष का छात्र था। जुलाई 2023 में, 20 वर्षीय आयुष अश्ना ने परीक्षा परिणामों के तनाव के कारण अपनी जान दे दी। फरवरी 2024 में, एक उच्च प्रदर्शन करने वाले एमटेक छात्र वरद संजय नेरकर की मृत्यु ने संस्थान को हिलाकर रख दिया था, जबकि वह प्लेसमेंट भी हासिल कर चुके थे।
| छात्र का नाम | कोर्स/वर्ष | संभावित कारण |
|---|---|---|
| अनिल कुमार | B.Tech (अंतिम वर्ष) | परीक्षा में विफलता/क्रेडिट की कमी |
| आयुष अश्ना | B.Tech (अंतिम वर्ष) | परीक्षा परिणाम का तनाव |
| वरद नेरकर | M.Tech (अंतिम वर्ष) | अज्ञात/मानसिक दबाव |
| ऋषिकेश | M.Sc Physics | अज्ञात/संस्थानिक दबाव |
2024 में गठित एक समिति ने पहले ही चेतावनी दी थी कि 'कोचिंग के बाद का बर्नआउट', ग्रेडिंग प्रणाली जो 'विषाक्त प्रतिस्पर्धा' को बढ़ावा देती है, और जाति एवं लिंग आधारित भेदभाव छात्रों के लिए बड़े खतरे हैं। हालांकि, उस रिपोर्ट पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. IIT दिल्ली प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
प्रशासन ने एक बाहरी जांच समिति का गठन किया है और छात्रों की सहायता के लिए एक विशेष फंड बनाने की घोषणा की है।
2. क्या संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं?
हाँ, कैंपस में अस्पताल और मनोवैज्ञानिक सेवाएं हैं, लेकिन छात्रों की बढ़ती आत्महत्या की दर बताती है कि ये सेवाएं पर्याप्त या प्रभावी नहीं हैं।