उत्तर प्रदेश सरकार ने 'प्रशस्त 2.0' पहल के तहत शिक्षकों के लिए 10 विशेष संवेदीकरण वीडियो देखना अनिवार्य कर दिया है, ताकि वे जेनरेशन अल्फा छात्रों की शैक्षिक आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।

  • शिक्षकों को 'प्रशस्त 2.0' के तहत 10 अनिवार्य संवेदीकरण वीडियो देखने होंगे।
  • यह पहल जेनरेशन अल्फा (Gen-Alpha) छात्रों की विशिष्ट शैक्षिक आवश्यकताओं की पहचान करने के लिए है।
  • सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के सभी शिक्षक इस प्रक्रिया के दायरे में आएंगे।
  • वीडियो देखने के बाद शिक्षकों को एक निर्धारित ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग ने राज्य की शिक्षण पद्धति में एक क्रांतिकारी बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब राज्य के सभी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए 10 विशेष संवेदीकरण (sensitisation) वीडियो देखना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम 'प्रशस्त 2.0' पहल का हिस्सा है, जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को जेनरेशन अल्फा (Gen-Alpha) के छात्रों की बदलती मनोवैज्ञानिक और शैक्षिक जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाना है।

इन वीडियो की कुल अवधि लगभग 40 मिनट है, जिन्हें शिक्षकों को प्रशस्त ऐप या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से देखना होगा। इन वीडियो का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं है, बल्कि शिक्षकों को एक ऐसी स्क्रीनिंग प्रक्रिया के लिए तैयार करना है जिससे वे बच्चों की विशिष्ट आवश्यकताओं और उन्हें मिलने वाले आवश्यक सहयोग की पहचान कर सकें।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। जेनरेशन अल्फा, जो डिजिटल युग में पैदा हुए हैं, उनकी सीखने की क्षमता और ध्यान केंद्रित करने के तरीके पारंपरिक छात्रों से भिन्न हैं। उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि शिक्षक केवल सूचना प्रदाता न रहकर, बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार सहायक की भूमिका निभा सकें।

डिजिटल युग के बच्चों की जटिल मनोवैज्ञानिक जरूरतों को समझने के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षित होना अब एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है।

इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है। इसमें सरकारी, सहायता प्राप्त (Aided) और निजी (Private) स्कूलों के शिक्षकों को भी शामिल किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि पूरे राज्य में बच्चों की स्क्रीनिंग एक समान और संवेदनशील तरीके से की जाए, चाहे वे किसी भी प्रकार के स्कूल में पढ़ते हों।

मोंलिका रानी, महानिदेशक (स्कूली शिक्षा), द्वारा जारी निर्देशों के बाद, अब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों और विभागीय सहायक निदेशकों को इस प्रक्रिया की निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि स्क्रीनिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले सभी शिक्षक अपना प्रशिक्षण और ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी कर लें।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) की दिशा में 'प्रशस्त' जैसी पहलें महत्वपूर्ण रही हैं। पहले, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करने में अक्सर देरी होती थी। 'प्रशस्त 2.0' के माध्यम से, सरकार तकनीक का उपयोग करके इस पहचान प्रक्रिया को तेज और अधिक सटीक बनाने का प्रयास कर रही है।

Did You Know?: 'जेनरेशन अल्फा' उन बच्चों को कहा जाता है जिनका जन्म 2010 के बाद हुआ है, और वे पूरी तरह से डिजिटल रूप से जुड़े हुए पहले मानव समूह हैं।

Frequently Asked Questions

1. क्या यह प्रशिक्षण केवल सरकारी शिक्षकों के लिए है?
नहीं, यह सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के शिक्षकों के लिए अनिवार्य है।

2. शिक्षक ये वीडियो कहाँ देख सकते हैं?
शिक्षक इन वीडियो को 'प्रशस्त ऐप' या सरकार द्वारा निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से देख सकते हैं।