त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने चेतावनी दी है कि नई शिक्षा नीति (NEP) के लागू होने के बाद से देश भर में लगभग एक लाख सरकारी स्कूल बंद हो गए हैं, जिससे गरीब छात्रों के लिए शिक्षा का संकट पैदा हो गया है।
- NEP 2020 के बाद देशभर में लगभग 1,00,000 सरकारी स्कूलों के बंद होने का दावा।
- निजी शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी पूंजी के बढ़ते प्रभुत्व पर चिंता।
- NITI Aayog के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा प्राप्त युवाओं में बेरोजगारी दर 29% से 40% के बीच है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए।
त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने शनिवार को चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लागू होने के बाद से देश भर में लगभग एक लाख सरकारी स्कूल बंद हो गए हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निजी स्कूलों की बाढ़ आ गई है, जिससे निम्न आर्थिक वर्ग के छात्रों के लिए शिक्षा प्राप्त करना लगभग असंभव होता जा रहा है।
चेन्नई के वेलोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) में 'एरा सेझियन पुरस्कार' प्राप्त करने के बाद अपने संबोधन में, श्री सरकार ने स्वास्थ्य और शिक्षा के बीच गहरा संबंध बताया। उन्होंने तर्क दिया कि स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों ही बुनियादी सेवाएँ हैं जिनकी पूरी जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं से अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रही है और निजी पूंजी के लिए रास्ते खोल रही है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शिक्षा का निजीकरण समाज के सबसे कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से बाहर कर सकता है। यदि सरकारी बुनियादी ढांचा कमजोर होता है, तो सामाजिक असमानता की खाई और गहरी हो जाएगी, जिससे भविष्य की कार्यशक्ति (workforce) प्रभावित होगी।
"स्वास्थ्य और शिक्षा का बेहतर होना एक-दूसरे पर निर्भर है; सरकार को इन सेवाओं की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।"
माणिक सरकार ने NITI Aayog की 2025 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बेरोजगारी के भयावह आंकड़ों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत में बेरोजगार स्नातकों की दर कुल जनसंख्या का 13% है, जबकि माध्यमिक शिक्षा पूरी करने वाले युवाओं के लिए यह दर 29% से 40% के बीच है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश की इस मूल्यवान कार्यशक्ति का उपयोग नहीं किया गया, तो राष्ट्र प्रगति कैसे कर पाएगा?
VIT के संस्थापक और चांसलर जी. विश्वनाथन ने भी इस अवसर पर शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि शिक्षा प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे VIT ने ग्रामीण छात्रों को मुफ्त शिक्षा और प्लेसमेंट के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। उन्होंने सरकारों से शिक्षा पर अधिक खर्च करने का आह्वान किया ताकि मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा मिल सके।
Frequently Asked Questions
1. माणिक सरकार ने किन स्कूलों के बंद होने की बात कही है?
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कार्यान्वयन के बाद लगभग एक लाख सरकारी स्कूलों के बंद होने का दावा किया है।
2. NITI Aayog के अनुसार बेरोजगारी की स्थिति क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्नातकों में बेरोजगारी दर 13% है, जबकि माध्यमिक शिक्षा प्राप्त युवाओं में यह 29% से 40% तक है।