तमिलनाडु के ग्रामीण प्रशिक्षण केंद्रों के छात्रों ने IIT-Madras रिसर्च पार्क में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अपनी कोडिंग और डिजिटल क्षमताओं का प्रदर्शन कर सबको चौंका दिया। 'आशा फॉर एजुकेशन' के माध्यम से ये बच्चे अब रोबोटिक्स और AI जैसे उन्नत क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं।
- तमिलनाडु के 13 ग्रामीण प्रशिक्षण केंद्रों (RTC) के छात्रों ने IIT-M रिसर्च पार्क में अपनी डिजिटल प्रतिभा प्रदर्शित की।
- 'आशा फॉर एजुकेशन' का कार्यक्रम 2022 में केवल दो केंद्रों से शुरू होकर अब 1,200 छात्रों तक पहुँच गया है।
- छात्रों ने रोबोटिक्स, AI, वेब डेवलपमेंट और स्क्रैच प्रोग्रामिंग जैसे विषयों पर 482 प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए।
तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों से निकलकर आए छोटे बच्चों ने तकनीक की दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। IIT-Madras रिसर्च पार्क के रमन हॉल में आयोजित एक राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के दौरान, ग्रामीण प्रशिक्षण केंद्रों (RTC) के छात्रों ने अपनी कोडिंग और डिजिटल साक्षरता का शानदार प्रदर्शन किया। इन छात्रों में से अधिकांश सरकारी स्कूलों के ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद तकनीकी कौशल में महारत हासिल की है।
इनियाश्री, जो तिरुवल्लूर जिले के उथुकोट्टई की रहने वाली हैं, इस सफलता की एक जीवंत मिसाल हैं। उन्होंने 'आशा फॉर एजुकेशन' के माध्यम से Scratch प्रोग्रामिंग सीखी और ब्रह्मांड पर आधारित एक प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। इनियाश्री की खुशी इस बात से झलक रही थी कि पिछले वर्ष वे चयनित नहीं हो पाई थीं, लेकिन इस बार उनकी मेहनत रंग लाई।
तकनीकी शिक्षा का विस्तार
'आशा फॉर एजुकेशन' के चेन्नई चैप्टर ने इस कार्यक्रम को एक बड़े आंदोलन में बदल दिया है। वर्ष 2022 में मात्र दो केंद्रों से शुरू हुआ यह सफर आज लगभग 1,200 छात्रों तक पहुँच चुका है। ये केंद्र कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए छह महीने के मुफ्त पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं। पाठ्यक्रम की विशेषता यह है कि यह केवल बुनियादी डिजिटल साक्षरता तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्र धीरे-धीरे प्रोग्रामिंग, वेब डेवलपमेंट, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे जटिल विषयों में भी पारंगत हो रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के इन बच्चों का आत्मविश्वास और उनकी तकनीकी समझ वास्तव में प्रेरणादायक है।
प्रतियोगिता के दौरान छात्रों ने 482 प्रोजेक्ट्स जमा किए, जिनमें से 64 को IIT-M में प्रस्तुति के लिए चुना गया। इन प्रोजेक्ट्स में कृषि से लेकर खाद्य वितरण प्रबंधन तक के समाधान शामिल थे। रोबोटिक्स के छात्रों ने सफाई करने वाले रोबोट और प्रदूषण डिटेक्टर जैसे अभिनव विचार पेश किए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की पहल भारत के 'डिजिटल डिवाइड' को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब ग्रामीण छात्र वैश्विक स्तर की कंपनियों जैसे Amazon, Ford, और Cisco के विशेषज्ञों के सामने अपने प्रोजेक्ट रखते हैं, तो यह न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाता है बल्कि भविष्य के तकनीकी नेतृत्व की नींव भी रखता है।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में Wipro, Accenture और प्रसिद्ध शिक्षण संस्थानों जैसे BITS Pilानी के प्रोफेसर भी शामिल थे। निर्णायकों ने न केवल छात्रों द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट्स की सराहना की, बल्कि उनके विचारों को स्पष्ट रूप से समझाने की क्षमता की भी प्रशंसा की।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ग्रामीण प्रशिक्षण केंद्र (RTC) क्या हैं?
उत्तर: ये 'आशा फॉर एजुकेशन' द्वारा संचालित केंद्र हैं जो ग्रामीण छात्रों को मुफ्त डिजिटल और तकनीकी शिक्षा प्रदान करते हैं।
प्रश्न 2: छात्र इन केंद्रों में क्या-क्या सीख सकते हैं?
उत्तर: छात्र डिजिटल साक्षरता से लेकर कोडिंग, वेब डेवलपमेंट, रोबोटिक्स और AI तक सीख सकते हैं।