उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने छात्रों से केवल डिग्री हासिल करने के बजाय समाज की समस्याओं को हल करने के लिए अनुसंधान और नवाचार विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षा की सफलता को उसके सामाजिक प्रभाव से मापने की बात कही।
- उपराष्ट्रपति ने डिग्री-केंद्रित शिक्षा के बजाय अनुसंधान-आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।
- कोंगु इंजीनियरिंग कॉलेज में ₹100 करोड़ के 'अरिवकूड़म' रिसर्च पार्क का उद्घाटन किया गया।
- भारत की प्रगति के लिए विज्ञान और तकनीक में निरंतर कौशल विकास जरूरी है।
- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैक्सीन निर्माण और गरीबी उन्मूलन में बड़ी सफलता पाई है।
भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को छात्रों को एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्रियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि अनुसंधान और नवाचार की क्षमता विकसित करना होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि उच्च शिक्षा और अनुसंधान की वास्तविक सफलता इस बात से मापी जानी चाहिए कि वे समाज की चुनौतियों को हल करने में कितने प्रभावी हैं।
यह संबोधन कोंगु वेल्लार इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ट्रस्ट के संस्थापक दिवस समारोह के दौरान दिया गया। इस अवसर पर उन्होंने इरोड स्थित कोंगु इंजीनियरिंग कॉलेज के परिसर में स्थापित होने वाले ₹100 करोड़ के अत्याधुनिक रिसर्च पार्क, 'अरिवकूड़म' के शिलालेख का अनावरण किया।
तकनीकी युग में अनुकूलनशीलता का महत्व
उपराष्ट्रपति ने तेजी से उभरती नई तकनीकों का उल्लेख करते हुए छात्रों से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने ज्ञान और कौशल को निरंतर मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि परिवर्तन अपरिहार्य है और छात्रों को नई परिस्थितियों के अनुकूल ढलने के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए। उन्होंने समस्याओं से घबराने के बजाय शांत रहकर समाधान खोजने की सलाह दी और इसके लिए योग का अभ्यास करने का सुझाव भी दिया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत वर्तमान में अपनी जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का लाभ उठाने के दौर में है। यदि शिक्षा प्रणाली केवल डिग्री देने तक सीमित रहती है, तो कौशल की कमी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बाधा बन सकती है। उपराष्ट्रपति का यह आह्वान भारत को एक 'नॉलेज इकोनॉमी' बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम है।
शिक्षा का असली पैमाना कागजी डिग्री नहीं, बल्कि समाज में लाया गया सकारात्मक बदलाव होना चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने भारत की वैश्विक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने न केवल दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा प्राप्त किया है, बल्कि कोविड-19 महामारी के दौरान स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर मानवता की सेवा भी की। उन्होंने बताया कि भारत ने 140 करोड़ की अपनी आबादी को मुफ्त टीकाकरण दिया और 100 गरीब देशों को भी मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध कराई।
कार्यक्रम में तमिलनाडु और केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 छात्रों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने और शिक्षा को मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक मील का पत्थर है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एम.एम. सुंदरेश ने भी उपराष्ट्रपति के सरल स्वभाव और उच्च मूल्यों की प्रशंसा की।ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत प्राचीन काल से ही शिक्षा का वैश्विक केंद्र रहा है। नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों ने दुनिया को ज्ञान की रोशनी दी थी। वर्तमान में, भारत सरकार की नई शिक्षा नीति का उद्देश्य इसी गौरवशाली विरासत को आधुनिक अनुसंधान और तकनीक के साथ पुनर्जीवित करना है।
Frequently Asked Questions
1. 'अरिवकूड़म' रिसर्च पार्क क्या है?
यह कोंगु इंजीनियरिंग कॉलेज में स्थापित ₹100 करोड़ का एक अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्र है जिसका उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना है।
2. उपराष्ट्रपति ने छात्रों को क्या सलाह दी?
उन्होंने छात्रों को केवल डिग्री के पीछे भागने के बजाय अनुसंधान और सामाजिक समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।