पूर्व AICTE अध्यक्ष टी.जी. सीताराम ने मैसूरु के विद्यावर्धका कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि इंजीनियरिंग केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समस्या सुलझाने का एक दृष्टिकोण है। उन्होंने नवाचार और बुनियादी विज्ञान पर जोर दिया।

  • इंजीनियरिंग को डिग्री के बजाय समस्या-समाधान के नजरिए के रूप में अपनाएं।
  • AI और डेटा साइंस जैसे आधुनिक टूल कोर इंजीनियरिंग ज्ञान के पूरक होने चाहिए।
  • भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए 'प्रोडक्ट-बिल्डिंग' मानसिकता अनिवार्य है।

मैसूरु के विद्यावर्धका कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (VVCE) में आयोजित शैक्षणिक सत्र 2026-27 के इंडक्शन प्रोग्राम के दौरान, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के पूर्व अध्यक्ष टी.जी. सीताराम ने इंजीनियरिंग शिक्षा के प्रति एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंजीनियरिंग शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रमाण पत्र प्राप्त करना नहीं, बल्कि छात्रों को मजबूत बुनियादी सिद्धांतों, समस्या-समाधान क्षमताओं और मानवीय मूल्यों से लैस करना होना चाहिए।

श्री सीताराम ने छात्रों को गणित, भौतिकी और अन्य बुनियादी विज्ञानों में अपनी पकड़ मजबूत करने की सलाह दी। उन्होंने रटकर सीखने की परंपरा को त्यागने और वैचारिक स्पष्टता (Conceptual Clarity) प्राप्त करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, इंजीनियरिंग दुनिया को देखने का एक तरीका है, जिसमें समस्याओं की पहचान करना, गंभीर सोच विकसित करना और व्यावहारिक समाधान खोजना शामिल है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में डिग्री की होड़ अधिक है, जबकि कौशल की कमी है। टी.जी. सीताराम का यह आह्वान कि AI को 'ऑगमेंटेड इंटेलिजेंस' के रूप में देखा जाए, यह संकेत देता है कि भविष्य के इंजीनियरों को केवल टूल चलाने वाला नहीं, बल्कि टूल बनाने वाला बनना होगा। यह दृष्टिकोण भारत के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को सेवा-आधारित मॉडल से उत्पाद-आधारित मॉडल की ओर ले जाने के लिए महत्वपूर्ण है।

"जब तक भारत एक उत्पाद-निर्माण राष्ट्र (Product-building nation) नहीं बनता, तब तक विकसित राष्ट्र बनने का सपना अधूरा रहेगा।"

तकनीकी प्रगति पर चर्चा करते हुए, उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा साइंस जैसे उभरते क्षेत्रों को अपनाने की बात कही, लेकिन चेतावनी दी कि ये डिजिटल उपकरण कोर इंजीनियरिंग विषयों के विकल्प नहीं बल्कि उनके पूरक होने चाहिए। उन्होंने क्वांटम टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में खोज करने के लिए छात्रों को प्रोत्साहित किया।

अभिभावकों को संबोधित करते हुए, उन्होंने शैक्षणिक प्रदर्शन के दबाव को कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं, इंटर्नशिप या नौकरी के अवसरों में विफलता को सीखने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। युवाओं के मन से विफलता के डर को निकालना अनिवार्य है ताकि वे जोखिम ले सकें और नवाचार कर सकें।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि शिक्षा स्नातक की डिग्री के साथ समाप्त नहीं होती। उन्होंने छात्रों को इनोवेशन क्लब, हैकाथॉन, सिम्पोजियम और प्रयोगशाला परियोजनाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने का सुझाव दिया ताकि सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच के अंतर को पाटा जा सके।

क्या आप जानते हैं?: भारत दुनिया के सबसे बड़े इंजीनियरिंग स्नातक उत्पादकों में से एक है, लेकिन उद्योग जगत अक्सर 'एम्प्लॉयबिलिटी गैप' की शिकायत करता है, जिसे केवल व्यावहारिक शिक्षा से ही भरा जा सकता है।

Frequently Asked Questions

1. पूर्व AICTE अध्यक्ष के अनुसार इंजीनियरिंग का सही अर्थ क्या है?
उनके अनुसार, इंजीनियरिंग केवल एक डिग्री नहीं है, बल्कि दुनिया को देखने, समस्याओं को पहचानने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने का एक तरीका है।

2. AI के बारे में उनका क्या विचार है?
उन्होंने AI को 'ऑगमेंटेड इंटेलिजेंस' कहा, जो मानवीय क्षमताओं को बढ़ा सकता है, लेकिन यह कोर इंजीनियरिंग ज्ञान का स्थान नहीं ले सकता।