पुणे के IISER संस्थान में एक छात्र की मृत्यु के बाद छात्रों का विरोध प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी रहा। छात्र मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और भेदभावपूर्ण छात्रावास नियमों को खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
- IISER पुणे में छात्र चौथे दिन भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
- छात्रों की मुख्य मांगों में मानसिक स्वास्थ्य ढांचे में सुधार और भेदभावपूर्ण छात्रावास नियम शामिल हैं।
- छात्र प्रतिनिधि राज बागवे के निलंबन को वापस लेने की मांग की जा रही है।
पुणे: भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (IISER), पुणे में छात्र अशांति का दौर जारी है। रविवार, 30 अगस्त, 2026 को विरोध प्रदर्शन अपने चौथे दिन भी पहुंच गया। यह आंदोलन 16 अगस्त को एक तीसरे वर्ष के BS-MS छात्र की दुखद मृत्यु के बाद शुरू हुआ था। छात्र प्रशासन से संस्थान के भीतर बुनियादी बदलावों की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी मांगों को पांच मुख्य बिंदुओं में विभाजित किया है। इनमें मानसिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में सुधार, 'दमनकारी लिंग-आधारित छात्रावास प्रतिबंधों' का अंत, परिसर सुविधाओं तक पर्याप्त पहुंच, शांतिपूर्ण विरोध के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई से सुरक्षा, और छात्र प्रतिनिधि एवं महासचिव राज बागवे के निलंबन को वापस लेना शामिल है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक संस्थान का नहीं, बल्कि देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रोटोकॉल की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। जब छात्र अपनी आवाज उठाने के लिए सड़कों पर उतरते हैं, तो यह प्रशासन और छात्र शक्ति के बीच बढ़ते विश्वास की कमी का संकेत है।
संस्थानों में छात्रों की मानसिक स्थिति और सुरक्षा के प्रति लापरवाही एक गंभीर संस्थागत संकट का संकेत है।
विवाद का एक मुख्य केंद्र राज बागवे का मामला है। बागवे ने कथित तौर पर परिसर में यौन उत्पीड़न की घटना के संबंध में प्रशासन को ईमेल के माध्यम से सूचित किया था, जिसके बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई और उन्हें निलंबित कर दिया गया। छात्र संघ (SFI) ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है।
SFI ने एक बयान में कहा कि प्रशासन को राज बागवे के निलंबन को तुरंत वापस लेना चाहिए। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के लिए 10 स्थायी परामर्शदाताओं और पांच स्थायी मनोचिकित्सकों की नियुक्ति की मांग भी की है। छात्र प्रशासन से निदेशक सुनील एस. भागवत के साथ एक खुली बैठक की मांग कर रहे हैं, जिसमें कार्यवाही की रिकॉर्डिंग भी की जाए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
IISER संस्थान भारत के प्रमुख विज्ञान अनुसंधान केंद्रों में से एक है। पिछले कुछ वर्षों में, देश के कई शीर्ष संस्थानों में छात्रों के मानसिक तनाव और आत्महत्या के मामलों में वृद्धि देखी गई है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक संस्थानों के स्वास्थ्य ढांचे पर सवाल खड़े किए हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: छात्र मुख्य रूप से क्या मांग रहे हैं?
उत्तर: छात्र मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, भेदभावपूर्ण छात्रावास नियमों में बदलाव और छात्र प्रतिनिधि के निलंबन को हटाने की मांग कर रहे हैं।
प्रश्न 2: संस्थान का इस पर क्या कहना है?
उत्तर: संस्थान का कहना है कि छात्र शांतिपूर्ण विरोध कर सकते हैं और वे मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए अतिरिक्त परामर्शदाता नियुक्त करने की प्रक्रिया में हैं।