कालीकट विश्वविद्यालय ने केरल सरकार से Sreenarayanaguru Open University (SNGOU) अधिनियम में संशोधन करने का आग्रह किया है ताकि वह अपने लोकप्रिय दूरस्थ शिक्षा (ODL) पाठ्यक्रम फिर से शुरू कर सके।

  • कालीकट विश्वविद्यालय ने SNGOU अधिनियम की धाराओं 47(2) और 72 में संशोधन की मांग की है।
  • वर्तमान कानून केवल श्री नारायणगुरु ओपन यूनिवर्सिटी को दूरस्थ शिक्षा देने का विशेष अधिकार देता है।
  • इस प्रतिबंध के कारण हजारों छात्रों को उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित होना पड़ रहा है।
  • विश्वविद्यालय ने इन कार्यक्रमों के विस्तार के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।

कालीकट विश्वविद्यालय ने आधिकारिक तौर पर उच्च शिक्षा विभाग से Sreenarayanaguru Open University (SNGOU) Act, 2021 के प्रावधानों में संशोधन करने का अनुरोध किया है। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय को अपने ओपन और दूरस्थ शिक्षा (ODL) कार्यक्रमों को फिर से शुरू करने की अनुमति देना है।

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सी.डी. सेबेस्टियन ने उच्च शिक्षा के प्रधान सचिव को लिखे पत्र में इस मांग को प्रमुखता से उठाया है। यह कदम 9 जुलाई, 2026 को सिंडिकेट द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद उठाया गया है, जिसमें केरल सरकार से कालीकट विश्वविद्यालय को दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम संचालित करने की अनुमति देने का आग्रह किया गया था।

कानूनी बाधाएं और छात्रों पर प्रभाव

रजिस्ट्रार सेबेस्टियन ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय के ODL कार्यक्रमों को पहले UGC के डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो (DEB) से मंजूरी प्राप्त थी। हालांकि, 2021 में SNGOU की स्थापना के बाद, अधिनियम की धारा 47(2) और 72 के तहत अन्य विश्वविद्यालयों के लिए दूरस्थ शिक्षा और निजी पंजीकरण पाठ्यक्रम संचालित करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

इस कानूनी स्थिति का सबसे बुरा असर कोझिकोड, मलप्पुरम, पलक्कड़, त्रिशूर और वायनाड जिलों के हजारों छात्रों पर पड़ा है। ये छात्र अपने स्थानीय क्षेत्र के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसर से वंचित हो रहे हैं।

कानूनी बाधाओं के कारण हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है, जबकि विश्वविद्यालय के पास संसाधन और मांग दोनों मौजूद हैं।

BozokMedia विश्लेषण: शिक्षा का अधिकार बनाम एकाधिकार

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी एक संस्थान को विशेष अधिकार देना कभी-कभी छात्रों के व्यापक हितों के साथ संघर्ष कर सकता है। जहाँ SNGOU को स्थापित करने का उद्देश्य दूरस्थ शिक्षा को सुव्यवस्थित करना था, वहीं कालीकट विश्वविद्यालय जैसे स्थापित संस्थानों को प्रतिबंधित करने से क्षेत्रीय स्तर पर शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा और पहुंच में कमी आई है।

ऐतिहासिक छात्र नामांकन डेटा

दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों की लोकप्रियता का अंदाजा पिछले कुछ वर्षों के नामांकन आंकड़ों से लगाया जा सकता है:

शैक्षणिक वर्षप्रस्तावित पाठ्यक्रम (UG/PG)कुल छात्र नामांकन
2016-1715 UG / 12 PG47,681
2018-1914 UG / 12 PG50,476
2020-2115 UG / 13 PG33,570
2023-2404 UG / 09 PG22,867

विश्वविद्यालय ने इन कार्यक्रमों को पुनर्जीवित करने के लिए ₹10 करोड़ का बजट भी निर्धारित किया है।

Did You Know?: कालीकट विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों में एक समय में 50,000 से अधिक छात्र नामांकित होते थे।

Frequently Asked Questions

1. कालीकट विश्वविद्यालय को दूरस्थ शिक्षा क्यों नहीं चलाने दी जा रही है?
SNGOU अधिनियम की धारा 47(2) और 72 के तहत, वर्तमान में केवल श्री नारायणगुरु ओपन यूनिवर्सिटी को ही दूरस्थ शिक्षा प्रदान करने का विशेष अधिकार प्राप्त है।

2. क्या सरकार इस मांग पर विचार कर रही है?
सूत्रों के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय की इस मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।

Editor Comment

शिक्षा का लोकतंत्रीकरण केवल नए संस्थानों के निर्माण से नहीं, बल्कि मौजूदा संस्थानों की क्षमताओं को उपयोग में लाने से होता है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रशासनिक नियम छात्रों की शैक्षणिक प्रगति में बाधा न बनें।