दयानंद सागर यूनिवर्सिटी के हारोहल्ली कैंपस के सैकड़ों छात्रों ने भारी फीस भरने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

  • एस-रेजिडेंस हॉस्टल के 5,000 से अधिक छात्र प्रभावित।
  • मुख्य समस्याएं: बंद वाई-फाई, दूषित पेयजल और स्वच्छता का अभाव।
  • छात्र सालाना ₹2.45 लाख फीस भर रहे हैं, फिर भी बोतल बंद पानी खरीदने को मजबूर।

बेंगलुरु के दयानंद सागर यूनिवर्सिटी के हारोहल्ली कैंपस स्थित एस-रेजिडेंस हॉस्टल में मंगलवार रात तनावपूर्ण माहौल रहा, जब सैकड़ों छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन और हॉस्टल वार्डन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।

प्रदर्शनकारी छात्रों, जिनमें मुख्य रूप से इंजीनियरिंग और मेडिकल के छात्र शामिल हैं, ने बताया कि वे पिछले एक महीने से अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने उठा रहे हैं। छात्रों के अनुसार, 26 अगस्त को हुए एक विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने पांच दिनों के भीतर समस्याओं को हल करने का आश्वासन दिया था, लेकिन 31 अगस्त की समय सीमा बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

लापरवाही का आलम

हॉस्टल की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। छात्रों ने बंद वाई-फाई, नहाने के लिए गर्म पानी की कमी, पीने के पानी की खराब गुणवत्ता और नियमित सफाई न होने जैसी समस्याओं को उजागर किया। इसके अलावा, लिफ्ट का खराब होना और फूड वेंडिंग मशीनों का खाली रहना भी बड़ी समस्याएं बन गई हैं। यह समस्या लड़के और लड़कियों दोनों के हॉस्टलों में व्याप्त है, जिससे लगभग 5,000 छात्र प्रभावित हैं।

एक छात्र ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि वे सालाना ₹2.45 लाख हॉस्टल फीस देते हैं, लेकिन पीने का पानी इतना क्लोरीनयुक्त है कि उससे गले में खराश हो रही है। इतनी भारी फीस देने के बाद भी छात्रों को बाहर की दुकानों से पीने का पानी खरीदना पड़ रहा है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह घटना निजी विश्वविद्यालयों में 'शिक्षा के व्यवसायीकरण' की ओर इशारा करती है, जहां राजस्व तो वसूला जाता है लेकिन छात्र कल्याण को नजरअंदाज कर दिया जाता है। जब भविष्य के डॉक्टरों और इंजीनियरों को बुनियादी स्वच्छता और पानी जैसी जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ता है, तो यह सीधे तौर पर उनके मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा को प्रभावित करता है।

निजी विश्वविद्यालयों में कॉर्पोरेट स्तर की फीस और झुग्गी जैसी रहने की स्थिति के बीच का अंतर नियामक निगरानी की एक बड़ी विफलता है।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कुलपति बी.एस. सत्यनारायण ने स्वीकार किया कि बिजली, वाई-फाई और पानी से जुड़ी समस्याएं रिपोर्ट की गई थीं, जिन्हें हल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि यूनिवर्सिटी में आरओ पानी की व्यवस्था है और वर्तमान समस्या केवल प्लंबिंग की खराबी के कारण थी।

क्या आप जानते हैं?: भारत के कई बड़े निजी विश्वविद्यालय अब फीस बढ़ाने के लिए 'लक्जरी' हाउसिंग मॉडल अपना रहे हैं, लेकिन अक्सर इन बड़े परिसरों के बुनियादी रखरखाव में विफल रहते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: दयानंद सागर के छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
छात्र वाई-फाई की बहाली, स्वच्छ पेयजल, चालू लिफ्ट और बेहतर स्वच्छता व सफाई सेवाओं की मांग कर रहे हैं।

प्रश्न 2: छात्र इन सुविधाओं के लिए कितनी फीस देते हैं?
छात्रों के अनुसार, वे हॉस्टल के लिए सालाना लगभग ₹2.45 लाख का भुगतान करते हैं।