बढ़ती ट्यूशन फीस और सख्त वीजा नियमों के कारण लगभग आधे भारतीय जेन ज़ी छात्रों ने विदेश में पढ़ाई की अपनी इच्छा कम कर दी है। अब छात्र भारत में ही अंतरराष्ट्रीय डिग्री प्रोग्राम खोजने की ओर रुख कर रहे हैं।

  • 48% भारतीय छात्रों की विदेश पढ़ने में रुचि पिछले एक साल में कम हुई है।
  • बढ़ती लागत (37%) और वीजा जटिलताएं (26%) मुख्य बाधाएं बनकर उभरी हैं।
  • 68% छात्र भारत में स्थित अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के कार्यक्रमों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

शिक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी Emeritus द्वारा जारी 'इंडियाज़ जेन ज़ी आउटलुक 2026' रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। भारत के प्रमुख शहरों के 1,010 उत्तरदाताओं (आयु 15-28 वर्ष) पर किए गए इस सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारतीय युवाओं का विदेश जाकर डिग्री हासिल करने का सपना अब व्यावहारिक चुनौतियों के कारण धूमिल हो रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, विदेश जाने के विचार को छोड़ने या कम करने वाले छात्रों में सबसे बड़ा कारण बढ़ती लागत है। लगभग 37% छात्रों ने इसे मुख्य कारण बताया, जबकि 26% ने वीजा और आव्रजन (immigration) की जटिलताओं को जिम्मेदार ठहराया। इसके अलावा, 24% छात्रों ने सुरक्षा चिंताओं और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का हवाला दिया है।

अमेरिका के प्रति घटता आकर्षण

यह रुझान विशेष रूप से अमेरिका जाने के इच्छुक छात्रों में देखा गया है। अमेरिका जाने की योजना बनाने वाले 42% छात्रों ने अपनी रुचि में गिरावट दर्ज की है। इनमें से 41% ने भारी ट्यूशन फीस और 34% ने सख्त वीजा नीतियों को अपनी योजना बदलने का मुख्य कारण बताया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारतीय छात्र अब 'आकांक्षा-driven' निर्णयों के बजाय 'प्रैग्मैटिक' (व्यावहारिक) दृष्टिकोण अपना रहे हैं। अब केवल यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा ही काफी नहीं है, बल्कि छात्र निवेश पर रिटर्न (ROI), करियर के अवसर और दीर्घकालिक रोजगार की संभावनाओं का गहन विश्लेषण कर रहे हैं। यह वैश्विक शिक्षा बाजार में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

"भारतीय छात्र अब वैश्विक शिक्षा की गुणवत्ता तो चाहते हैं, लेकिन वे इसे स्थानीय स्तर पर प्राप्त करने के सुरक्षित और सस्ते विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।"

सर्वेक्षण यह भी दर्शाता है कि छात्र पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय शिक्षा को छोड़ नहीं रहे हैं, बल्कि वे हाइब्रिड मॉडल की तलाश कर रहे हैं। ऐसे मॉडल जो भारत में पढ़ाई के साथ-साथ कुछ समय के लिए विदेश जाने (सेमेस्टर एक्सचेंज) की सुविधा देते हैं, उनकी लोकप्रियता 27% से बढ़कर 39% हो गई है।

कारकप्रभाव (प्रतिशत)मुख्य चिंता
लागत (Cost)37%महंगी ट्यूशन फीस
वीजा (Visa)26%सख्त नियम और अनिश्चितता
सुरक्षा (Safety)24%भू-राजनीतिक तनाव
क्या आप जानते हैं?: 72% भारतीय छात्र मानते हैं कि भारत में संचालित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम वैश्विक मानकों को बनाए रखते हुए अधिक किफायती होते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: भारतीय छात्र विदेश जाने के बजाय भारत में अंतरराष्ट्रीय प्रोग्राम क्यों चुन रहे हैं?
उत्तर: मुख्य कारणों में वीजा अनिश्चितता से बचना, ट्यूशन फीस में कमी और स्थानीय स्तर पर वैश्विक गुणवत्ता प्राप्त करना शामिल है।

प्रश्न 2: 'हाइब्रिड मॉडल' क्या है?
उत्तर: यह एक ऐसा शैक्षणिक मॉडल है जिसमें छात्र अपनी डिग्री का कुछ हिस्सा भारत में और कुछ हिस्सा (जैसे एक सेमेस्टर) विदेश में पूरा करते हैं।