दिल्ली उच्च न्यायालय ने UGC-NET जून 2026 के अंग्रेजी विषय की पुन: परीक्षा कराने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर NTA और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता ने इस निर्णय को मनमाना और असंवैधानिक बताया है।

  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने UGC-NET पुन: परीक्षा के फैसले पर NTA और केंद्र से जवाब मांगा है।
  • याचिका में अंग्रेजी विषय की पुन: परीक्षा को मनमाना और अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया गया है।
  • अदालत ने परीक्षा शुल्क की वापसी के संबंध में निर्णय लेने का भी निर्देश दिया है।
  • अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार को एक महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया है। यह नोटिस UGC-NET जून 2026 के अंग्रेजी विषय की पुन: परीक्षा आयोजित करने के निर्णय को चुनौती देने वाली एक याचिका के संबंध में दिया गया है। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।

याचिकाकर्ता, पारुल शेओरान, ने NTA द्वारा 16 अगस्त को जारी उस नोटिस को रद्द करने की मांग की है, जिसमें अंग्रेजी विषय के लिए परीक्षा फिर से कराने का निर्देश दिया गया था। याचिका में तर्क दिया गया है कि यह निर्णय न केवल मनमाना और अनुचित है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का भी स्पष्ट उल्लंघन है। याचिकाकर्ता का दावा है कि NTA ने बिना किसी ठोस आधार को सार्वजनिक किए और सूचना बुलेटिन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना यह फैसला लिया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की प्रमुख परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है। यदि पुन: परीक्षा का निर्णय बरकरार रहता है, तो यह हजारों छात्रों के करियर और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए प्रक्रियात्मक पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों का संरक्षण अनिवार्य है।

NTA के अनुसार, जून 2026 में आयोजित की गई परीक्षाओं में अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र विषयों में कई त्रुटियां पाई गई थीं। एक विशेष समिति की रिपोर्ट में पुष्टि की गई कि प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, टाइपोग्राफिकल और अनुवाद संबंधी गंभीर गलतियां थीं, जिनमें प्रसिद्ध विद्वानों के नाम गलत लिखे जाना और व्याकरण संबंधी त्रुटियां शामिल थीं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

UGC-NET परीक्षा भारत में जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) और सहायक प्रोफेसर बनने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मानक परीक्षा है। पिछले कुछ वर्षों में, NTA द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक और त्रुटियों के कारण विवादों का सिलसिला देखा गया है, जिससे छात्रों के बीच भारी असंतोष पैदा हुआ है।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि यदि अदालत पुन: परीक्षा की अनुमति देती है, तो छात्रों को उनके द्वारा पहले भुगतान किए गए परीक्षा शुल्क की पूर्ण वापसी की जानी चाहिए, ताकि उन्हें बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के परीक्षा में बैठने का अधिकार मिल सके।

Did You Know?: UGC-NET परीक्षा देश भर में लाखों उम्मीदवारों के लिए पीएचडी प्रवेश और अकादमिक करियर का मुख्य द्वार है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: UGC-NET पुन: परीक्षा किन विषयों के लिए निर्धारित है?
उत्तर: वर्तमान में अंग्रेजी और वाणिज्य के पेपर 9 सितंबर को और समाजशास्त्र का पेपर 10 सितंबर को आयोजित किया जाना है।

प्रश्न 2: अदालत ने शुल्क वापसी पर क्या कहा?
उत्तर: अदालत ने अधिकारियों को परीक्षा शुल्क की वापसी के संबंध में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।