UGC-NET अंग्रेजी परीक्षा के पुन: आयोजन के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और NTA से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने परीक्षा शुल्क की वापसी और पुराने परिणामों को जारी करने की मांग की है।
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने UGC-NET अंग्रेजी पुन: परीक्षा के फैसले पर केंद्र और NTA को नोटिस जारी किया।
- याचिकाकर्ता ने पुन: परीक्षा के फैसले को मनमाना बताते हुए परीक्षा शुल्क वापसी की मांग की है।
- मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने UGC-NET जून 2026 अंग्रेजी परीक्षा को फिर से आयोजित करने के निर्णय को चुनौती देने वाली एक याचिका पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने उम्मीदवार पारुल श्योराण द्वारा दायर याचिका पर यह नोटिस जारी किया है।
याचिका में NTA द्वारा 16 अगस्त को जारी उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें अंग्रेजी विषय की परीक्षा फिर से कराने का आदेश दिया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह निर्णय पूरी तरह से मनमाना है और बिना किसी ठोस आधार या सामग्री का खुलासा किए लिया गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला न केवल छात्रों के भविष्य से जुड़ा है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। यदि पुन: परीक्षा का निर्णय बरकरार रहता है, तो छात्रों के सामने दोबारा परीक्षा देने का मानसिक दबाव और वित्तीय बोझ बढ़ जाएगा।
परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर सकती है, जो कि न्यायिक समीक्षा का एक गंभीर विषय है।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि या तो पहले आयोजित की गई अंग्रेजी परीक्षा के परिणाम घोषित किए जाएं, या यदि पुन: परीक्षा अनिवार्य है, तो छात्रों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के परीक्षा देने की अनुमति दी जाए। यदि परीक्षा शुल्क वापस नहीं किया जाता है, तो यह छात्रों पर अनुचित आर्थिक बोझ होगा।
पृष्ठभूमि: त्रुटियों के कारण पुन: परीक्षा का निर्णय
NTA ने जून 2026 में 87 विषयों के लिए UGC-NET आयोजित किया था। हालांकि, अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों में गंभीर त्रुटियों की शिकायतें मिलने के बाद एक समिति का गठन किया गया। समिति ने पाया कि प्रश्नपत्रों में विद्वानों के नाम, पुस्तकों के शीर्षक, व्याकरण और अनुवाद संबंधी कई तथ्यात्मक और टाइपोग्राफिकल गलतियां थीं।
इन त्रुटियों के कारण ही NTA ने अंग्रेजी और वाणिज्य के लिए 9 सितंबर और समाजशास्त्र के लिए 10 सितंबर को पुन: परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया था।
Frequently Asked Questions
1. याचिकाकर्ता की मुख्य मांग क्या है?
याचिकाकर्ता ने पुन: परीक्षा के नोटिस को रद्द करने और पहले हुई परीक्षा के परिणाम घोषित करने या परीक्षा शुल्क वापस करने की मांग की है।
2. अगली सुनवाई कब है?
दिल्ली उच्च न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।