IIT दिल्ली के सोनीपत परिसर ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के साथ मिलकर सौर ऊर्जा में एक विशेष पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें छात्रों को यूरोप में इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा।
- IIT दिल्ली ने सोनीपत परिसर में सौर ऊर्जा प्रबंधन में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा शुरू किया है।
- यह कार्यक्रम इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) और फ्रांस के INES के सहयोग से संचालित है।
- छात्रों को कोर्स के बाद यूरोप में एक महीने की महत्वपूर्ण इंटर्नशिप मिलेगी।
- लक्ष्य ISA के 120+ सदस्य देशों में सौर ऊर्जा विशेषज्ञों को तैयार करना है।
IIT दिल्ली ने अपने सोनीपत परिसर में एक ऐतिहासिक शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत कर दी है। संस्थान ने दुनिया की सबसे बड़ी स्वच्छ ऊर्जा चुनौतियों में से एक, यानी सौर ऊर्जा, पर केंद्रित अपना पहला शैक्षणिक कार्यक्रम लॉन्च किया है। यह कार्यक्रम न केवल तकनीकी कौशल प्रदान करेगा, बल्कि छात्रों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।
यह एक वर्षीय Postgraduate Diploma in Solar Systems and Management अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और फ्रांस के 'इंस्टीट्यूट नेशनल डी ल'एनर्जी सोलेर' (INES) के सहयोग से विकसित किया गया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना और वैश्विक स्तर पर हरित ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
वैश्विक सहयोग और प्रशिक्षण
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रकृति है। पहले बैच में ही आठ अलग-अलग देशों के नौ अंतरराष्ट्रीय फेलो शामिल हुए हैं। यह कार्यक्रम United Nations Industrial Development Organisation (UNIDO) द्वारा प्रायोजित है, जो इसकी वैश्विक प्रासंगिकता को और अधिक पुख्ता करता है।
यह कार्यक्रम संस्थान को ऊर्जा शिक्षा और प्रबंधन के वैश्विक अग्रदूत के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
प्रोफेसर रमेश नारायणन, ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख, ने बताया कि इस पहल से IIT दिल्ली ऊर्जा क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएगा। प्रशिक्षण के बाद, इन विशेषज्ञों को उनके गृह देशों में STAR-C (Solar Technology and Application Resource Centres) केंद्रों में तैनात किया जाएगा, ताकि वे स्थानीय स्तर पर सौर ऊर्जा के प्रसार में मदद कर सकें।
सोनीपत से यूरोप तक का सफर
यह केवल एक पारंपरिक कक्षा आधारित कार्यक्रम नहीं है। छात्रों को सौर तकनीक और उसके अनुप्रयोगों में व्यावहारिक (hands-on) प्रशिक्षण दिया जाएगा। कोर्स पूरा होने के बाद, फेलो को यूरोप में एक महीने की इंटर्नशिप दी जाएगी, जो लागू सौर प्रौद्योगिकियों (applied solar technologies) पर केंद्रित होगी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि IIT दिल्ली की यह पहल भारत की 'नेट जीरो' उत्सर्जन की महत्वाकांक्षाओं और वैश्विक सौर नेतृत्व के लक्ष्यों के साथ पूरी तरह मेल खाती है। यह न केवल उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से कौशल विकास के नए द्वार भी खोलती है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस कोर्स की अवधि क्या है?
उत्तर: यह सौर प्रणालियों और प्रबंधन में एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कार्यक्रम है।
प्रश्न 2: इंटर्नशिप कहाँ होगी?
उत्तर: डिप्लोमा पूरा करने के बाद, छात्रों को सौर प्रौद्योगिकियों पर काम करने के लिए यूरोप में एक महीने की इंटर्नशिप दी जाएगी।