मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप श्री जी एस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS), इंदौर में सिविल इंजीनियरिंग में हिंदी माध्यम के बीटेक कार्यक्रम का शुभारंभ किया है। यह पहल छात्रों को अंतिम वर्ष में 2 लाख रुपये का महत्वपूर्ण प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य तकनीकी शिक्षा को अधिक सुलभ बनाना और हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए ड्रॉपआउट दर को कम करना है।

  • मध्य प्रदेश में सिविल इंजीनियरिंग में हिंदी माध्यम का बीटेक कार्यक्रम शुरू।
  • अंतिम वर्ष के छात्रों को राज्य सरकार से 2 लाख रुपये का प्रोत्साहन।
  • यह कार्यक्रम श्री जी एस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS), इंदौर में शुरू किया गया है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप, तकनीकी शिक्षा में भाषा की बाधा को दूर करने का लक्ष्य।

इंदौर, 4 सितंबर, 2026: मध्य प्रदेश ने वर्तमान शैक्षणिक सत्र से सिविल इंजीनियरिंग में हिंदी माध्यम के बीटेक कार्यक्रम की शुरुआत कर एक महत्वपूर्ण शैक्षिक पहल की है। इस क्रांतिकारी कदम के तहत, पाठ्यक्रम में नामांकित छात्रों को उनके अंतिम वर्ष में राज्य सरकार से 2 लाख रुपये का उल्लेखनीय प्रोत्साहन मिलेगा। अधिकारियों ने गुरुवार को इस घोषणा की पुष्टि की, जिससे तकनीकी शिक्षा के परिदृश्य में एक नया अध्याय जुड़ गया है।

यह कार्यक्रम मध्य भारत के प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक, श्री जी एस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS), इंदौर में शुरू किया गया है। एसजीएसआईटीएस एक सहायता प्राप्त स्वायत्त संस्थान है। इस पहल के तहत, सिविल इंजीनियरिंग में एक समर्पित हिंदी माध्यम बैच के लिए 30 सीटें आरक्षित की गई हैं, और अधिकारियों के अनुसार, लगभग 20 छात्र पहले ही इस कार्यक्रम में प्रवेश ले चुके हैं। यह कदम छात्रों को हिंदी में तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करने और उन्हें इंजीनियरिंग अध्ययन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है।

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य उन छात्रों के लिए तकनीकी शिक्षा को अधिक सुलभ बनाना है जिन्होंने हिंदी माध्यम के स्कूलों से पढ़ाई की है। भारत में, कई हिंदी माध्यम के छात्रों को 12वीं कक्षा तक अपनी मातृभाषा में पढ़ने के बाद अंग्रेजी-आधारित उच्च शिक्षा में संक्रमण के दौरान महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अक्सर, यह भाषा बाधा छात्रों को अपनी पसंद के पाठ्यक्रमों को आगे बढ़ाने से हतोत्साहित करती है या उन्हें बीच में ही पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर करती है। यह कार्यक्रम इस महत्वपूर्ण अंतर को पाटने का प्रयास करता है।

एसजीएसआईटीएस में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख सुनील अजमेरा ने बताया कि संस्थान ने वर्षों से यह देखा था कि 12वीं कक्षा तक हिंदी माध्यम में पढ़ाई करने वाले कई छात्रों को अंग्रेजी में इंजीनियरिंग करने में कठिनाई होती थी, और कुछ तो बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते थे। अजमेरा ने कहा, “इस पहलू को ध्यान में रखते हुए, बी.टेक सिविल इंजीनियरिंग कोर्स हिंदी में शुरू किया गया है ताकि छात्र अपनी मातृभाषा में पढ़ाई कर सकें और परीक्षाओं में शामिल हो सकें।”

संस्थान ने इस हिंदी माध्यम के पाठ्यक्रम को शुरू करने से पहले कई वर्षों तक तैयारी की। सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर विवेक तिवारी ने बताया कि संस्थान के विशेषज्ञ पिछले चार वर्षों से अंग्रेजी तकनीकी अध्ययन सामग्री का हिंदी में अनुवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को हिंदी में पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित करने के लिए कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। इंजीनियरिंग छात्र रोहित शर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “मेरे लिए, अंग्रेजी में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई का मतलब मुश्किल विषयों को समझने के लिए गूगल और चैटजीपीटी से मदद लेना होता। लेकिन अपनी मातृभाषा हिंदी में पढ़ाई करते समय, शिक्षक तकनीकी शब्दों को भी आसानी से अंग्रेजी में समझा सकते हैं।”

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मातृभाषा में शिक्षा छात्रों की वैचारिक समझ और सीखने की दक्षता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाती है, विशेष रूप से जटिल तकनीकी क्षेत्रों में। यह पहल न केवल मध्य प्रदेश में शैक्षिक समावेशिता को बढ़ावा देती है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कौशल विकास और नवाचार के लिए एक मॉडल भी स्थापित करती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भाषाई पृष्ठभूमि के कारण कोई भी प्रतिभाशाली दिमाग पीछे न रह जाए।

“मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा प्रदान करना एक प्रगतिशील कदम है जो न केवल सीखने की प्रक्रिया को लोकतांत्रीकरण करता है बल्कि छात्रों को उनके मूल सांस्कृतिक संदर्भ में जटिल अवधारणाओं को समझने में भी सशक्त बनाता है, जिससे अंततः बेहतर समस्या-समाधान कौशल और नवाचार होता है।”

संकाय सदस्यों ने जोर देकर कहा कि हिंदी माध्यम के पाठ्यक्रम में नामांकित छात्रों को आवश्यक अंग्रेजी भाषा कौशल भी प्रदान किए जाते हैं ताकि वे वर्तमान प्रतिस्पर्धी माहौल में प्रतिस्पर्धी बने रहें। सिविल इंजीनियरिंग को हिंदी में पेश करने का उद्देश्य छात्रों को अंग्रेजी से दूर करना नहीं है, बल्कि उन्हें उनकी मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा प्रदान करना है, जबकि यह सुनिश्चित करना है कि वे अपने करियर के लिए आवश्यक अंग्रेजी कौशल प्राप्त करें।

क्या आप जानते हैं?: भारत में हिंदी 52.8 करोड़ से अधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली सबसे व्यापक भाषा है, जो इसे शिक्षा और संचार के लिए एक शक्तिशाली माध्यम बनाती है।

Frequently Asked Questions

  1. हिंदी माध्यम बीटेक कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
  2. यह कार्यक्रम छात्रों को वैश्विक रोजगार बाजार में प्रतिस्पर्धी कैसे बनाए रखेगा?