ओडिशा के एक छोटे से गांव से निकलकर IIT हैदराबाद के प्रोफेसर बने कीर्ति चंद्र साहू को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। उनका शोध बारिश की बूंदों के भौतिक विज्ञान पर केंद्रित है, जो मौसम विज्ञान में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

  • प्रोफेसर कीर्ति चंद्र साहू को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया जाएगा।
  • उनका शोध बारिश की बूंदों के आकार और गिरने की प्रक्रिया (Raindrop Physics) पर केंद्रित है।
  • साहू ने IIT हैदराबाद के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ओडिशा के सुवर्णपुर जिले के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर आज देश के सर्वोच्च सम्मानों में से एक तक पहुंच गया है। IIT हैदराबाद के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर कीर्ति चंद्र साहू को 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026' के लिए चुना गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 5 सितंबर को उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजेंगी।

साहू की कहानी केवल शैक्षणिक सफलता की नहीं, बल्कि अटूट संघर्ष की भी है। एक समय था जब वे बिना भोजन या साफ कपड़ों के स्कूल जाते थे। उनके लिए पढ़ाई कोई जुनून नहीं, बल्कि गरीबी से निकलने का एकमात्र रास्ता था। उनके पिता एक प्राथमिक शिक्षक थे, जिन्होंने उन्हें कभी हार न मानने की सीख दी। एक भावुक मोड़ तब आया जब उन्हें पता चला कि उनके छोटे भाई ने उनकी उच्च शिक्षा का खर्च उठाने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ दी और टैक्सी ड्राइवर का काम शुरू कर दिया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, प्रोफेसर साहू का शोध केवल अकादमिक नहीं है, बल्कि यह भारत की जलवायु संबंधी चुनौतियों का समाधान करने की क्षमता रखता है। उनकी प्रयोगशाला में विकसित तकनीक बारिश के सटीक पूर्वानुमान में मदद कर सकती है, जो कृषि और आपदा प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रोफेसर साहू का मुख्य शोध विषय 'गिरती हुई बारिश की बूंदों' का अध्ययन करना है। जब एक बूंद बादल से गिरती है, तो उसका आकार और रूप बदलता रहता है, जिससे मौसम रडार द्वारा की जाने वाली बारिश की माप प्रभावित होती है। उन्होंने IIT हैदराबाद में एक ऐसी विशिष्ट सुविधा विकसित की है जो हवा में बूंदों को लटकाकर उनके बदलते तापमान और आर्द्रता का अध्ययन करती है।

साहू का शोध भारत के विविध जलवायु क्षेत्रों के लिए विशिष्ट वर्षा मॉडल विकसित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

IIT हैदराबाद के शुरुआती दिनों में, जब संस्थान एक पुराने आयुध कारखाने के स्कूल भवन में संचालित हो रहा था, साहू ने प्रयोगशालाओं और कक्षाओं को शून्य से बनाने में मदद की। उन्होंने न केवल शिक्षण दिया, बल्कि संस्थान की नींव रखने वाले प्रमुख शोधकर्ताओं में से एक रहे।

Did You Know?: प्रोफेसर साहू की टीम द्वारा विकसित सुविधा भारत में अपनी तरह की पहली तकनीक है, जो हवा में तैरती बूंदों के व्यवहार का अध्ययन करती है।

Frequently Asked Questions

1. प्रोफेसर कीर्ति चंद्र साहू को कौन सा पुरस्कार मिला है?
उन्हें वर्ष 2026 के लिए प्रतिष्ठित 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है।

2. उनके शोध का मुख्य विषय क्या है?
उनका शोध बारिश की बूंदों के भौतिक गुणों और उनके गिरने के दौरान होने वाले परिवर्तनों पर आधारित है।