कर्नाटक में शिक्षकों और व्याख्याताओं को जनगणना, जाति सर्वेक्षण और चुनावी कार्यों में झोंकने से शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है। SIR कार्यों के कारण स्कूलों में पढ़ाई का नुकसान हो रहा है।

  • शिक्षकों को SIR (विशेष गहन संशोधन) और जाति सर्वेक्षण जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है।
  • बेंगलुरु के सरकारी कॉलेजों में आधे से अधिक व्याख्याता चुनावी कार्यों के लिए तैनात हैं।
  • पढ़ाई और प्रशासनिक कार्यों के बीच संतुलन बनाने में शिक्षक और छात्र दोनों संघर्ष कर रहे हैं।

बेंगलुरु: कर्नाटक के सरकारी स्कूलों और प्री-यूनिवर्सिटी (PU) कॉलेजों में एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है। शिक्षकों और व्याख्याताओं को उनके प्राथमिक कर्तव्य यानी 'पढ़ाने' से हटाकर लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है। हालिया मामला 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) का है, जिसने शैक्षणिक गतिविधियों को पूरी तरह से बाधित कर दिया है।

प्रशासनिक कार्यों का बढ़ता बोझ

शिक्षकों का आरोप है कि उन्हें चुनावी नामावली के सत्यापन और आपत्ति चरणों में लगाया जा रहा है। एक हाई स्कूल शिक्षक ने बताया कि उन्हें न केवल सर्वेक्षण कार्य करना पड़ रहा है, बल्कि काम से इनकार करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। विडंबना यह है कि एक तरफ सरकार उन्हें चुनावी कार्य पूरा करने का दबाव दे रही है, वहीं दूसरी तरफ स्कूल में समय पर पाठ्यक्रम और परीक्षाएं पूरी करने का भी आदेश दिया गया है।

BozokMedia विश्लेषण: शिक्षा बनाम प्रशासन

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि शिक्षा विभाग का उपयोग एक विशाल मानव संसाधन के रूप में किया जा रहा है, जो कि गलत है। जब शिक्षकों को जनगणना, जाति सर्वेक्षण और अब SIR जैसे कार्यों में तैनात किया जाता है, तो इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ता है। बेंगलुरु दक्षिण जिले की एक शिक्षिका ने बताया कि दोपहर में SIR कार्य के कारण पाठ्यक्रम अधूरा रह जाता है और छात्र summative assessment जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं के लिए तैयार नहीं हो पा रहे हैं।

शिक्षकों को केवल प्रशासनिक कार्य करने वाली मशीन न समझें; यदि कक्षाएं खाली रहेंगी, तो शिक्षा का स्तर गिरना तय है।

पिछले एक वर्ष का घटनाक्रम देखें तो शिक्षकों को लगातार विभिन्न सर्वेक्षणों में झोंका गया है। मई 2025 में जस्टिस नागमोहन दास आयोग के लिए जाति सर्वेक्षण, सितंबर 2025 में पिछड़ा वर्ग आयोग का सर्वेक्षण और अप्रैल 2026 में जनगणना 2027 की सूची बनाना—शिक्षकों के लिए यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

डेटा का विश्लेषण: कार्यों का क्रम

अवधिकार्य का प्रकारप्रभावित कर्मचारी
मई/जून 2025जाति सर्वेक्षण (SC/ST)शिक्षक और KPTCL कर्मचारी
सितंबर 2025पिछड़ा वर्ग सर्वेक्षणशिक्षक और व्याख्याता
अप्रैल 2026जनगणना 2027 सूचीकरणशिक्षक
जून 2026 - वर्तमानSIR (चुनावी नामावली)65,000+ शिक्षक/BLOs

बेंगलुरु सेंट्रल एजुकेशनल डिस्ट्रिक्ट के उप निदेशक (DDPU) ने चिंता व्यक्त करते हुए विभाग को पत्र लिखा है कि 20 सरकारी PU कॉलेजों में कार्यरत 228 व्याख्याताओं में से 127 को SIR ड्यूटी पर लगा दिया गया है। इससे लगभग 7,858 छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है।

Did You Know?: कर्नाटक में चुनावी कार्यों के लिए वर्तमान में 65,000 से अधिक शिक्षकों को बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में तैनात किया गया है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: SIR क्या है और शिक्षक इसमें क्यों शामिल हैं?
उत्तर: SIR (Special Intensive Revision) चुनावी नामावली का विशेष गहन संशोधन है, जिसमें त्रुटियों को सुधारने के लिए शिक्षकों को तैनात किया गया है।

प्रश्न 2: इस स्थिति का छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
उत्तर: शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है और परीक्षाएं प्रभावित हो रही हैं।