राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने NEET जैसी बड़ी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित परीक्षण (CBT) में बदलने के लिए AICTE के साथ मिलकर सरकारी संस्थानों में आईटी बुनियादी ढांचे का मूल्यांकन शुरू कर दिया है।
- NTA और AICTE मिलकर देशभर में नए 'स्टैंडर्ड टेस्टिंग सेंटर्स' (STC) स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं।
- NEET-UG परीक्षा को अगले साल से पेन-पेपर के बजाय कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में लाने की योजना है।
- सरकारी संस्थानों को 15 सितंबर तक अपने कंप्यूटर लैब, इंटरनेट और बिजली बैकअप का विवरण जमा करना होगा।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने देश की महत्वपूर्ण परीक्षाओं, विशेष रूप से NEET जैसी उच्च-स्तरीय परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। NTA ने All India Council for Technical Education (AICTE) से सरकारी संस्थानों में उपलब्ध आईटी बुनियादी ढांचे और खाली स्थानों का मानचित्रण (mapping) करने में मदद मांगी है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर में 'स्टैंडर्ड टेस्टिंग सेंटर्स' (STC) का एक व्यापक नेटवर्क तैयार करना है जो Computer-Based Testing (CBT) की सुविधा प्रदान कर सके।
हाल ही में हुए NEET-UG 2026 के विवादों और पेपर लीक की घटनाओं के बाद, केंद्र सरकार और परीक्षा नियामक संस्थाओं पर परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बढ़ाने का भारी दबाव है। NTA की योजना अगले वर्ष से NEET को पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित मोड में स्थानांतरित करने की है। लगभग 22 लाख छात्रों की भागीदारी वाली इस परीक्षा को डिजिटल बनाना न केवल नकल रोकने में मदद करेगा, बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया को भी तेज करेगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की विशाल छात्र आबादी को देखते हुए, पारंपरिक पेन-पेपर मोड में सुरक्षा चूक की संभावना हमेशा बनी रहती है। CBT मोड में संक्रमण न केवल मानवीय त्रुटियों को कम करेगा, बल्कि परीक्षा केंद्रों के भौगोलिक वितरण को भी सुव्यवस्थित करेगा, जिससे छात्रों को दूर-दराज के क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण परीक्षण सुविधा मिल सकेगी।
परीक्षाओं का डिजिटलीकरण केवल तकनीक का बदलाव नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन की अखंडता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अनिवार्य कदम है।
AICTE ने इस दिशा में कार्रवाई करते हुए सभी सरकारी तकनीकी विश्वविद्यालयों और अनुमोदित संस्थानों के कुलपतियों को निर्देश जारी किया है। संस्थानों को अपने कंप्यूटर लैब की क्षमता, प्रोसेसर (जैसे Intel i3 या i5), ऑपरेटिंग सिस्टम और भौतिक सुरक्षा उपायों जैसे कि गोपनीयता स्क्रीन (privacy screens) का विस्तृत विवरण देना होगा। इसके अलावा, इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए LAN, फाइबर ऑप्टिक केबल और बैकअप इंटरनेट लिंक की उपलब्धता की भी जांच की जा रही है।
बिजली की कटौती परीक्षाओं के दौरान एक बड़ा जोखिम होती है, इसलिए AICTE ने संस्थानों से उनके इलेक्ट्रिकल बैकअप (जैसे UPS या जनरेटर) की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही, सुरक्षा के दृष्टिकोण से सीसीटीवी कवरेज और लैब के आसपास के गलियारों की निगरानी की स्थिति का भी ऑडिट किया जाएगा।
| सुविधा (Facility) | आवश्यकता (Requirement) | उद्देश्य (Purpose) |
|---|---|---|
| कंप्यूटर लैब | प्रोसेसर और नोड क्षमता | CBT संचालन सुनिश्चित करना |
| इंटरनेट | हाई-स्पीड फाइबर/डेडिकेटेड लाइन | तकनीकी रुकावटों को रोकना |
| बिजली बैकअप | UPS/जनरेटर क्षमता | परीक्षा के दौरान निरंतरता |
| सुरक्षा | CCTV और बायोमेट्रिक | नकल और धांधली रोकना |
इसके अलावा, संस्थानों को उम्मीदवारों के आवागमन (candidate traffic) को प्रबंधित करने के लिए भौतिक ब्लूप्रिंट भी प्रदान करना होगा। इसमें पंजीकरण क्षेत्र, बायोमेट्रिक सत्यापन, फ्रिस्किंग (तलाशी) के लिए अलग स्थान और दिव्यांगों (PwD) के लिए रैंप और सुलभ शौचालयों की उपलब्धता शामिल है। AICTE ने स्पष्ट किया है कि यह डेटा संग्रह केवल सरकारी स्वामित्व वाले और अनुमोदित संस्थानों तक ही सीमित है।
Frequently Asked Questions
1. क्या NEET अब पूरी तरह से ऑनलाइन होगा?
NTA की योजना अगले वर्ष से NEET को कंप्यूटर आधारित परीक्षण (CBT) मोड में स्थानांतरित करने की है, ताकि सुरक्षा और दक्षता बढ़ाई जा सके।
2. AICTE संस्थानों से क्या जानकारी मांग रहा है?
AICTE कंप्यूटर लैब की क्षमता, इंटरनेट की गति, बिजली बैकअप, सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी स्टाफ का विस्तृत विवरण मांग रहा है।