केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने CBSE को निर्देश दिया है कि वह उत्तर पुस्तिकाओं के लिए केवल RTI नियमों के तहत फोटोकॉपी शुल्क ले और उन छात्रों को री-इवैल्यूएशन से न रोके जिन्होंने RTI का उपयोग किया है।

  • CBSE को अब उत्तर पुस्तिकाओं के लिए केवल RTI नियमों, 2012 के तहत निर्धारित फोटोकॉपी शुल्क लेना होगा।
  • RTI के माध्यम से कॉपी प्राप्त करने वाले छात्रों को री-इवैल्यूएशन या वेरिफिकेशन के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
  • CIC ने स्पष्ट किया कि RTI अधिनियम की धारा 22 किसी भी विरोधाभासी संस्थागत नियमों पर प्रभावी होगी।

हजारों छात्रों को बड़ी राहत देते हुए, केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुंच से संबंधित प्रतिबंधात्मक और महंगी नीतियों के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को फटकार लगाई है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि बोर्ड केवल RTI नियम, 2012 के तहत निर्धारित फोटोकॉपी शुल्क ले, न कि वह भारी-भरकम राशि जो बोर्ड की आंतरिक प्रक्रियाओं में मांगी जाती है।

यह मामला तब सामने आया जब कक्षा 10 के एक छात्र ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के लिए RTI आवेदन दायर किया। छात्र ने बताया कि बोर्ड की नियमित प्रक्रिया में पांच विषयों की फोटोकॉपी, री-वेरिफिकेशन और प्रति प्रश्न री-इवैल्यूएशन शुल्क मिलाकर कुल खर्च लगभग 10,000 रुपये तक पहुंच सकता है, जो एक आम छात्र के लिए भारी वित्तीय बोझ है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह फैसला उस व्यवस्था को खत्म करता है जहां CBSE प्रशासनिक सर्कुलर के जरिए पारदर्शिता को 'पेड मॉडल' बना रहा था। बोर्ड अनिवार्य रूप से उन छात्रों को दंडित कर रहा था जो RTI अधिनियम के कानूनी रास्ते को चुनते थे। यह निर्णय इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि वैधानिक अधिकारों को संस्थागत दिशा-निर्देशों द्वारा दबाया नहीं जा सकता।

CIC ने 19 मई, 2025 के उस CBSE सर्कुलर पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया था कि RTI के माध्यम से कॉपी प्राप्त करने वाले उम्मीदवार दोबारा वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन नहीं कर सकते। आयोग ने कहा कि ऐसी पाबंदी पारदर्शिता के कानून की भावना के खिलाफ है।

RTI अधिनियम की संस्थागत उपनियमों पर सर्वोच्चता यह सुनिश्चित करती है कि पारदर्शिता एक अधिकार है, न कि केवल उन लोगों के लिए विलासिता जो महंगी फीस दे सकते हैं।

अपने फैसले के समर्थन में, CIC ने RTI अधिनियम की धारा 22 का हवाला दिया, जो इस कानून को किसी भी अन्य विरोधाभासी नियमों या उपकरणों पर प्राथमिकता देती है। इसके अलावा, आयोग ने ICSI बनाम पारस जैन मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि संस्थागत उपचार और RTI ढांचा एक-दूसरे के पूरक हैं, विरोधी नहीं।

विशेषता CBSE आंतरिक प्रक्रिया RTI मार्ग (CIC के अनुसार)
लागत अधिक (10,000 रुपये तक) नाममात्र फोटोकॉपी शुल्क
री-इवैल्यूएशन अधिकार उपलब्ध (सशुल्क) अब सुरक्षित/उपलब्ध
कानूनी आधार बोर्ड सर्कुलर RTI अधिनियम, 2005 / धारा 22

आयोग ने अब CBSE को अपने 19 मई के सर्कुलर में संशोधन करने का निर्देश दिया है ताकि छात्रों को यह न चुनना पड़े कि उन्हें अपनी मार्कशीट देखनी है या उसे चुनौती देनी है। उम्मीद है कि यह फैसला भारत के अन्य शिक्षा बोर्डों के लिए भी एक मिसाल बनेगा।

क्या आप जानते हैं?: RTI अधिनियम की धारा 22 को 'ओवरराइडिंग क्लॉज' कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि यदि कोई अन्य कानून RTI अधिनियम के साथ संघर्ष करता है, तो RTI अधिनियम ही मान्य होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या मैं RTI के जरिए पेपर मिलने के बाद भी री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकता हूँ?
हाँ, CIC ने फैसला सुनाया है कि RTI के माध्यम से अपनी उत्तर पुस्तिका प्राप्त करना आपको बोर्ड नियमों के तहत री-इवैल्यूएशन के अधिकार से वंचित नहीं करता।

प्रश्न 2: अब CBSE उत्तर पुस्तिकाओं के लिए कितना शुल्क लेगा?
CBSE को निर्देश दिया गया है कि वह केवल RTI नियम, 2012 के अनुसार निर्धारित फोटोकॉपी शुल्क ही ले।