दिल्ली सरकार ने 75 CM SHRI स्कूलों में 'ईट वेल, लिव वेल' पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य 30,000 बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान को दैनिक आदतों में बदलना है। यह कार्यक्रम केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन शैली पर केंद्रित है।
- 75 CM SHRI स्कूलों के लगभग 30,000 छात्र इस पहल से लाभान्वित होंगे।
- कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 'फाउंडेशनल वेलबीइंग लिटरेसी' (FWL) को बढ़ावा देना है।
- इसमें 21 व्यक्तिगत आदतें, 7 सामाजिक कौशल और 7 ग्रह (पर्यावरण) कौशल शामिल हैं।
- कोई अतिरिक्त पाठ्यपुस्तक या परीक्षा नहीं होगी; सीखना व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से होगा।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए 'ईट वेल, लिव वेल' (Eat Well Live Well) पहल की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम को 75 चयनित CM SHRI स्कूलों में लागू किया गया है, जिससे लगभग 30,000 बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार आने की उम्मीद है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों और शिक्षकों की उपस्थिति में इस कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया।
इस पहल का मूल विचार यह है कि जिस तरह 'फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी' (FLN) बच्चों को सीखने का आधार प्रदान करती है, उसी तरह 'फाउंडेशनल वेलबीइंग लिटरेसी' (FWL) उन्हें स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने का आधार प्रदान करेगी। शिक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर में बच्चों के पास जानकारी की कमी नहीं है, लेकिन चुनौती उस जानकारी को वास्तविक जीवन की आदतों में बदलने की है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आधुनिक शहरी जीवन में बच्चों के बीच जंक फूड का बढ़ता चलन और शारीरिक गतिविधियों की कमी एक गंभीर समस्या बन गई है। 'ईट वेल, लिव वेल' केवल एक स्वास्थ्य अभियान नहीं है, बल्कि यह एक 'होल-स्कूल अप्रोच' है। यह पोषण, स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और शारीरिक गतिविधि को स्कूल के वातावरण का अभिन्न हिस्सा बनाता है, जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है।
"स्कूल वह सबसे महत्वपूर्ण स्थान हैं जहाँ बच्चे स्वस्थ आदतों को सीख सकते हैं और उन्हें नियमित रूप से अभ्यास में लाकर वयस्कता तक ले जा सकते हैं।" - डॉ. भारती कुलकर्णी, निदेशक, ICMR-राष्ट्रीय पोषण संस्थान।
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे किसी अतिरिक्त विषय या बोझिल पाठ्यक्रम के रूप में नहीं पेश किया गया है। छात्रों को किसी परीक्षा या टेक्स्टबुक का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके बजाय, छोटी बातचीत, विजुअल क्यूज़ (दृश्य संकेतों) और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से उन्हें स्वस्थ व्यवहार सिखाया जाएगा।
कार्यक्रम के ढांचे को तीन मुख्य स्तंभों में विभाजित किया गया है: 21 व्यक्तिगत आदतें, 7 सामाजिक कौशल और 7 ग्रह कौशल। यह न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करता है, बल्कि दूसरों के प्रति संवेदनशीलता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करता है।
प्रगति की निगरानी के लिए प्रत्येक स्कूल में 'स्कूल वेलबीइंग कमिटी' का गठन किया जाएगा। यह समिति 'स्कूल वेलबीइंग स्कोर' का उपयोग करके यह आकलन करेगी कि स्कूल वर्तमान में कहाँ खड़ा है और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। इस पहल को ICMR-राष्ट्रीय पोषण संस्थान, लेडी इरविन कॉलेज और दिल्ली विश्वविद्यालय के होम इकोनॉमिक्स संस्थान के विशेषज्ञों का समर्थन प्राप्त है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या इस कार्यक्रम के लिए बच्चों को अलग से परीक्षा देनी होगी?
उत्तर: नहीं, यह कार्यक्रम किसी परीक्षा या पाठ्यपुस्तक पर आधारित नहीं है; यह पूरी तरह से व्यावहारिक गतिविधियों और दैनिक आदतों पर केंद्रित है।
उत्तर: इसका अर्थ है बच्चों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाना और उन्हें ऐसी आदतें सिखाना जिससे पृथ्वी की रक्षा हो सके।