आंध्र प्रदेश के ओंगोल में युवाओं को भविष्य की तकनीकों में कुशल बनाने के लिए एक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की शुरुआत की गई है। यह पहल इलेक्ट्रिक वाहनों और ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खोलेगी।
- ओंगोल के सरकारी ITI कौशल विकास केंद्र में EV और ड्रोन तकनीक केंद्र की शुरुआत।
- APSSDC, खनन विभाग और सेंटूरियन यूनिवर्सिटी की संयुक्त पहल।
- ITI छात्रों, डिप्लोमा धारकों, स्कूल ड्रॉपआउट्स और महिलाओं के लिए खुला प्रशिक्षण।
आंध्र प्रदेश के ओंगोल में सोमवार, 7 सितंबर 2026 को 'इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और ड्रोन प्रौद्योगिकियों पर उत्कृष्टता केंद्र' (Center of Excellence) के प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह केंद्र सरकारी ITI कौशल विकास केंद्र के परिसर में स्थापित किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल से लैस करना है।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना APSSDC, राज्य के खनन विभाग और सेंटूरियन यूनिवर्सिटी के बीच एक रणनीतिक साझेदारी का परिणाम है। इस त्रिपक्षीय सहयोग का लक्ष्य एक ऐसा ईकोसिस्टम बनाना है जहाँ सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक प्रशिक्षण का संगम हो, ताकि छात्र उद्योग की वास्तविक मांगों को पूरा कर सकें।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत वर्तमान में वैश्विक स्तर पर ईवी और ड्रोन हब बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। ओंगोल जैसे क्षेत्रों में इस तरह के केंद्रों की स्थापना न केवल शहरी क्षेत्रों पर निर्भरता कम करेगी, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी युवाओं को सीधे भविष्य की अर्थव्यवस्था (Future Economy) से जोड़ेगी। यह कदम 'स्किल इंडिया' मिशन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करता है।
"तकनीकी शिक्षा का लोकतंत्रीकरण ही भारत को एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनाएगा, और ओंगोल का यह केंद्र इसी दिशा में एक मील का पत्थर है।"
प्रकासम जिला कलेक्टर पी. राजा बाबू ने इस अवसर पर कहा कि यह पहल जिले के युवाओं को भविष्योन्मुखी तकनीकी क्षेत्रों में सक्षम बनाने के लिए डिज़ाइन की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कार्यक्रम न केवल वेतनभोगी रोजगार बल्कि स्वरोजगार (Self-employment) के रास्ते भी खोलेगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दायरे को व्यापक रखा गया है। इसमें न केवल ITI और डिप्लोमा धारकों को शामिल किया गया है, बल्कि स्कूल और कॉलेज छोड़ने वाले युवाओं और महिलाओं को भी विशेष रूप से प्रोत्साहित किया गया है। प्रशासन का मानना है कि तकनीकी शिक्षा में समावेशिता लाने से सामाजिक-आर्थिक विकास की गति तेज होगी।
| लक्षित समूह | प्रशिक्षण का लाभ |
|---|---|
| ITI/डिप्लोमा छात्र | उन्नत तकनीकी प्रमाणन और प्लेसमेंट |
| ड्रॉपआउट्स/बेरोजगार | कौशल विकास और नए करियर विकल्प |
| महिलाएं | STEM क्षेत्रों में सशक्तिकरण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: इस कार्यक्रम के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
उत्तर: सभी पात्र ITI/डिप्लोमा धारक, स्कूल-कॉलेज ड्रॉपआउट, महिलाएं और बेरोजगार युवा पंजीकरण कर सकते हैं।
प्रश्न 2: इस केंद्र का संचालन कौन कर रहा है?
उत्तर: यह APSSDC, खनन विभाग और सेंटूरियन यूनिवर्सिटी की एक संयुक्त पहल है।