राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टलों की भारी कमी को देखते हुए दिल्ली सरकार और UGC को एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने का आदेश दिया है। यह कदम छात्रों के बढ़ते वित्तीय बोझ और सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए उठाया गया है।

  • NHRC ने दिल्ली सरकार और UGC को 15 अक्टूबर 2026 तक विस्तृत कार्ययोजना जमा करने को कहा है।
  • दिल्ली विश्वविद्यालय के लगभग 72,000 स्नातक छात्र हॉस्टल की कमी के कारण निजी पीजी (PG) पर निर्भर हैं।
  • सत्य निकेतन में पीजी इमारत गिरने और 7 मौतों के बाद आयोग ने इस मुद्दे पर सख्ती दिखाई है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को एक व्यापक और समयबद्ध योजना तैयार करने का निर्देश दिया है, ताकि दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के छात्रों के लिए पर्याप्त और किफायती हॉस्टल आवास की समस्या का समाधान किया जा सके। यह निर्देश विशेष रूप से उन छात्रों के लिए है जो राष्ट्रीय राजधानी के बाहर से आते हैं और आवास की गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं।

यह हस्तक्षेप सत्य निकेतन में एक पीजी (Paying Guest) आवास के ढहने की दुखद घटना के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें सात लोगों की जान चली गई थी। इस घटना ने निजी आवासों में छात्रों की सुरक्षा और वहां की जर्जर स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। NHRC ने 7 सितंबर को जारी एक नोटिस में दिल्ली के मुख्य सचिव और UGC के अध्यक्ष को विश्वविद्यालय के साथ मिलकर काम करने और 15 अक्टूबर 2026 तक एक विस्तृत एक्शन प्लान प्रस्तुत करने को कहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विवाद

आयोग ने इस मुद्दे को 2025 में 'नेटवर्क फॉर एक्सेस टू जस्टिस एंड मल्टीडिसिप्लिनरी आउटरीच फाउंडेशन' द्वारा दायर एक शिकायत के बाद उठाया था। शिकायत में बताया गया था कि विश्वविद्यालय में लगभग 72,000 स्नातक छात्र हैं, लेकिन हॉस्टल की सुविधाएं बेहद अपर्याप्त हैं। इसके परिणामस्वरूप, बाहरी राज्यों से आने वाले छात्रों को महंगे निजी पीजी या किराए के कमरों में रहना पड़ता है, जिससे उन पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है और उनकी शिक्षा व मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

30 सितंबर 2025 को प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाले NHRC बेंच ने इस मामले पर विचार किया था। हालांकि विश्वविद्यालय ने अपनी प्रतिक्रिया में बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता को स्वीकार किया, लेकिन NHRC ने पाया कि विश्वविद्यालय का जवाब अधूरा था। विश्वविद्यालय ने मौजूदा क्षमता, कमी की मात्रा, आवश्यक नए हॉस्टलों की संख्या या वित्तीय जिम्मेदारी के बारे में कोई स्पष्ट डेटा प्रदान नहीं किया था।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह मामला केवल बुनियादी ढांचे की कमी का नहीं है, बल्कि यह उच्च शिक्षा के लोकतंत्रीकरण से जुड़ा है। जब किफायती आवास उपलब्ध नहीं होते, तो आर्थिक रूप से कमजोर छात्र शिक्षा के समान अवसरों से वंचित हो जाते हैं। निजी पीजी माफिया का बढ़ता प्रभाव और सुरक्षा मानकों की अनदेखी छात्रों के जीवन को जोखिम में डाल रही है।

"आवास का अधिकार शिक्षा के अधिकार का एक अभिन्न अंग है; बिना सुरक्षित छत के शैक्षणिक उत्कृष्टता प्राप्त करना असंभव है।"

आयोग ने अब अधिकारियों से मौजूदा बुनियादी ढांचे के नवीनीकरण, उन्नयन और विस्तार की संभावनाओं की जांच करने को कहा है। साथ ही, प्रत्येक कॉलेज की व्यक्तिगत आवश्यकताओं का आकलन करने और कार्यान्वयन के लिए एक स्पष्ट समयसीमा निर्धारित करने का निर्देश दिया गया है।

क्या आप जानते हैं?: दिल्ली विश्वविद्यालय भारत के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक है, लेकिन इसके कई कॉलेज केवल शैक्षणिक सुविधाएं प्रदान करते हैं, जिससे हजारों छात्र हर साल आवास की तलाश में भटकते हैं।

Frequently Asked Questions

1. NHRC ने यह नोटिस क्यों जारी किया?
एक गैर-लाभकारी संस्था की शिकायत और सत्य निकेतन पीजी हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा और आवास की कमी को देखते हुए यह नोटिस जारी किया गया।

2. विश्वविद्यालय को क्या करना होगा?
विश्वविद्यालय को UGC और दिल्ली सरकार के साथ मिलकर हॉस्टल क्षमता का आकलन करना होगा और नए निर्माण या विस्तार की एक समयबद्ध योजना पेश करनी होगी।