टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की एक नई रिपोर्ट ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक गंभीर समस्या की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, स्कूलों में न केवल गणित और विज्ञान जैसे विषयों के शिक्षकों की भारी कमी है, बल्कि जो शिक्षक उपलब्ध हैं, उनमें विषय विशेषज्ञता की भी कमी देखी गई है।
- 35% स्कूलों में गणित और विज्ञान के शिक्षकों की कमी है।
- 41% तक गणित पढ़ाने वाले शिक्षकों ने स्नातक स्तर पर गणित नहीं पढ़ा है।
- रिपोर्ट में अंग्रेजी (31%) और क्षेत्रीय भाषाओं (30%) में भी शिक्षकों की कमी बताई गई है।
- TISS का अध्ययन आठ राज्यों के 422 स्कूलों और 3,600 शिक्षकों पर आधारित है।
भारतीय शिक्षा व्यवस्था एक दोहरे संकट का सामना कर रही है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की हालिया 'स्टेट ऑफ टीचर्स, टीचिंग एंड टीचर एजुकेशन फॉर इंडिया रिपोर्ट 2025' (SoTTTER-25) से पता चला है कि स्कूलों में केवल शिक्षकों के पदों का खाली होना ही समस्या नहीं है, बल्कि उपलब्ध शिक्षकों की योग्यता और उनके द्वारा पढ़ाए जाने वाले विषयों के बीच एक गहरा अंतर है।
विषय विशेषज्ञता का गंभीर संकट
रिपोर्ट के सबसे चौंकाने वाले आंकड़ों में से एक यह है कि 35% से 41% गणित शिक्षक सरकारी और निजी दोनों तरह के स्कूलों में ऐसे हैं, जिन्होंने अपने स्नातक (Undergraduate) स्तर पर गणित को एक मुख्य विषय के रूप में नहीं पढ़ा है। यह स्थिति छात्रों की नींव को कमजोर कर सकती है, क्योंकि जटिल अवधारणाओं को समझाने के लिए गहन विषय ज्ञान अनिवार्य है।
विषयों के अनुसार शिक्षकों की मांग
सर्वेक्षण में पाया गया कि विभिन्न विषयों के लिए शिक्षकों की आवश्यकता अलग-अलग है। गणित और विज्ञान के लिए सबसे अधिक मांग (35%) देखी गई। इसके बाद अंग्रेजी (31%) और क्षेत्रीय भाषाओं (30%) का स्थान रहा। इसके अलावा, शारीरिक शिक्षा, संगीत और कला जैसे विषयों के लिए भी लगभग 15-16% स्कूलों ने शिक्षकों की आवश्यकता जताई है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि केवल रिक्त पदों को भरने पर ध्यान दिया गया और शिक्षकों की विषय-विशिष्ट ट्रेनिंग को नजरअंदाज किया गया, तो शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना असंभव होगा। यह केवल संख्या का खेल नहीं है, बल्कि शिक्षा की गहराई का सवाल है।
केवल रिक्तियों को भरना पर्याप्त नहीं है; जब तक शिक्षक अपने पढ़ाए जाने वाले विषय में निपुण नहीं होंगे, तब तक सीखने के परिणाम (Learning Outcomes) नहीं सुधरेंगे।
TISS द्वारा किया गया यह अध्ययन असम, बिहार, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मिजोरम, पंजाब और तेलंगाना राज्यों में फैला हुआ था। इसमें 422 स्कूलों और 3,600 से अधिक शिक्षकों के डेटा का उपयोग किया गया है।
| विषय | शिक्षकों की कमी (%) |
|---|---|
| गणित और विज्ञान | 35% |
| अंग्रेजी | 31% |
| क्षेत्रीय भाषाएं | 30% |
| कला और संगीत | 15-16% |
Frequently Asked Questions
1. TISS की रिपोर्ट किन राज्यों पर केंद्रित है?
यह अध्ययन असम, बिहार, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मिजोरम, पंजाब और तेलंगाना में किया गया है।
2. गणित शिक्षकों के साथ मुख्य समस्या क्या है?
बड़ी संख्या में गणित पढ़ाने वाले शिक्षकों के पास स्नातक स्तर पर गणित की औपचारिक शिक्षा का अभाव है।