UPSC मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए GS पेपर 3 के महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न जारी किए गए हैं, जिसमें बैंकिंग तरलता और उपग्रह कक्षाओं जैसे जटिल विषयों को शामिल किया गया है।

  • बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त तरलता मौद्रिक नीति के प्रभाव को कम कर सकती है।
  • RBI को तरलता प्रबंधन के लिए VRRR और OMO जैसे उपकरणों का उपयोग करना पड़ता है।
  • LEO, MEO और GSO उपग्रह कक्षाएं कवरेज और विलंबता (latency) के बीच अलग-अलग संतुलन प्रदान करती हैं।

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2027 की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए आज का अभ्यास सत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। आज के प्रश्नों में अर्थव्यवस्था (Economy) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology) के दो अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है, जो GS पेपर 3 के पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग हैं।

विषय 1: बैंकिंग प्रणाली में अत्यधिक तरलता और RBI की चुनौतियां

पहला प्रश्न बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त तरलता (Excess Liquidity) के प्रभाव पर केंद्रित है। जब बैंकों के पास उनके सामान्य परिचालन के लिए आवश्यक धनराशि से अधिक पैसा होता है, तो यह स्थिति उत्पन्न होती है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, 3 सितंबर, 2026 को बैंकिंग प्रणाली की तरलता ₹10.3 लाख करोड़ के चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई।

अत्यधिक तरलता के कारण बाजार की ब्याज दरें RBI की रेपो दर से नीचे गिर सकती हैं, जिससे मौद्रिक नीति का संचरण (transmission) कमजोर हो जाता है। BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि RBI को इस स्थिति को संभालने के लिए Variable Rate Reverse Repo (VRRR) और Open Market Operations (OMO) जैसे उपकरणों का सावधानीपूर्वक उपयोग करना पड़ता है ताकि वित्तीय बाजारों में अस्थिरता न आए।

Why This Matters

मौद्रिक नीति की सफलता केवल रेपो दर पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि बाजार में नकदी की स्थिति कैसी है। यदि तरलता बहुत अधिक है, तो ब्याज दरों में कटौती का लाभ आम जनता और उद्योगों तक नहीं पहुंच पाता।

अत्यधिक तरलता मौद्रिक नीति के सिग्नलिंग फंक्शन को कमजोर कर सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति नियंत्रण कठिन हो जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समय-समय पर तरलता प्रबंधन के लिए विभिन्न उपकरणों का उपयोग करता रहा है, विशेष रूप से जब विदेशी मुद्रा प्रवाह (Foreign Exchange Inflows) के कारण घरेलू मुद्रा की आपूर्ति में अचानक वृद्धि होती है।

विषय 2: विभिन्न उपग्रह कक्षाएं (Satellite Orbits)

दूसरा प्रश्न अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से संबंधित है, जो LEO (Low Earth Orbit), MEO (Medium Earth Orbit), और GSO (Geosynchronous Orbit) के बीच के अंतर को समझने पर जोर देता है।

कक्षा (Orbit)ऊंचाई (Altitude)मुख्य विशेषता
LEOनिम्न (Low)उच्च रिज़ॉल्यूशन, कम विलंबता (Latency)
MEOमध्यम (Medium)नेविगेशन (GPS) के लिए उपयुक्त
GSOउच्च (High)स्थिर स्थिति, व्यापक कवरेज
Did You Know?: उपग्रहों की कक्षा जितनी कम होगी, उनसे डेटा प्राप्त करने में देरी (latency) उतनी ही कम होगी, जो हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए महत्वपूर्ण है।

Frequently Asked Questions

1. अतिरिक्त तरलता से मुद्रास्फीति पर क्या प्रभाव पड़ता है?
अत्यधिक तरलता बाजार में मुद्रा की आपूर्ति बढ़ाती है, जिससे मांग बढ़ सकती है और अंततः मुद्रास्फीति (inflation) का खतरा पैदा हो सकता है।

2. LEO उपग्रहों का मुख्य उपयोग क्या है?
LEO उपग्रहों का उपयोग मुख्य रूप से पृथ्वी अवलोकन और उच्च गति वाले उपग्रह इंटरनेट (जैसे Starlink) के लिए किया जाता है।