दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज के छात्र हॉस्टल की भारी कमी और महंगे पीजी (PG) आवासों से परेशान हैं। छात्रों ने कॉलेज प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि कैंपस में छात्रों के लिए जगह नहीं है, लेकिन गायों के लिए गौशाला मौजूद है।

  • हंसराज कॉलेज में हॉस्टल की भारी कमी के कारण छात्र महंगे निजी पीजी (PG) में रहने को मजबूर हैं।
  • छात्रों ने कैंपस में गौशाला की मौजूदगी और हॉस्टल की अनुपलब्धता के बीच विरोधाभास पर सवाल उठाए हैं।
  • प्रशासन के अनुसार, 80 करोड़ रुपये की लागत से नए हॉस्टल का निर्माण कार्य जारी है।

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज में इन दिनों छात्रों और प्रशासन के बीच तनाव देखा जा रहा है। मुख्य मुद्दा छात्रों के लिए आवास की अनुपलब्धता है। कॉलेज के कई छात्र इस बात से क्षुब्ध हैं कि जहाँ उन्हें रहने के लिए एक कमरा तक नसीब नहीं हो रहा, वहीं कैंपस के भीतर एक गौशाला (cowshed) संचालित की जा रही है।

छात्रों का आरोप है कि जिस जमीन पर वर्तमान में गौशाला बनी हुई है, वह मूल रूप से लड़कियों के हॉस्टल के लिए आवंटित की गई थी। वर्तमान में, कॉलेज का पुराना हॉस्टल ध्वस्त किया जा चुका है ताकि वहां नए आधुनिक छात्रावास बनाए जा सकें। इस बीच, छात्र बाहरी इलाकों में महंगे पीजी में रहने को मजबूर हैं, जहाँ किराया 10,000 रुपये प्रति माह से कम नहीं है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this situation highlights a systemic failure in urban educational infrastructure. When premier institutions fail to provide basic housing, it creates a financial barrier for students from marginalized backgrounds, effectively making higher education an expensive luxury rather than a merit-based opportunity.

"The disparity between livestock facilities and student housing in an academic environment reflects a misalignment of institutional priorities."

कॉलेज की प्रिंसिपल रमा शर्मा ने इन आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि कैंपस में गायों का होना 'गौशाला' चलाने जैसा नहीं है और इसका हॉस्टल निर्माण क्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि लगभग 80 करोड़ रुपये की लागत से दो नए हॉस्टल बनाए जा रहे हैं, जिनमें 560 से 600 छात्रों के रहने की क्षमता होगी।

दूसरी ओर, छात्रों का कहना है कि यह समस्या सालों से चली आ रही है। हरियाणा से आई एक छात्रा अनुष्का ने बताया कि पीजी का खर्च उनकी कोर्स फीस से भी अधिक हो गया है, और कमरे इतने छोटे हैं कि एक ही कमरे में तीन-तीन बेड लगाए गए हैं। छात्रों का मानना है कि प्रशासन केवल वादे करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं दिखता।

क्या आप जानते हैं?: दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों में हॉस्टल की सीटें कुल छात्रों की संख्या के 10% से भी कम हैं, जिससे हजारों छात्र निजी आवासों पर निर्भर हैं।
विवरण वर्तमान स्थिति प्रस्तावित योजना
छात्र क्षमता 200 (अस्थिर/मरम्मतधीन) 560-600 छात्र
लागत - ₹80 करोड़
आवास विकल्प महंगे निजी पीजी कैंपस हॉस्टल

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: हंसराज कॉलेज के छात्र क्यों विरोध कर रहे हैं?
छात्र कॉलेज में हॉस्टल की कमी और कैंपस में गौशाला की मौजूदगी के कारण प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहे हैं।

प्रश्न 2: नए हॉस्टल के निर्माण की क्या स्थिति है?
प्रिंसिपल के अनुसार, 80 करोड़ रुपये की लागत से दो नए हॉस्टल बन रहे हैं, जिनका कार्य फंड मिलते ही तेज कर दिया जाएगा।