तिरुपति स्थित मोहन बाबू विश्वविद्यालय में 'Integrating AYUSH with community medicine' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार संपन्न हुआ। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारत में समग्र और टिकाऊ सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक नया ढांचा तैयार करना था।
- आईसीएसएसआर (ICSSR) द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय सेमिनार का सफल समापन।
- AYUSH प्रणालियों और सामुदायिक चिकित्सा के एकीकरण पर जोर।
- पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल के बीच सहयोग की आवश्यकता।
तिरुपति के मोहन बाबू विश्वविद्यालय (MBU) परिसर में बुधवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार 'Integrating AYUSH with community medicine: A framework for holistic and sustainable public health in India' (IACMI2026) का भव्य समापन हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा प्रायोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक समावेशी और टिकाऊ बनाना है।
सेमिनार के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने गहन प्रस्तुतिकरण दिए। ओटी के CMPRH (आयुष मंत्रालय) से राजन, एसवी विश्वविद्यालय से पी. सावित्रम्मा और पुडुचेरी के CCRS से सथिया राजेश्वरन ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की प्रासंगिकता और एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल दृष्टिकोणों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञों ने तर्क दिया कि विभिन्न स्वास्थ्य देखभाल विषयों के बीच सहयोग को मजबूत करना ही टिकाऊ सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को प्राप्त करने का एकमात्र तरीका है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहाँ आयुर्वेद और योग की गहरी जड़ें हैं, उन्हें आधुनिक सामुदायिक चिकित्सा के साथ जोड़ना स्वास्थ्य सेवाओं की लागत को कम कर सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच बढ़ा सकता है। यह एकीकरण न केवल उपचार बल्कि निवारक स्वास्थ्य देखभाल (Preventive Healthcare) की दिशा में एक बड़ा कदम है।
"सामुदायिक चिकित्सा के साथ आयुष प्रणालियों का समन्वय ही भारत को वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व की ओर ले जाएगा।"
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के. सारधि और इंजीनियरिंग स्कूल के डीन बाबू देवासनपति ने एमबी स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज और आयोजकों के प्रयासों की सराहना की। सेमिनार की अध्यक्षता एम.आर. जयप्रकाश ने की और संचालन राधा रवि ने किया, जिन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इष्टतम परिणामों के लिए आयुष और सामुदायिक चिकित्सा का मेल अनिवार्य है।
कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रस्तुतीकरण देने वाले प्रतिभागियों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए, जिससे शोधकर्ताओं और छात्रों का उत्साहवर्धन हुआ।
Frequently Asked Questions
1. IACMI2026 सेमिनार का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका मुख्य उद्देश्य भारत में समग्र और टिकाऊ सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए आयुष प्रणालियों को सामुदायिक चिकित्सा के साथ एकीकृत करने का ढांचा तैयार करना था।
2. इस कार्यक्रम को किसने प्रायोजित किया था?
इस राष्ट्रीय सेमिनार को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा प्रायोजित किया गया था।