शैक्षणिक तनाव और आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए, IIT मद्रास और दिल्ली विश्वविद्यालय ने छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए विशेष मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण कार्यक्रम शुरू किए हैं।

  • IIT मद्रास ने छात्रों के भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए अभिभावकों को शिक्षित करने हेतु 'PREM' पहल शुरू की।
  • दिल्ली विश्वविद्यालय 'साइंस मीट्स सोशल साइंस' पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है।
  • दोनों पहल विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई हैं।

भारत के शैक्षणिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है, जहाँ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान अब केवल पढ़ाई तक सीमित न रहकर छात्रों के मनोवैज्ञानिक कल्याण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह स्वीकार करते हुए कि मानसिक स्थिरता के बिना शैक्षणिक उत्कृष्टता संभव नहीं है, दोनों संस्थानों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक को मिटाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किए हैं।

IIT मद्रास ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए छात्रों के प्राथमिक सपोर्ट सिस्टम यानी उनके माता-पिता को इस मुहिम से जोड़ा है। 'PREM – Parents’ Role in Encouraging and Mentoring' नामक पहल के माध्यम से, संस्थान इंटरैक्टिव ऑनलाइन सत्र आयोजित कर रहा है। वरिष्ठ सलाहकार मनोचिकित्सक यामिनी कन्नापन के नेतृत्व में, ये सत्र अभिभावकों को यह समझने में मदद करते हैं कि वे अपने बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को कैसे पहचानें और दबाव के बजाय सहानुभूति का माहौल कैसे बनाएं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि विश्वविद्यालय ढांचे में अभिभावकों की काउंसलिंग को शामिल करना एक रणनीतिक आवश्यकता है। दशकों से, भारत के शीर्ष संस्थानों के 'प्रेशर कुकर' वातावरण को छात्र तनाव से जोड़ा गया है। छात्र-अभिभावक संबंध पर ध्यान केंद्रित करके, IIT मद्रास शैक्षणिक दबाव के मूल कारण को संबोधित कर रहा है, जिससे अवसाद और बर्नआउट के जोखिम को कम किया जा सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य केवल बीमारी की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि उस लचीलेपन और सहायक पारिस्थितिकी तंत्र की उपस्थिति है जो एक छात्र को असफल होने और फिर से उभरने की शक्ति देता है।

इसी के साथ, दिल्ली विश्वविद्यालय “साइंस मीट्स सोशल साइंस: मेंटल वेल-बीइंग एंड हैप्पीनेस” विषय पर एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल (RIEC) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शोधकर्ताओं और छात्रों का एक विविध समूह खुशी के जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों पर चर्चा कर रहा है। इस सम्मेलन में म्यूजिक थेरेपी, माइंडफुलनेस और पोषण के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव जैसे अपरंपरागत लेकिन प्रभावी तरीकों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

इन अभियानों की तात्कालिकता इस बात से स्पष्ट होती है कि ये विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (10 सितंबर) के साथ मेल खाते हैं, जो WHO और IASP द्वारा स्थापित एक वैश्विक observance है। भारतीय युवाओं में चिंता और पेशेवर दबाव के बढ़ते रुझानों ने इन अंतःविषय दृष्टिकोणों को एक विलासिता के बजाय आवश्यकता बना दिया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ऐतिहासिक रूप से, भारतीय उच्च शिक्षा ने भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) के बजाय संज्ञानात्मक उपलब्धि (Cognitive Achievement) को प्राथमिकता दी है। हालांकि, पिछले दशक में शीर्ष संस्थानों में छात्र आत्महत्याओं में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। इसने धीरे-धीरे काउंसलिंग सेल की शुरुआत की, लेकिन 'खुशी के विज्ञान' और 'अभिभावक परामर्श' की ओर वर्तमान बदलाव भारतीय विश्वविद्यालयों द्वारा छात्र सफलता को देखने के तरीके में एक समग्र विकास को दर्शाता है।

विशेषताIIT मद्रास पहल (PREM)दिल्ली विश्वविद्यालय सम्मेलन
प्राथमिक लक्ष्यछात्रों के माता-पिताअकादमिक, छात्र और विशेषज्ञ
मुख्य फोकसअभिभावक मार्गदर्शन और संचारखुशी का अंतःविषय विज्ञान
प्रारूपइंटरैक्टिव ऑनलाइन सत्रराष्ट्रीय सम्मेलन/संगोष्ठी
क्या आप जानते हैं?: विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की स्थापना 2003 में आत्महत्या के आसपास की सामाजिक चुप्पी को तोड़ने और रोकथाम रणनीतियों के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करने के लिए की गई थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: IIT मद्रास में PREM पहल का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य अभिभावकों को उन उपकरणों से लैस करना है जिससे वे अपने बच्चों के साथ बेहतर संवाद कर सकें और शैक्षणिक यात्रा के दौरान उनकी भावनात्मक जरूरतों को समझ सकें।

प्रश्न 2: DU के राष्ट्रीय सम्मेलन में किन विषयों पर चर्चा की जा रही है?
सम्मेलन में म्यूजिक थेरेपी, माइंडफुलनेस, खुशी का विज्ञान, और कल्याण में आध्यात्मिकता और सामाजिक संबंधों की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है।