बायोटेक कॉन्क्लेव 2026 में भारत बायोटेक की सह-संस्थापक सुचित्रा एला ने जैव प्रौद्योगिकी के छात्रों को अकादमिक सीमाओं से बाहर निकलने, व्यावहारिक औद्योगिक अनुभव प्राप्त करने और व्यावसायिक व कंप्यूटेशनल कौशल में महारत हासिल करने की सलाह दी।

  • छात्रों को अकादमिक परिसरों से बाहर निकलकर उद्योग और अनुसंधान प्रयोगशालाओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करना चाहिए।
  • एक सफल बायोटेक उद्यमी बनने के लिए केवल वैज्ञानिक होना काफी नहीं है; व्यवसाय, विपणन और सरकारी नीतियों की समझ भी आवश्यक है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अनुसंधान की गति को बढ़ा सकता है, लेकिन यह व्यावहारिक प्रयोगशाला (वेट-लैब) अनुसंधान का स्थान कभी नहीं ले सकता।

वीआईटी चेन्नई और द हिंदू के सहयोग से आयोजित 'बायोटेक कॉन्क्लेव 2026' में भारत बायोटेक की सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक तथा सीआईआई (CII) की मनोनीत अध्यक्ष सुचित्रा एला ने जैव प्रौद्योगिकी के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का मंत्र दिया। चेन्नई के ताज कोनेमारा में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल अपने पाठ्यक्रम या विशेषज्ञता तक ही सीमित न रहें, बल्कि बहुआयामी भूमिकाएं अपनाने के लिए तैयार रहें।

डॉ. सुचित्रा एला ने छात्रों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि लाइफ साइंसेज (जीवन विज्ञान) का क्षेत्र बहुत तेजी से बदल रहा है। ऐसे में छात्रों को अपने शैक्षणिक परिसरों से बाहर निकलकर बाहरी प्रयोगशालाओं, अग्रणी संस्थानों और उद्योगों में काम करने के अवसर तलाशने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक औद्योगिक अनुभव का होना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है।

विज्ञान के साथ व्यावसायिक समझ भी है जरूरी

कार्यक्रम के दौरान एक छात्र के सवाल का जवाब देते हुए डॉ. एला ने स्पष्ट किया कि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में केवल एक अच्छा वैज्ञानिक होना ही पर्याप्त नहीं है। यदि कोई इस क्षेत्र में उद्यमी बनना चाहता है, तो उसे व्यावसायिक संचालन, विपणन, वितरण, आपूर्ति श्रृंखला और सरकारी नीतियों की गहरी समझ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कोई संगठन बढ़ता है, उसके नेतृत्वकर्ता को अलग-अलग भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं और वह केवल अपनी शैक्षणिक योग्यता के दायरे में बंधकर नहीं रह सकता।

डॉ. एला ने छात्रों को वेट-लैब (पारंपरिक प्रयोगशाला अनुसंधान) और कंप्यूटेशनल (डिजिटल व एआई-आधारित) दोनों तरह के कौशल विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के क्षेत्र में व्यावहारिक विज्ञान हमेशा प्राथमिक आधार रहेगा, भले ही एआई और डेटा विश्लेषण की भूमिका कितनी भी बढ़ जाए। नए स्नातकों को किसी भी संगठन में विभिन्न विभागों के कामकाज को समझने के लिए शुरुआती तीन से पांच साल का समय देना चाहिए।

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि वैश्विक स्वास्थ्य और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अब केवल पारंपरिक वैज्ञानिकों की नहीं, बल्कि 'साइंटिस्ट-बिजनेस लीडर्स' की मांग बढ़ रही है। शैक्षणिक ज्ञान और व्यावसायिक कौशल का यह समामेलन ही भविष्य में नए टीकों, दवाओं और स्वास्थ्य तकनीकों के त्वरित विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।

"हमें केवल सैद्धांतिक उम्मीदों के बजाय हमेशा प्रयोगात्मक डेटा और सुरक्षा मानकों के आधार पर निर्णय लेने चाहिए; यदि सुरक्षा परिणाम आश्वस्त करने वाले न हों, तो परियोजनाओं को रोकने का साहस होना चाहिए।" - सुचित्रा एला

जब एक शोधकर्ता के लिए किसी विचार या प्रोजेक्ट को बंद करने के सही समय के बारे में पूछा गया, तो डॉ. एला ने स्पष्ट किया कि निर्णय हमेशा सुरक्षा डेटा और विनियामक (regulatory) आवश्यकताओं के आधार पर होने चाहिए। उन्होंने एआई की सीमाओं पर बात करते हुए कहा कि एआई क्लिनिकल रिसर्च और विनिर्माण में समय को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन यह जीवन विज्ञान में शत-प्रतिशत परिचालन चालक नहीं बन सकता और न ही मानव वैज्ञानिकों की जगह ले सकता है।

विशेषताएआई-संचालित खोज (AI-driven Discovery)वेट-लैब बायोप्रोसेसिंग (Wet-Lab Bioprocessing)
प्राथमिक कार्यडेटा विश्लेषण और त्वरित भविष्यवाणीव्यावहारिक प्रयोग और वास्तविक सत्यापन
समय सीमाअत्यधिक तीव्र और कुशलसमय लेने वाली और चरणबद्ध प्रक्रिया
परिचालन भूमिकासहायक और सलाहकार उपकरणमुख्य परिचालन चालक और आधारशिला
Did You Know?: भारत बायोटेक ने भारत का पहला स्वदेशी कोविड-19 टीका 'कोवैक्सिन' (Covaxin) विकसित किया था, जो देश की वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षमता का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

Frequently Asked Questions

1. सुचित्रा एला ने बायोटेक छात्रों को क्या मुख्य सलाह दी?
उन्होंने छात्रों को अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने, बाहरी प्रयोगशालाओं और उद्योगों से व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने तथा केवल अपनी शैक्षणिक विशेषज्ञता तक सीमित न रहने की सलाह दी।

2. क्या एआई जैव प्रौद्योगिकी में वेट-लैब वैज्ञानिकों की जगह ले सकता है?
नहीं, डॉ. एला के अनुसार, एआई अनुसंधान की गति बढ़ा सकता है और बड़े डेटा को संभाल सकता है, लेकिन यह प्रयोगशालाओं में काम करने वाले व्यावहारिक वैज्ञानिकों और मानव मस्तिष्क का स्थान कभी नहीं ले सकता।