कर्नाटक में COMEDK UGET 2026 राउंड 4 काउंसलिंग के बाद 16,800 से अधिक इंजीनियरिंग सीटें खाली रह गई हैं, जिसमें कंप्यूटर साइंस (CSE) में ही 4,400 से अधिक सीटें शामिल हैं। यह डेटा दर्शाता है कि बेंगलुरु, मंगलुरु और बेलगावी जैसे प्रमुख केंद्रों में भी प्रीमियम तकनीकी शाखाओं को छात्र नहीं मिल रहे हैं।

  • कर्नाटक में COMEDK राउंड 4 सीट आवंटन के बाद 16,855 इंजीनियरिंग सीटें खाली रह गई हैं।
  • कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) में सबसे ज्यादा 4,411 सीटें खाली हैं, जो कुल खाली सीटों का 26.2% है।
  • दावणगेरे के बापूजी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में सबसे अधिक 121 CSE सीटें खाली दर्ज की गईं।

कर्नाटक के इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन हाल ही में जारी आंकड़ों ने शिक्षा जगत को चौंका दिया है। COMEDK UGET 2026 काउंसलिंग के राउंड 4 सीट आवंटन परिणामों के बाद, राज्य भर में कुल 16,855 इंजीनियरिंग सीटें खाली रह गई हैं। यह डेटा कर्नाटक के निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा के बाद का है, जो दर्शाता है कि छात्रों का रुझान पारंपरिक और यहां तक कि आधुनिक तकनीकी पाठ्यक्रमों से भी कम हो रहा है।

खाली सीटों के इस विशाल आंकड़े में सबसे बड़ा हिस्सा कंप्यूटर साइंस और उससे जुड़ी शाखाओं का है। कभी छात्रों की पहली पसंद रहने वाली कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) शाखा में इस साल 4,411 सीटें खाली रह गई हैं, जो कुल खाली सीटों का लगभग 26.2% है। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ECE) का नंबर आता है, जहां 2,566 सीटें खाली हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (AI/ML) जैसी नई और मांग वाली शाखाओं में भी 1,527 सीटें खाली पड़ी हैं।

पाठ्यक्रम के अनुसार खाली सीटों का विवरण

नीचे दी गई तालिका में प्रमुख इंजीनियरिंग शाखाओं में खाली बची सीटों की संख्या और उनका प्रतिशत साझा किया गया है:

रैंकइंजीनियरिंग शाखाखाली सीटेंकुल खाली सीटों में हिस्सेदारी (%)
1कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE)4,41126.2%
2इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ECE)2,56615.2%
3आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग (AI/ML)1,5279.1%
4मैकेनिकल इंजीनियरिंग1,2457.4%
5सिविल इंजीनियरिंग9695.7%

हैरानी की बात यह है कि कंप्यूटर साइंस में खाली सीटें केवल नए या कम लोकप्रिय कॉलेजों तक सीमित नहीं हैं। मानक CSE पाठ्यक्रम में ही अकेले 4,400 से अधिक सीटें खाली हैं। डेटा के अनुसार, दावणगेरे स्थित बापूजी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में सबसे अधिक 121 CSE सीटें खाली हैं। इसके बाद बेंगलुरु के अत्रिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में 82 और एएमसी इंजीनियरिंग कॉलेज में 76 सीटें खाली बची हैं। हालांकि, एमएस रमैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (5 सीटें) और सिद्धगंगा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (4 सीटें) जैसे शीर्ष संस्थानों में बहुत कम सीटें खाली हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि प्रीमियम इंजीनियरिंग शाखाओं, विशेष रूप से कंप्यूटर साइंस और एआई/एमएल में सीटों का खाली रहना आईटी क्षेत्र में नौकरी के बदलते परिदृश्य को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर तकनीकी कंपनियों में छंटनी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के कारण छात्र अब केवल पारंपरिक कोडिंग डिग्री पर निर्भर रहने के बजाय बहुमुखी और व्यावहारिक कौशल वाले पाठ्यक्रमों की ओर रुख कर रहे हैं। यह स्थिति इंजीनियरिंग कॉलेजों के बुनियादी ढांचे और उनकी प्रासंगिकता पर भी सवाल खड़े करती है।

"कंप्यूटिंग शाखाओं में इतनी बड़ी संख्या में सीटों का खाली रहना छात्रों के बदलते रुझान को दर्शाता है, जो वैश्विक टेक मंदी और बहुमुखी कौशल की मांग से प्रभावित है।"

भौगोलिक दृष्टि से देखें तो बेंगलुरु में खाली सीटों का सबसे बड़ा संकेंद्रण है, जिसका मुख्य कारण वहां बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग कॉलेजों का होना है। बेंगलुरु के अलावा, मंगलुरु में 1,311 और बेलगावी में 1,111 कुल इंजीनियरिंग सीटें खाली हैं। यह प्रवृत्ति स्पष्ट करती है कि केवल महानगरीय क्षेत्रों में स्थित होना ही कॉलेजों के लिए सीटें भरने की गारंटी नहीं रह गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पिछले एक दशक में, कर्नाटक में निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। आईटी बूम के दौरान, कॉलेजों ने कंप्यूटर साइंस और संबंधित आईटी शाखाओं में सीटों की संख्या को दोगुना कर दिया। हालांकि, बाजार की मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन के कारण अब कॉलेज अपनी क्षमता के अनुसार सीटें भरने में असमर्थ हो रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब सीटें खाली रही हैं, लेकिन कंप्यूटर साइंस जैसी प्रीमियम शाखा में इतनी बड़ी गिरावट शैक्षणिक नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय है।

क्या आप जानते हैं?: बेंगलुरु, जिसे भारत की सिलिकॉन वैली कहा जाता है, में 100 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, जो इसे दुनिया के सबसे सघन तकनीकी शिक्षा केंद्रों में से एक बनाता है।

Frequently Asked Questions

1. क्या ये खाली सीटें अंतिम आंकड़े को दर्शाती हैं?

नहीं, यह डेटा COMEDK राउंड 4 के निर्णय लेने की प्रक्रिया के बाद का है। अंतिम खाली सीटों की संख्या छात्रों द्वारा कॉलेजों में शारीरिक रूप से रिपोर्ट करने और प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

2. किस कॉलेज में कंप्यूटर साइंस की सबसे ज्यादा सीटें खाली हैं?

दावणगेरे के बापूजी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (BIET) में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) की सबसे अधिक 121 सीटें खाली हैं।