BRICS देश 'म्युचुअल रिकग्निशन ऑफ क्वालिफिकेशन' (MRQ) ढांचे पर बातचीत कर रहे हैं, जिससे भारतीय STEM डिग्री को 11 सदस्य देशों में मान्यता मिलना आसान हो सकता है। यह कदम उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच छात्रों की गतिशीलता और शोध सहयोग को बढ़ावा देगा।
- BRICS मंत्री छात्रों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए MRQ ढांचे पर बातचीत कर रहे हैं।
- मुख्य ध्यान STEM क्षेत्रों, जैसे AI, बायोटेक्नोलॉजी और उन्नत विनिर्माण पर है।
- भारतीय छात्रों के लिए रूस वर्तमान में सबसे पसंदीदा BRICS गंतव्य बना हुआ है।
- डिग्री मान्यता के बावजूद, पेशेवर लाइसेंसिंग नियम अभी भी संबंधित देशों के अनुसार लागू रहेंगे।
अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का परिदृश्य एक बड़े बदलाव की दहलीज पर है क्योंकि BRICS समूह—जिसमें अब ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई सहित 11 देश शामिल हैं—एक औपचारिक 'म्युचुअल रिकग्निशन ऑफ क्वालिफिकेशन' (MRQ) ढांचे की ओर बढ़ रहा है। भारत, जो 12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, शिक्षा और अनुसंधान में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
भुवनेश्वर में आयोजित 13वीं BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान, सदस्य देशों ने MRQ पर समझौते को आगे बढ़ाने के लिए वर्किंग ग्रुप की बैठकें बुलाने पर सहमति जताई। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच शैक्षणिक गतिशीलता और सहयोग को सुगम बनाना है, ताकि छात्रों को एक देश से दूसरे देश में अपनी डिग्री प्रमाणित कराने में कठिनाई न हो।
STEM कॉरिडोर की महत्वाकांक्षा
यह प्रस्तावित ढांचा विशेष रूप से STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। यदि योग्यताओं, क्रेडिट और शैक्षणिक मानकों को मैप किया जा सकता है, तो छात्र उच्च अध्ययन, शोध और रोजगार के लिए BRICS विश्वविद्यालयों के बीच आसानी से आवाजाही कर सकेंगे। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
"डिप्लोमैटिक घोषणाओं से निकलकर एक कार्यात्मक MRQ ढांचे की ओर बढ़ना यह तय करेगा कि क्या BRICS वास्तव में वैश्विक शिक्षा मानकों में पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है।"
छात्रों के वितरण का वर्तमान रुझान
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, BRICS देशों में भारतीय छात्रों का वितरण काफी असमान है। जनवरी 2025 के आंकड़ों के अनुसार, रूस सबसे बड़ा गंतव्य है जहाँ लगभग 27,000 भारतीय छात्र हैं। इसके बाद चीन (5,330), ईरान (2,930) और मिस्र (1,500) का स्थान है। यूएई के मामले में, कुल 2.5 लाख से अधिक भारतीय छात्र हैं, लेकिन उनमें से केवल 6,507 ही विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा ले रहे हैं, जबकि बाकी स्कूली छात्र हैं।
| देश | भारतीय विश्वविद्यालय छात्र (लगभग) | मुख्य क्षेत्र |
|---|---|---|
| रूस | 27,000 | मेडिकल/तकनीकी |
| चीन | 5,330 | प्रौद्योगिकी/व्यापार |
| यूएई | 6,507 | विविध/प्रोफेशनल |
| ईरान | 2,930 | विशेष शोध |
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह पहल केवल शिक्षा के बारे में नहीं है, बल्कि आर्थिक एकीकरण की एक रणनीतिक चाल है। योग्यताओं को सिंक्रोनाइज़ करके, BRICS देश वास्तव में उच्च कुशल पेशेवरों के लिए एक साझा श्रम बाजार बना रहे हैं। यदि यह सफल होता है, तो पश्चिमी प्रमाणपत्रों पर निर्भरता कम होगी और 'ग्लोबल साउथ' उत्कृष्टता के अपने मानक खुद तय कर सकेगा।
हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आपसी मान्यता का मतलब यह नहीं है कि हर भारतीय डिग्री पेशेवर अभ्यास के लिए स्वतः मान्य हो जाएगी। डॉक्टरों या वकीलों जैसे विनियमित व्यवसायों के लिए, देशों को अभी भी गुणवत्ता-सुनिश्चित मानकों और विशिष्ट नियमों का पालन करना होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या भारतीय डिग्री मुझे ब्राजील या चीन में काम करने की स्वचालित अनुमति देगी?
नहीं, जबकि MRQ ढांचा डिग्री की वैधता की मान्यता को आसान बनाता है, आपको अभी भी स्थानीय पेशेवर लाइसेंसिंग परीक्षा पास करनी पड़ सकती है।
प्रश्न 2: इस समझौते से किन क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ होगा?
मुख्य ध्यान STEM क्षेत्रों, जिसमें इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, AI और मेडिसिन शामिल हैं, पर होगा।