मंगलुरु में आयोजित प्रज्ञा 2026 संगोष्ठी में एमआरजी ग्रुप के के. प्रकाश शेट्टी ने 750 से अधिक छात्रों को संबोधित करते हुए आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व को समझाया।

  • दृष्टि (Vision) लक्ष्य को जन्म देती है, जबकि कर्म (Action) उसे आकार देता है।
  • आत्मविश्वास और सांस्कृतिक मूल्य व्यक्तिगत विकास की नींव हैं।
  • डिग्री केवल एक शुरुआत है; कौशल और दृष्टिकोण करियर का असली मार्ग तय करते हैं।

मंगलुरु के युवाओं को संबोधित करते हुए, एमआरजी ग्रुप के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के. प्रकाश शेट्टी ने जीवन में दृष्टि और कर्म के तालमेल की अनिवार्य आवश्यकता पर बल दिया। रामकृष्ण मिशन द्वारा आयोजित 'प्रज्ञा 2026' शैक्षिक संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर बोलते हुए, शेट्टी ने तर्क दिया कि जहाँ विज़न किसी लक्ष्य का खाका तैयार करता है, वहीं निरंतर और अनुशासित कर्म उस लक्ष्य को वास्तविकता में बदलता है।

रामकृष्ण मठ में आयोजित इस संगोष्ठी का उद्देश्य पेशेवर छात्रों के लिए शैक्षणिक शिक्षा और वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोग के बीच के अंतर को पाटना था। शेट्टी ने आधुनिक पेशेवर चुनौतियों और स्वामी विवेकानंद के जीवन के बीच गहरा संबंध स्थापित किया। उन्होंने कहा कि विवेकानंद का अटूट आत्मविश्वास और भारतीय परंपराओं के प्रति उनका गर्व ही उनकी वैश्विक सफलता का मुख्य कारण था।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि वर्तमान जॉब मार्केट में विश्वविद्यालय की डिग्रियों और रोजगार क्षमता के बीच एक बड़ा अंतर पैदा हो गया है। यह कहकर कि डिग्री केवल एक 'शुरुआत' है, शेट्टी उस प्रणालीगत समस्या को संबोधित कर रहे हैं जहाँ छात्र अक्सर प्रमाणन (certification) को ही योग्यता मान लेते हैं। 'चरित्र और सेवा' पर जोर देना केवल कॉर्पोरेट सफलता के बजाय समग्र नेतृत्व की ओर इशारा करता है।

शेट्टी ने अवसर के मनोविज्ञान पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि जीवन में आने वाले अवसर से कहीं अधिक महत्वपूर्ण वह दृष्टिकोण है जिसके साथ हम उसका सामना करते हैं। उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि सही समय पर सही निर्णय लेना उनके जीवन की दिशा को पूरी तरह बदल सकता है।

सफलता किसी एक अवसर का परिणाम नहीं है, बल्कि हर अवसर पर अपनाए गए सही दृष्टिकोण का परिणाम है।

यह कार्यक्रम 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक संबोधन की याद में आयोजित किया गया था। 'शिक्षित करें, सशक्त बनाएं, उन्नत करें: चरित्र और सेवा के जीवन का निर्माण' विषय पर आधारित इस कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के 750 से अधिक पेशेवर छात्रों ने भाग लिया।

संगोष्ठी का समापन उच्च-प्रभाव वाले इंटरैक्टिव सत्रों के साथ हुआ। एक विशेष सत्र में इस बात पर चर्चा की गई कि डिग्री केवल दरवाजा खोलती है, लेकिन कौशल, सकारात्मक दृष्टिकोण और सेवा भावना ही एक सार्थक और स्थायी करियर का मार्ग प्रशस्त करती है।

क्या आप जानते हैं?: स्वामी विवेकानंद ने 1893 के शिकागो भाषण की शुरुआत "अमेरिका की बहनों और भाइयों" शब्दों से की थी, जिसने तुरंत श्रोताओं का दिल जीत लिया और पश्चिम को भारतीय दर्शन से परिचित कराया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रज्ञा 2026 का मुख्य विषय क्या था?
इसका मुख्य विषय 'शिक्षित करें, सशक्त बनाएं, उन्नत करें: चरित्र और सेवा के जीवन का निर्माण' था।

इस शैक्षिक संगोष्ठी का आयोजन किसने किया था?
इसका आयोजन रामकृष्ण मिशन, मंगलुरु द्वारा रामकृष्ण मठ में किया गया था।