भारथियार विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसरों ने चेतावनी दी है कि प्रशासनिक विफलता और कुलपति समिति की अनुपस्थिति के कारण संस्थान की शैक्षणिक स्थिति गिर रही है। NIRF रैंकिंग में आई भारी गिरावट ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।
- NIRF रैंकिंग में भारी गिरावट: 2024 में 44वें स्थान से गिरकर 2025 में 76वें स्थान पर।
- प्रशासनिक विफलता: फाइल ट्रैकिंग सिस्टम लागू न होने से फाइलें 8 महीने तक लंबित।
- कुलपति समिति का अभाव: तीन सदस्यीय समिति में केवल एक सदस्य शेष।
- CAS कार्यान्वयन में देरी से शोध कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव।
कोयंबटूर स्थित भारथियार विश्वविद्यालय (BU), जिसे 2023 में NAAC द्वारा उच्चतम A++ ग्रेड प्रदान किया गया था, वर्तमान में एक गंभीर प्रशासनिक संकट से जूझ रहा है। विश्वविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने चिंता व्यक्त की है कि प्रशासनिक 'गैप्स' और नेतृत्व की कमी के कारण संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा तेजी से गिर रही है।
भारथियार विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष के. वसंत ने खुलासा किया कि उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों के बावजूद 'फाइल ट्रैकिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम' को लागू नहीं किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, महत्वपूर्ण प्रशासनिक फाइलें सात से आठ महीनों तक बिना किसी कार्रवाई के लंबित रहती हैं, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि किसी भी विश्वविद्यालय की रीढ़ उसके प्रशासनिक सुचारू संचालन और संकाय का मनोबल होता है। जब प्रशासनिक फाइलें अटकी रहती हैं, तो इसका सीधा असर शोध अनुदान, बुनियादी ढांचे के विकास और शैक्षणिक नवाचार पर पड़ता है। भारथियार विश्वविद्यालय के मामले में, यह प्रशासनिक जड़ता अब उसकी राष्ट्रीय रैंकिंग में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
इसके अतिरिक्त, गैर-शिक्षण कर्मचारियों द्वारा ESI कटौती विवाद को लेकर किए जा रहे दैनिक विरोध प्रदर्शनों ने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। संकाय सदस्यों की करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के कार्यान्वयन की मांग को भी पांच बार नजरअंदाज किया गया है।
प्रशासनिक स्थिरता के बिना, शैक्षणिक उत्कृष्टता केवल कागजों तक सीमित रह जाती है; वास्तविक प्रगति के लिए कुशल नेतृत्व अनिवार्य है।
CAS का कार्यान्वयन न केवल वेतन वृद्धि के लिए, बल्कि शोध क्षमता बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण है। एक सहायक प्रोफेसर जब एसोसिएट प्रोफेसर बनता है, तो वह 4 के बजाय 6 शोधार्थियों का मार्गदर्शन कर सकता है, और प्रोफेसर बनने पर यह संख्या 8 हो जाती है। शोध आउटपुट में यह कमी सीधे तौर पर विश्वविद्यालय की रैंकिंग को प्रभावित करती है।
विश्वविद्यालय की गिरावट को निम्नलिखित तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| श्रेणी (Category) | 2024 रैंकिंग | 2025 रैंकिंग |
|---|---|---|
| समग्र भारत रैंकिंग (Overall India) | 44 | 76 |
| समग्र विश्वविद्यालय रैंकिंग (Overall University) | 26 | 46 |
| राज्य सार्वजनिक विश्वविद्यालय (State Public Uni) | 8 | 10 |
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि फाइलों के त्वरित निपटान के लिए जिम्मेदार तीन सदस्यीय कुलपति (VC) समिति वर्तमान में अस्तित्वहीन है। उच्च शिक्षा सचिव के अलावा अन्य सदस्यों के कार्यकाल समाप्त होने या स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे के कारण यह समिति केवल नाममात्र की रह गई है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: NIRF रैंकिंग में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण प्रशासनिक कमियां हैं, जिसके कारण शैक्षणिक गतिविधियां और शोध आउटपुट प्रभावित हुए हैं।
प्रश्न 2: CAS का कार्यान्वयन क्यों महत्वपूर्ण है?
CAS के माध्यम से प्रोफेसरों का प्रमोशन होता है, जिससे वे अधिक संख्या में शोध छात्रों (Research Scholars) का मार्गदर्शन कर सकते हैं, जो रैंकिंग सुधारने के लिए आवश्यक है।